
सार्वजनिक धार्मिक जानकारी और पंचांग
श्री हनुमान का मंत्र
सिंधु-तरन, सिय-सोच-हरन, रबि-बाल-बरन तनु।
भुज बिसाल, मूरति कराल कालहुको काल जनु।
गहन-दहन-निरदहन लंक निःसंक, बंक-भुव।
जातुधान-बलवान-मान-मद-दवन पवनसुव।
कह तुलसिदास सेवत सुलभ सेवक हित सन्तत निकट।
गुन-गनत, नमत, सुमिरत, जपत समन सकल-संकट-विकट।
भावार्थ:
जो भगवान हनुमान के शरीर का रंग सूर्य के समान उज्जवल है और जो समुद्र लांघ कर श्री जानकी जी के शोक को दूर करने वाले हैं, जिनकी भुजाएं विशाल हैं और जिनकी रूपरेखा भयावह है, वे काल के भी काल हैं। जिन्होंने लंका की अजेय दुर्ग को जलाया, और जिनकी उपस्थिति से राक्षसों का मान और गर्व नष्ट हुआ, तुलसीदास जी कहते हैं कि भगवान हनुमान अपनी सेवा करने वाले भक्तों के लिए सुलभ हैं और अपने भक्तों के संकटों को दूर करने में सदैव तत्पर रहते हैं।
आज का पंचांग और ग्रहों की स्थिति
🕉 श्री गणेशाय नमः, जय श्री कृष्ण 🙏
विक्रम संवत 2081
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संवत्सर नाम: कालयुक्त
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संवत्सर राजा: मंगल
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संवत्सर मंत्री: शनि
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ऋतु: वसंत
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सूर्य उदय: प्रातः 6:25
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सूर्य अस्त: सायं 6:31
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चैत्र मास कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि
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अंग्रेजी दिनांक: 25/03/2025
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दिन: मंगलवार
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चंद्रमा: मकर राशि में
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राशि स्वामी: शनि
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आज का नक्षत्र: श्रवण
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नक्षत्र स्वामी: चंद्र
ग्रहों की स्थिति
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सूर्य: मीन राशि में उत्तर भाद्रपद नक्षत्र चरण 3 में (नक्षत्र स्वामी शनि)
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मंगल (वक्री): मिथुन राशि पुनर्वसु नक्षत्र चरण 3 में (नक्षत्र स्वामी गुरु)
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बुद्ध (वक्री): मीन राशि उत्तर भाद्रपद नक्षत्र चरण 3 में (नक्षत्र स्वामी शनि)
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गुरु: वृष राशि रोहिणी नक्षत्र चरण 4 में (नक्षत्र स्वामी चंद्र)
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शुक्र (वक्री एवं अस्त): मीन राशि उत्तर भाद्रपद नक्षत्र चरण 2 में (नक्षत्र स्वामी शनि)
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शनि: कुंभ राशि पूर्व भाद्रपद नक्षत्र चरण 3 में (नक्षत्र स्वामी गुरु)
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राहु: मीन राशि पूर्व भाद्रपद नक्षत्र चरण 4 में (नक्षत्र स्वामी शनि)
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केतु: कन्या राशि उत्तरा फाल्गुनी नक्षत्र चरण 2 में (नक्षत्र स्वामी सूर्य)
महत्वपूर्ण योग और अवधि
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योग:
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शिव योग (दोपहर 2:53 तक): यह योग ध्यान और साधना के लिए उपयुक्त है।
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सिद्ध योग (बाद में): इस योग में किए गए कार्यों से शुभ फल प्राप्त होते हैं। इस योग में जन्मे लोग सामान्यतः खुशमिजाज और दयालु स्वभाव के होते हैं।
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राहु काल:
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दोपहर 3:30 से 5:00 बजे तक। इस दौरान कोई शुभ कार्य या नया कार्य शुरू न करें।
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आज का प्रमुख पर्व
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पाप मोचिनी एकादशी:
यह पर्व कल अरुणोदय काल में दशमी के वेध से एकादशी को दोष माना जाता है, और द्वादशी को एकादशी का व्रत किया जाता है।
दिशा शूल और शुभ दिशा
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शुभ दिशा: दक्षिण-पूर्व
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दिशा शूल: उत्तर दिशा की ओर यात्रा करने से बचें, अगर यात्रा आवश्यक हो तो गुड़ खाकर यात्रा करें।
दैनिक लग्न सारणी:
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प्रातः 5:57 तक: कुंभ
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8:22 तक: मीन
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10:53 तक: वृष
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1:07 तक: मिथुन
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3:27 तक: कर्क
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5:45 तक: सिंह
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8:02 तक: कन्या
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10:20 तक: तुला
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12:39 तक: वृश्चिक
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2:43 तक: धनु