गोलागढ़ में रात्रि ठहराव के दौरान दिया संदेश,
रागनी गाने से गांव के लोग हंसी-खुशी झूमने पर मजबूर,
भिवानी, हरियाणा – 26 मार्च:
हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय चौधरी बंसीलाल के गांव गोलागढ़ में हरियाणा सरकार के निर्देश पर भिवानी के डीसी महावीर कौशिक ने रात्रि ठहराव किया। इस अवसर पर महावीर कौशिक ने गांववासियों की समस्याओं को सुना और उनके साथ संवाद किया। रात्रि ठहराव के दौरान उन्होंने पंडित लख्मीचंद की रागनी गाई, जो स्थानीय संस्कृति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। उनकी रागनी गाने से गांव के लोग झूमने पर मजबूर हो गए।
गांव की कोई भी समस्या हो, मेरा दरवाजा हमेशा खुला रहेगा।
डीसी महावीर कौशिक ने कार्यक्रम के दौरान कहा, “आज जिस गांव में मैं हूं, वह गांव हरियाणा के निर्माता स्वर्गीय चौधरी बंसीलाल का है। उन्होंने राजनीति की शुरुआत इसी गांव से की थी। मुझे इस गांव से जुड़ी हुई परंपराओं का सम्मान है और मैं यहां आने के बाद यहां के लोगों से हमेशा संवाद करता रहूंगा। गांव की कोई भी समस्या हो, मेरा दरवाजा हमेशा खुला रहेगा।
मैं युवाओं से अपील करता हूं कि इस धरोहर को बनाए रखें ।
उन्होंने यह भी कहा, “मुझे सरकार ने लोगों की सेवा करने के लिए भेजा है। जितनी सेवा कर सकूं, उतना ही मेरे लिए सबसे महत्वपूर्ण है।” महावीर कौशिक ने गांववासियों से यह भी कहा कि, “हरियाणा की संस्कृति और परंपराएं हमारे लिए बहुत महत्वपूर्ण हैं। खासकर रागिनी और महिलाओं के पारंपरिक हमारे राज्य की धरोहर हैं। मैं युवाओं से अपील करता हूं कि इस धरोहर को बनाए रखें, क्योंकि यही हमारी पहचान है।
परिवर्तनों के बावजूद हमें अपनी जड़ों से जुड़ा रहना है।
उन्होंने आगे कहा, “हम आज जिस युग में जी रहे हैं, उसमें मौसम, समय और युवा पीढ़ी में बहुत बदलाव आ रहे हैं। लेकिन हमें अपनी संस्कृति को बचाए रखना है, इन परिवर्तनों के बावजूद हमें अपनी जड़ों से जुड़ा रहना है।
महावीर कौशिक के साथ हरियाणवी संस्कृति का आनंद लिया।
इस मौके पर महावीर कौशिक के साथ रागिनी गायक्कर की टीम भी मौजूद थी, जिसने हरियाणवी रागनी के माध्यम से सांस्कृतिक प्रदर्शन किया। कार्यक्रम के दौरान ग्रामीणों ने भी जिला उपायुक्त महावीर कौशिक का फूलों की माला से स्वागत किया और उनके साथ हरियाणवी संस्कृति का आनंद लिया।
हरियाणा की सांस्कृतिक धरोहर, विशेष रूप से रागिनी, हमें जोड़ने का काम करती है
रात्रि ठहराव कार्यक्रम में पंडित लख्मीचंद द्वारा रचित त्रिलोकी भगवान की रागनी की प्रभावशाली प्रस्तुति भी दी गई, जिसे ग्रामीणों ने खूब सराहा। डीसी महावीर कौशिक ने इस मौके पर कहा कि हरियाणा की सांस्कृतिक धरोहर, विशेष रूप से रागिनी, हमें जोड़ने का काम करती है और यह हमारी विरासत का अहम हिस्सा है।
अद्भुत सांस्कृतिक विरासत की याद दिलाई।
इस कार्यक्रम के माध्यम से महावीर कौशिक ने न केवल प्रशासनिक कार्यों को पूरा किया बल्कि हरियाणा की सांस्कृतिक धरोहर को भी सम्मानित किया और ग्रामीणों को उनके अद्भुत सांस्कृतिक विरासत की याद दिलाई।