
कानून उनके व्यक्तिगत जीवन में दखलअंदाजी करेगा,
उत्तराखंड 24 मार्च: यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) को लेकर उत्तराखंड में लोगों का विरोध बढ़ता जा रहा है। बीजेपी सरकार द्वारा प्रस्तावित इस कानून के तहत, जिसमें लाइव-इन रिलेशनशिप और शादी जैसे मामलों को अनिवार्य रजिस्ट्रेशन के तहत लाने की बात की गई है, उत्तराखंड के लोग खासे नाराज हैं। उनका कहना है कि यह कानून उनके व्यक्तिगत जीवन में दखलअंदाजी करेगा, और इसकी आवश्यकता नहीं है।
नाराजगी और विरोध:
उत्तराखंड के कई इलाकों में लोग इस नए कानून के खिलाफ आवाज उठाते नजर आ रहे हैं। लोगों का कहना है कि अगर कोई व्यक्ति लाइव-इन रिलेशनशिप में रहना चाहता है, तो यह उसकी निजी स्वतंत्रता और जिम्मेदारी होनी चाहिए, और सरकार को इसमें हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए। लोग यह भी मानते हैं कि इस कानून के माध्यम से सरकार उनकी व्यक्तिगत पसंद को नियंत्रित करने की कोशिश कर रही है, जो उनकी स्वतंत्रता के खिलाफ है।
UCC के तहत रजिस्ट्रेशन का प्रावधान:
बीजेपी सरकार ने यूनिफॉर्म सिविल कोड के तहत एक प्रावधान रखा है, जिसमें लाइव-इन रिलेशनशिप जैसे मामलों का अनिवार्य रजिस्ट्रेशन करने की बात की गई है। इसका विरोध करते हुए उत्तराखंड के लोग इसे “जबरदस्ती” और “नागरिक अधिकारों का उल्लंघन” मानते हैं। उनका कहना है कि यह कानून उनकी व्यक्तिगत आजादी पर अंकुश लगाएगा और समाज में वयस्कों की जिम्मेदारी और समझ पर संदेह करेगा।
विपक्ष और धार्मिक समूहों का विरोध:
यूनिफॉर्म सिविल कोड को लेकर न केवल उत्तराखंड, बल्कि देश भर में विरोध हो रहा है। विपक्षी पार्टियां इस कानून को लेकर केंद्र सरकार पर हमलावर हैं। धार्मिक और सामाजिक समूहों ने भी इस कानून को लागू करने के खिलाफ अपनी चिंताएं जताई हैं। उनका कहना है कि यह विभिन्न धर्मों, समुदायों और संस्कृतियों के बीच वैचारिक मतभेदों को बढ़ावा देगा और व्यक्तिगत स्वतंत्रता पर प्रतिकूल असर डालेगा।
केंद्र सरकार का रुख:
केंद्र सरकार ने यूनिफॉर्म सिविल कोड को लागू करने का अपना इरादा जताया है, हालांकि इस विषय पर कई राज्यों में गहरी असहमति और विरोध देखने को मिल रहा है। भाजपा सरकार का कहना है कि यह कानून समानता और न्याय के सिद्धांतों पर आधारित है और यह सभी नागरिकों के लिए समान अधिकार सुनिश्चित करेगा।
क्या होगा आगे?
उत्तराखंड में इस विरोध के बढ़ने के बाद, अब यह देखना होगा कि राज्य सरकार और केंद्र सरकार इस पर क्या कदम उठाती हैं। क्या वे इस कानून में बदलाव करेंगी, या फिर यह विवाद और विरोध आगे बढ़ेगा। उत्तराखंड के लोग चाहते हैं कि इस कानून के अनिवार्य रजिस्ट्रेशन प्रावधान को हटाया जाए, ताकि उनकी निजी स्वतंत्रता सुरक्षित रहे।
यह मुद्दा आने वाले समय में उत्तराखंड और अन्य राज्यों में राजनीतिक चर्चाओं और विरोध प्रदर्शनों का केंद्र बन सकता है, और यह बीजेपी सरकार के लिए एक बड़ी चुनौती बन सकती है।