
स्मारक पर 550 करोड़ रुपये से ज्यादा की राशि खर्च की जा रही- अनिल विज
लगभग 700 अनसंग हीरोज के नाम होंगे शहीद स्मारक में प्रदर्शित, दी जाएगी श्रद्धांजलि- विज
चंडीगढ़, 26 मार्च – हरियाणा के ऊर्जा, परिवहन एवं श्रम मंत्री श्री अनिल विज ने विधानसभा में चल रहे बजट सत्र के दौरान मुख्यमंत्री, विधानसभा के सभी सदस्यों और मीडिया के साथियों से अनुरोध करते हुए कहा कि वे एक दिन अंबाला में बनाए जा रहे आज़ादी की पहली लड़ाई के शहीद स्मारक को देखें, क्योंकि हम एशिया का सबसे बड़ा शहीद स्मारक बना रहे हैं।
विज ने यह अनुरोध विधानसभा में बजट सत्र के दौरान शहीद स्मारक से संबंधित चल रहे प्रश्न को लेकर किया। इस स्मारक पर 550 करोड़ रुपये से ज्यादा की राशि खर्च की जा रही है, जोकि एशिया का सबसे बड़ा स्मारक होगा।
1857 की सभी लड़ाइयों को शहीद स्मारक में दिखाया जाएगा- विज
उन्होंने कहा कि अंबाला में आज़ादी की पहली लड़ाई, 1857 की क्रांति, के दौरान शहीद हुए वीर जवानों की स्मृति को सम्मान देने के लिए एक एशिया का सबसे बड़ा शहीद स्मारक बनाया जा रहा है। उन्होंने बताया कि आज़ादी की पहली लड़ाई के शहीद स्मारक में स्वतंत्रता सेनानी राव तुलाराम जी के बारे में भी प्रदर्शित किया जाएगा और बहुत ही अच्छे ढंग से बताया जा रहा है। इसके अलावा, उन्होंने बताया कि इस स्मारक में 1857 की उन सभी लड़ाइयों का जिक्र किया गया है, जो उस समय लड़ी गई। इनमें चाहे वह लड़ाई झांसी की रानी ने लड़ी, तात्या टोपे ने लड़ी, गुजरात में लड़ी गई, हैदराबाद में लड़ी गई, आगरा में लड़ी गई, हरियाणा, मेरठ, पानीपत या अहीरवाल में लड़ी गई, उन सभी लड़ाइयों को जीवित रूप से शहीद स्मारक में प्रदर्शित किया जा रहा है।
लगभग 700 अनसंग हीरोज के नाम होंगे शहीद स्मारक में प्रदर्शित, दी जाएगी श्रद्धांजलि- विज
विज ने अनसंग स्वतंत्रता सेनानियों के बारे में उल्लेख करते हुए कहा कि 1857 की क्रांति की याद में आज़ादी की पहली लड़ाई के शहीद स्मारक में अनसंग हीरोज के बारे में भी बताया जा रहा है, क्योंकि इन हीरोज को कभी भी याद नहीं किया गया और इनके बारे में कभी भी नहीं बताया गया। उन्होंने कहा कि हमने ऐसे-ऐसे शहीदों के नाम ढूंढकर निकाले हैं और अब तक हम लगभग 700 नाम ढूंढ पाए हैं, जिनका उल्लेख शहीद स्मारक में किया जाएगा।
विज ने इस शहीद स्मारक के निर्माण को ऐतिहासिक कदम बताते हुए कहा कि यह स्मारक न केवल 1857 के स्वतंत्रता संग्राम को याद करेगा, बल्कि उन सभी वीरों को भी श्रद्धांजलि अर्पित करेगा जिनका योगदान कभी भी सही तरीके से सम्मानित नहीं किया गया था। यह स्मारक आने वाली पीढ़ियों के लिए एक प्रेरणा का स्रोत बनेगा और शहीदों की वीरता और बलिदान को हमेशा जीवित रखेगा।