
कुल 9017 शिकायतों का गुरुग्राम पुलिस ने किया खुलासा
गुरुग्राम, 26 मार्च 2025:
गुरुग्राम पुलिस ने साइबर ठगी के एक बड़े रैकेट का पर्दाफाश किया है, जिसमें 24 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। इन आरोपियों पर पूरे भारत में लगभग 33 करोड़ 94 लाख रुपये की साइबर ठगी करने का आरोप है। इस मामले में कुल 9017 शिकायतों का खुलासा हुआ है और 310 अभियोग दर्ज किए गए हैं, जिनमें से 24 अभियोग हरियाणा में हैं, और गुरुग्राम के साइबर अपराध थाना पूर्व में 5 अभियोग दर्ज हैं।
गुरुग्राम पुलिस की गिरफ्तारी और खुलासा:
गुरुग्राम पुलिस की साइबर अपराध टीम ने प्रियांशु दिवान HPS (सहायक पुलिस आयुक्त, साइबर अपराध) के नेतृत्व में यह बड़ी कार्रवाई की। गुरुग्राम के साइबर अपराध पुलिस थानों की पुलिस टीमों ने आरोपियों को गिरफ्तार किया और उनकी गिरफ्तारी से जुड़ी पूरी जानकारी दी।
गिरफ्तार आरोपी और उनके गिरफ्तार होने के विवरण:
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भेरूलाल शर्मा, हितेश सेन और देवेंद्र: इन आरोपियों को पुलिस थाना साइबर अपराध पूर्व, गुरुग्राम में महिला उप निरीक्षक सीमा द्वारा 28 अगस्त 2024 और 13 जनवरी 2025 को गिरफ्तार किया।
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अभिषेक तिवारी, दीपक राजपूत, राजेंद्र कुमार और मनीष श्रीवास्तव: इन्हें पुलिस थाना साइबर अपराध पूर्व, गुरुग्राम में मुख्य सिपाही नरेंद्र द्वारा 26 दिसंबर 2024, 28 दिसंबर 2024 और 3 फरवरी 2025 को गिरफ्तार किया गया।
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मयंक नरूला और दिनेश वर्मा: इन आरोपियों को पुलिस थाना साइबर अपराध पूर्व, गुरुग्राम में ASI शिव कुमार द्वारा 15 और 16 जनवरी 2025 को गिरफ्तार किया गया।
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प्रकाश चंद्र, रजत, विकास उर्फ विक्की, सुनील कुमार, दीपक उर्फ मोनू, ताहिर हुसैन, दीपक कुमार, रणदीप, नवीन कुमार, दीपांशु, धीरज तंवर और राहुल: इन आरोपियों को पुलिस थाना साइबर अपराध पूर्व, गुरुग्राम में मुख्य सिपाही पारसराम द्वारा 8 दिसंबर 2024, 9 दिसंबर 2024, 15 जनवरी 2025, 23 फरवरी 2025, 12 मार्च 2025 और 19 मार्च 2025 को गिरफ्तार किया गया।
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ताहिर नसीम मलिक, बिजेंद्र मेघवाल और योगेश कुमार जाखड़: इन आरोपियों को पुलिस थाना साइबर अपराध पूर्व, गुरुग्राम में ASI राकेश द्वारा 5 और 21 जनवरी 2025 को गिरफ्तार किया गया।
ठगी का खुलासा और साक्ष्य:
गुरुग्राम पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से 9 मोबाइल फोन बरामद किए थे। इन मोबाइल फोन्स की जांच के बाद भारतीय साइबर क्राइम कोर्डिनेशन सेंटर (I4C) द्वारा किए गए डाटा की जांच में पता चला कि इन आरोपियों ने देशभर में कुल 33 करोड़ 94 लाख रुपये की ठगी की थी। कुल 9017 शिकायतों और 310 अभियोगों में से 24 अभियोग हरियाणा राज्य में दर्ज किए गए, जिनमें से 5 अभियोग केवल गुरुग्राम के साइबर अपराध थाना पूर्व में हैं।
साइबर ठगी के तरीके:
पुलिस जांच में यह बात सामने आई है कि आरोपी समूह ने इन्वेस्टमेंट फ्रॉड और डिजिटल अरेस्ट जैसे धोखाधड़ी के तरीके अपनाकर ठगी की। आरोपी पीड़ितों को विभिन्न आकर्षक निवेश योजनाओं के नाम पर झांसा देते थे और फिर उनके पैसे लेकर फरार हो जाते थे।
पुलिस की सतर्कता और जांच:
गुरुग्राम पुलिस ने इन आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की और सभी को गिरफ्तार किया। पुलिस टीम की ओर से 9 मोबाइल फोन बरामद किए गए, जिनकी जांच में यह खुलासा हुआ कि इन उपकरणों का उपयोग साइबर ठगी में किया जा रहा था। I4C द्वारा की गई जांच के बाद इन सभी आरोपियों का नेटवर्क पकड़ा गया और उनकी ठगी की साजिश का पर्दाफाश हुआ।
यह घटना एक बड़ी सफलता है जो यह दर्शाती है कि साइबर अपराधियों के खिलाफ पुलिस की कार्रवाई लगातार और प्रभावी रूप से जारी है। गुरुग्राम पुलिस के इस प्रयास ने साइबर अपराधों के खिलाफ कार्रवाई को और भी तेज किया है और इस तरह के अपराधों को अंजाम देने वालों के लिए एक कड़ी चेतावनी दी है। पुलिस ने जनता से अपील की है कि वे किसी भी संदिग्ध डिजिटल गतिविधि की सूचना तुरंत पुलिस को दें और सतर्क रहें।
कुल मिलाकर, इस मामले ने यह साबित कर दिया है कि साइबर अपराधों के खिलाफ सतर्कता और कड़ी कार्रवाई आवश्यक है, ताकि ऐसे अपराधियों को पकड़ा जा सके और नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।