
नई दिल्ली, 24 मार्च: अमेरिका एक ऐसा देश है जहां दुनियाभर के लोग बेहतर जीवन की तलाश में आते हैं और वहां बसने का सपना देखते हैं। लेकिन डोनाल्ड ट्रंप के राष्ट्रपति बनने के बाद से उनके प्रशासन ने कई कड़े कदम उठाए हैं, जिनका असर विभिन्न देशों के अप्रवासियों पर पड़ा है। ट्रंप का एक और बड़ा निर्णय सामने आया है, जिसमें क्यूबा, हैती, निकारागुआ और वेनेजुएला के नागरिकों को सीधा खतरा है।
530,000 अप्रवासियों का कानूनी संरक्षण रद्द
डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन ने अमेरिका में प्रवासी नीति के तहत एक बड़ा कदम उठाते हुए इन देशों के 530,000 अप्रवासियों का कानूनी संरक्षण रद्द कर दिया है। यह फैसला अमेरिकी सरकार द्वारा उन लोगों के लिए लिया गया है, जिन्हें पहले अस्थायी संरक्षित स्थिति (TPS) के तहत अमेरिका में रहने की अनुमति दी गई थी। अब, इस नए आदेश के तहत इन अप्रवासियों को अमेरिका से बाहर जाने का आदेश दिया गया है।
क्या होगा इसके बाद?
इस निर्णय के बाद, इन देशों के अप्रवासियों को लगभग एक महीने के भीतर अमेरिका छोड़कर अपने देश या किसी तीसरे देश में शरण लेने की आवश्यकता हो सकती है। यह कदम अमेरिका में बसने वाले इन प्रवासियों के लिए बड़ी चिंता का विषय बन गया है, क्योंकि अब उन्हें अपने भविष्य को लेकर अनिश्चितता का सामना करना पड़ सकता है। इस फैसले से लाखों लोग अपनी सुरक्षा और भविष्य को लेकर दुविधा में हैं, और यह उनके लिए एक बड़ा संकट साबित हो सकता है।
भारत के साथ ट्रंप का सख्त रवैया
इससे पहले, डोनाल्ड ट्रंप ने भारत के साथ अपने व्यापारिक रिश्तों को लेकर भी कड़े बयान दिए थे। उन्होंने भारत पर आरोप लगाया था कि वह अमेरिकी सामान पर भारी शुल्क लगाता है और ऐसे में, अगर भारत अपनी नीतियों में बदलाव नहीं करता है तो अमेरिका भी भारत पर उतने ही शुल्क लगा सकता है। यह कदम ट्रंप के “अमेरिका फर्स्ट” नीति का हिस्सा था, जिसे उन्होंने हमेशा अपने प्रशासन में लागू किया है।
अमेरिका में प्रवासी नीति में बदलाव
ट्रंप का यह कदम एक और संकेत है कि वह अपने देश के अंदर अप्रवासियों के प्रति अपनी नीति को और सख्त करने का इरादा रखते हैं। यह उनके उस दृष्टिकोण का हिस्सा है, जिसमें वे मानते हैं कि अमेरिकी नागरिकों को उनकी सरकार की प्राथमिकता मिलनी चाहिए और किसी अन्य देश के नागरिकों को अमेरिका में बसने का अवसर कम से कम मिलना चाहिए।
यह फैसला उन लाखों अप्रवासियों के लिए एक बड़ी चुनौती साबित हो सकता है, जो अमेरिका में अपने भविष्य को लेकर आश्वस्त थे। अब उन्हें जल्द ही अपने घर लौटने या किसी अन्य देश में शरण लेने का निर्णय लेना होगा।
ट्रंप प्रशासन के इस फैसले से यह स्पष्ट होता है कि अमेरिका में प्रवासी नीति में सख्ती आएगी और यह अन्य देशों के नागरिकों के लिए एक कड़ा संदेश है।