
राधा रानी जी से मिलन (परिक्रमा) – 23 मार्च 2025
तिजारा राजस्थान 22 मार्च।
23 मार्च 2025 को राधा रानी जी के प्रति श्रद्धा और भक्ति में एक विशेष आयोजन हो रहा है, जिसे “राधा रानी से मिलन” या “राधा रानी की परिक्रमा” कहा जाता है। यह आयोजन भक्तों के लिए आध्यात्मिक और धार्मिक महत्व का है।
राधा रानी से मिलन (परिक्रमा)
समय: 23 मार्च 2025, प्रातः 8:00 बजे
स्थल: राधा रानी के प्रमुख मंदिर (मथुरा-वृंदावन या अन्य संबंधित स्थानों पर परिक्रमा)
राधा रानी का मिलन, या उनकी परिक्रमा, भक्तों के लिए एक अत्यंत श्रद्धेय और आध्यात्मिक अनुभव होता है। राधा रानी जी, जो भगवान श्री कृष्ण की परम भक्ति और प्रेम का प्रतीक हैं, उनके प्रति श्रद्धा व्यक्त करने के लिए भक्त इस अवसर पर परिक्रमा करते हैं।
परिक्रमा का महत्व:
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भक्ति और प्रेम का प्रतीक: राधा रानी और श्री कृष्ण के संबंधों को प्रेम और भक्ति के उच्चतम स्तर के रूप में देखा जाता है। राधा रानी की परिक्रमा से भक्तों को यह भक्ति और प्रेम के अद्भुत रूप को समझने का अवसर मिलता है।
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आध्यात्मिक उन्नति: परिक्रमा के दौरान भगवान राधा और कृष्ण की भक्ति में लीन होकर व्यक्ति आत्मिक शांति और उन्नति की ओर बढ़ता है। यह एक तरह से आत्म-संयम और तात्त्विक जागरूकता की प्रक्रिया होती है।
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धार्मिक महत्व: विशेष रूप से मथुरा और वृंदावन जैसे स्थानों पर राधा रानी की परिक्रमा का आयोजन बहुत धूमधाम से किया जाता है। यह आयोजन पूरे दिन चलता है और भक्त इस अवसर का पूरा लाभ उठाने के लिए अपनी श्रद्धा और भक्ति का प्रदर्शन करते हैं।
पूजा विधि:
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परिक्रमा शुरू करने से पहले, राधा रानी के मंदिर में पूजा अर्चना की जाती है।
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भक्त अपने ह्रदय में शुद्ध विचारों और भगवान के प्रति अपार श्रद्धा के साथ परिक्रमा करते हैं।
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इस दिन विशेष रूप से राधा रानी की 108 परिक्रमा का महत्व होता है, जिसे भक्त विशेष रूप से शुभ और पवित्र मानते हैं।
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परिक्रमा के दौरान मंगल पाठ, कीर्तन, और भजन गाए जाते हैं जो भक्तों को विशेष आशीर्वाद प्रदान करते हैं।
धार्मिक लाभ:
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परिक्रमा करने से पुण्य की प्राप्ति होती है।
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यह दिन भक्तों के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि इस दिन राधा रानी और श्री कृष्ण के साथ संबंध में गहरी भक्ति को महसूस किया जा सकता है।
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इससे व्यक्ति के जीवन में शांति, सुख और समृद्धि आती है, और मानसिक रूप से भी सकारात्मक ऊर्जा मिलती है।
विशेष ध्यान देने योग्य बातें:
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समय का ध्यान रखें: परिक्रमा प्रातः 8 बजे से शुरू होती है, इसलिए समय पर पहुंचकर आयोजन का हिस्सा बनें।
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आध्यात्मिक ध्यान: परिक्रमा के दौरान अपनी मानसिक स्थिति को शांत रखें और केवल भगवान राधा और कृष्ण की भक्ति में लीन हों।
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पवित्रता का पालन करें: परिक्रमा में शामिल होने से पहले स्नान करें और शुद्ध मानसिकता से भाग लें।
आज का पंचांग और ग्रह स्थिति:
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यह दिन शनिवार है, जो शनि ग्रह का दिन होता है। शनि के प्रभाव को सकारात्मक बनाने के लिए इस दिन विशेष पूजा और दान का महत्व होता है।
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विक्रम संवत 2081 के अनुसार, यह कालयुक्त संवत्सर का दिन है, जिसमें मंगल और शनि ग्रहों का विशेष प्रभाव है।
: 23 मार्च को होने वाली राधा रानी की परिक्रमा, भक्ति और श्रद्धा का एक अद्भुत अवसर है। यह दिन भक्तों के लिए आत्मिक उन्नति और शांति का समय है। राधा रानी जी की परिक्रमा करने से ना केवल आध्यात्मिक लाभ मिलता है, बल्कि जीवन में सुख, समृद्धि और आशीर्वाद का संचार होता है। इस धार्मिक आयोजन का हिस्सा बनकर भक्त इस विशेष अवसर का भरपूर लाभ उठा सकते हैं।