
देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अन्नदाताओं के बारे में सोचना चाहिए, किसान नेता रवि आजाद
नई दिल्ली, 23 मार्च:
किसान नेता रवि आजाद ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तीखा हमला करते हुए कहा कि सरकार को किसानों की स्थिति के बारे में गंभीरता से सोचना चाहिए। उनका कहना है कि देश में अगर किसानों के लिए संकट पैदा हुआ, तो देश की जनता कभी माफ नहीं करेगी। उन्होंने यह भी कहा कि जिस तरह से अमेरिका और भारत के बीच फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) की बात चल रही है, वह देश के किसानों के लिए संकट का कारण बन सकता है।
रवि आजाद ने कहा, “प्रधानमंत्री मोदी को अन्नदाताओं के बारे में सोचना चाहिए, ताकि देश का किसान कृषि क्षेत्र में और आगे बढ़ सके।” उन्होंने प्रधानमंत्री पर आरोप लगाते हुए कहा कि यदि सरकार ने किसानों की अनदेखी की, तो देश संकट में पड़ जाएगा और इसका जिम्मेदार कोई और नहीं, बल्कि केंद्र सरकार होगी।
किसान नेता ने यह भी कहा कि आज किसान सरकारी और निजी कर्ज में दबे हुए हैं और बैंकों का कर्ज लगातार बढ़ रहा है, लेकिन किसान उसे चुका नहीं पा रहे हैं। केंद्र सरकार को किसानों की हालत सुधारने के लिए सख्त कदम उठाने चाहिए। उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी की सरकार से अपील की कि वह किसी भी विदेशी दबाव के सामने न झुकें, चाहे वह कृषि के मामले में हो या अन्य किसी परियोजना के मामले में।
अमेरिका के साथ संभावित फ्री ट्रेड एग्रीमेंट पर खतरे की घंटी:
रवि आजाद ने यह भी बताया कि भारत सरकार और अमेरिका के बीच एक फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) के संभावित समझौते की बात चल रही है, जिसे अक्टूबर या नवंबर 2025 में साइन किया जा सकता है। अमेरिका का दबाव बताते हुए उन्होंने कहा कि यह समझौता भारतीय किसानों और डेयरी उद्योग के लिए गंभीर परिणाम ला सकता है।
FTA के तहत भारत और अमेरिका के बीच व्यापार को आसान बनाने के लिए शुल्क (टैरिफ) हटा दिया जाएगा, जिससे अमेरिकी कृषि उत्पाद भारतीय बाजार में सस्ते दामों पर आ सकते हैं। इसके कारण भारतीय किसानों को अपनी उपज बेचने में मुश्किल हो सकती है, क्योंकि अमेरिकी उत्पाद सस्ते होने के कारण भारतीय उत्पादों से प्रतिस्पर्धा करेंगे।
डेयरी उद्योग पर प्रभाव:
अमेरिका एक प्रमुख डेयरी उत्पादक देश है, और अगर यह फ्री ट्रेड एग्रीमेंट लागू होता है, तो अमेरिकी डेयरी उत्पाद जैसे दूध, पनीर, और बटर भारतीय बाजार में सस्ते दामों पर उपलब्ध हो सकते हैं। इससे भारतीय डेयरी किसानों को भारी नुकसान हो सकता है, जो पहले ही कई आर्थिक दबावों का सामना कर रहे हैं।
कृषि क्षेत्र को होगा बड़ा नुकसान:
भारत में पहले ही किसानों की स्थिति दयनीय है, और कृषि संकट बढ़ता जा रहा है। अगर अमेरिकी उत्पाद भारतीय बाजार में सस्ते दामों पर आ जाते हैं, तो भारतीय किसानों को अपनी उपज की कीमतों में गिरावट का सामना करना पड़ सकता है। इसके अलावा, भारतीय कृषि क्षेत्र पहले ही जल संकट, सिंचाई सुविधाओं की कमी, और कम कृषि उत्पादकता जैसी समस्याओं का सामना कर रहा है, जिससे स्थिति और भी जटिल हो सकती है।
क्या किया जा सकता है?
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किसानों को सुरक्षा देना: सरकार को अपनी नीतियों में बदलाव करना होगा और किसानों को अधिक सुरक्षा प्रदान करनी होगी, ताकि वे सस्ते अमेरिकी उत्पादों से निपट सकें। न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) की नीति को और मजबूत किया जा सकता है ताकि किसानों को उनकी फसलों के सही मूल्य मिल सके।
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तकनीकी सुधार और सशक्तिकरण: किसानों को नई तकनीकों और प्रशिक्षण के माध्यम से सक्षम बनाना होगा, ताकि वे बेहतर उत्पादन कर सकें और अपनी उपज को प्रतिस्पर्धा में बनाए रख सकें।
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मूल्य निर्धारण पर नियंत्रण: अमेरिकी उत्पादों से बचाव के लिए भारतीय कृषि उत्पादों पर कुछ शुल्क लगाया जा सकता है, जिससे भारतीय किसानों को प्रतिस्पर्धा में बने रहने का मौका मिले।
रवि आजाद का कहना है कि प्रधानमंत्री मोदी को देश के अन्नदाताओं की स्थिति के प्रति संवेदनशील होना चाहिए और भारत सरकार को अमेरिका से किसी ऐसे समझौते से बचना चाहिए, जो भारतीय किसानों के हितों के खिलाफ हो।
ट्रम्प के दबाव में भारत सरकार अक्टूबर या नवंबर में अमेरिका के साथ फ्री ट्रेड एग्रीमेंट, किसानों के लिए खतरे की घंटी
भारत सरकार और अमेरिका के बीच एक संभावित फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) की चर्चा चल रही है, जिसे अक्टूबर या नवंबर 2025 में साइन किया जा सकता है। इस समझौते के पीछे अमेरिका का दबाव बताया जा रहा है, और इसके भारत के किसानों और डेयरी उद्योग पर गंभीर परिणाम हो सकते हैं।
किसानों के लिए संकट
फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) के तहत भारत और अमेरिका के बीच व्यापार को आसान बनाने के लिए दोनों देशों के बीच उत्पादों पर किसी भी प्रकार के शुल्क (टैरिफ) को हटा दिया जाएगा। इसका मुख्य उद्देश्य दोनों देशों के व्यापार को बढ़ावा देना है, लेकिन इससे भारत के किसानों और डेयरी उद्योग पर बहुत नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।
अमेरिका का कृषि क्षेत्र अत्याधुनिक तकनीक, बड़े पैमाने पर उत्पादन और सस्ते उत्पादन की वजह से भारत में अमेरिकी कृषि उत्पादों की बाढ़ आ सकती है। इससे भारतीय किसानों को अपनी उपज बेचने में कठिनाई हो सकती है, क्योंकि अमेरिकी उत्पाद भारतीय बाजार में सस्ते दामों पर उपलब्ध होंगे।
डेयरी उद्योग पर प्रभाव
अमेरिका डेयरी उत्पादों का एक प्रमुख उत्पादक देश है, और उसकी डेयरी उत्पाद जैसे दूध, पनीर, और बटर की कीमतें भारतीय बाजार में सस्ती हो सकती हैं। यदि फ्री ट्रेड एग्रीमेंट लागू होता है, तो भारतीय डेयरी उत्पादों की कीमतें गिर सकती हैं क्योंकि अमेरिकी उत्पाद भारतीय बाजार में आसानी से प्रवेश कर सकते हैं। यह भारतीय डेयरी किसानों के लिए बेहद नुकसानदायक हो सकता है, क्योंकि वे पहले ही आर्थिक दबावों का सामना कर रहे हैं।
भारत के कृषि उद्योग को खतरा
भारत में किसानों की हालत पहले ही खस्ता है। कृषि संकट और किसानों की बढ़ती आत्महत्याओं के कारण स्थिति और भी जटिल हो गई है। यदि इस फ्री ट्रेड एग्रीमेंट के बाद अमेरिकी उत्पाद भारतीय बाजार में अपनी पैठ बना लेते हैं, तो भारतीय किसानों को अपनी उपज की कीमतों में गिरावट का सामना करना पड़ सकता है।
भारत का कृषि क्षेत्र पहले ही कई चुनौतियों का सामना कर रहा है, जैसे मूल्य निर्धारण में अस्थिरता, जल संकट, सिंचाई सुविधाओं की कमी, और कृषि उत्पादकता में गिरावट। ऐसे में अमेरिकी उत्पादों का सस्ता आना और भारतीय किसानों से मुकाबला करना उनकी स्थिति और भी मुश्किल बना सकता है।
समझौते के बाद क्या हो सकता है?
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सस्ते अमेरिकी उत्पादों की बाढ़: अमेरिका में कृषि उत्पादों की लागत कम होती है, और यह कम कीमतों पर भारतीय बाजार में उपलब्ध हो सकते हैं। इससे भारतीय किसानों की उपज की मांग में कमी आ सकती है।
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किसानों के लिए लागत में वृद्धि: भारतीय किसान पहले से ही महंगे बीज, सिंचाई और उर्वरकों के कारण मुश्किल में हैं। अमेरिकी उत्पादों के सस्ते होने से भारतीय उत्पादक और भी अधिक मुश्किलों का सामना कर सकते हैं, क्योंकि वे लागत में कटौती करने के बावजूद प्रतियोगिता में पिछड़ सकते हैं।
इस स्थिति में सरकार का कदम बहुत महत्वपूर्ण होगा, और यदि इस समझौते से किसानों और कृषि क्षेत्र को उचित सुरक्षा नहीं मिली, तो इसका दूरगामी असर भारत के कृषि उद्योग पर हो सकता है।