उम्रकैद व जुर्माने की सजा,
गुरुग्राम: 22 मार्च 2025,
गुरुग्राम में एक हत्या के मामले में आरोपी को दोषी करार दिया गया है। माननीय अदालत ने आरोपी को उम्रभर की सजा और जुर्माने की सजा सुनाई। यह घटना 2021 में घटित हुई थी, जब गाली-गलौच के कारण हत्या कर दी गई थी।
घटना का विवरण:
11 नवंबर 2021 को थाना सेक्टर-10ए, गुरुग्राम में पुलिस को सूचना प्राप्त हुई कि सेक्टर-37C, गुरुग्राम के एक खाली स्थान पर शव पड़ा हुआ है। पुलिस ने घटनास्थल पर पहुंचकर जांच की, जहां एक व्यक्ति का शव पाया गया था, जिसके सिर से खून बह रहा था। पुलिस ने एफएसएल, फिंगरप्रिंट टीम और सीन ऑफ क्राइम टीम से घटनास्थल की जांच करवाई।
सोमबीर नामक व्यक्ति ने पुलिस को एक लिखित शिकायत दी, जिसमें बताया गया कि वह आयुर्वेदिक दवाइयां सप्लाई करता है और इस काम में अशोक नामक व्यक्ति उसकी मदद कर रहा था। अशोक ने 10 नवंबर को उसके दूसरे कर्मचारी मुकुल की स्कूटी लेकर जाने के बाद, रात में एक फोन कॉल किया और बताया कि उसने अशोक नामक व्यक्ति को गाली-गलौच करने पर पत्थर मारकर हत्या कर दी और शव को सेक्टर-37 के झाड़ियों में फेंक दिया।
मामला दर्ज और आरोपी की गिरफ्तारी:
इस शिकायत पर पुलिस ने हत्या का मामला दर्ज किया। पुलिस ने आरोपी संदीप उर्फ पिंटू को 14 नवंबर 2021 को बिजनौर, उत्तर प्रदेश से गिरफ्तार किया। आरोपी की पहचान मुजफ्फरनगर, उत्तर प्रदेश के समाना गांव के निवासी संदीप उर्फ पिंटू के रूप में हुई। पूछताछ में आरोपी ने बताया कि मृतक के साथ शराब पीने के दौरान गाली-गलौच होने पर उसने मृतक के सिर पर हेलमेट से चोट मारी और गला घोंट दिया। बाद में मृतक को मरते हुए देख उसने उसके सिर पर पत्थर से वार किया जब तक कि वह मर नहीं गया।
आरोपी का आपराधिक इतिहास:
आरोपी संदीप का आपराधिक रिकॉर्ड भी था, और वह पूर्व में मुजफ्फरनगर, उत्तर प्रदेश में गिरोहबंदी और चोरी के कई मामलों में शामिल था। उसे वर्ष 2015 में चार साल तक जेल में भी रहना पड़ा था। संदीप ने अपने पुराने अपराधी रिकॉर्ड को छुपाने के लिए अपने ताऊ के बेटे के ड्राइविंग लाइसेंस और आधार कार्ड का इस्तेमाल किया और खुद को अशोक के नाम से गुरुग्राम में रह रहा था।
अदालत का फैसला:
गुरुग्राम पुलिस ने मामले की गहनता से जांच की और सभी आवश्यक साक्ष्य व गवाह पेश किए। अदालत ने 21 मार्च 2025 को आरोपी को दोषी करार दिया। माननीय अदालत ने आरोपी को धारा 302 (हत्या) IPC के तहत उम्रभर की सजा और 20,000 रुपये का जुर्माना, धारा 201 (हत्या के साक्ष्य को छिपाने) IPC के तहत 3 साल की कठोर सजा और 10,000 रुपये का जुर्माना, तथा धारा 419 (धोखाधड़ी) IPC के तहत 2 साल की कठोर सजा और 5,000 रुपये का जुर्माना सुनाया है।