
दक्षिणी हरियाणा में राजनीतिक टकराव और विकास की धीमी गति
नई दिल्ली, 27 मार्च 2025 – दक्षिणी हरियाणा की राजनीति में एक बार फिर से तनाव का माहौल बन गया है। इस क्षेत्र के दो प्रमुख नेताओं, राव इंद्रजीत सिंह (केंद्र सरकार में मंत्री) और राव नरवीर सिंह (हरियाणा सरकार के कैबिनेट मंत्री) के बीच लगातार टकराव चल रहा है। इस बार मामला शहीद स्मारक के निर्माण को लेकर सामने आया है, जिसे मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने चुनाव से पहले बनाने की घोषणा की थी, लेकिन अब तक इसके निर्माण की प्रक्रिया शुरू नहीं हो पाई है।
दक्षिणी हरियाणा का ऐतिहासिक महत्व:
बड़ी संख्या में युवा भारतीय सेना में भर्ती होते हैं।
दक्षिणी हरियाणा का यह क्षेत्र देश की सुरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यह क्षेत्र राजस्थान की सीमाओं से जुड़ा हुआ है और यहां से बड़ी संख्या में युवा भारतीय सेना में भर्ती होते हैं। सैकड़ों युवा शहीद हो चुके हैं, और आज भी इस क्षेत्र के जवान देश की सीमाओं की रक्षा कर रहे हैं। बावजूद हरियाणा सरकार द्वारा अब तक इस क्षेत्र में कोई बड़ा शहीद स्मारक नहीं बनाया गया है, जिसे स्थानीय जनता लंबे समय से मांग कर रही है।
मुख्यमंत्री की घोषणा, लेकिन रोड़े पर रोड़ा:
वहां एक नया स्मारक बनाने की कोई आवश्यकता नहीं है।
मुख्यमंत्री ने चुनाव से पहले शहीद स्मारक बनाने की घोषणा की थी, लेकिन अब तक इसकी शुरुआत नहीं हो पाई। नारनौल के विधायक ओम प्रकाश यादव ने विधानसभा में मुख्यमंत्री से शहीद स्मारक बनाने की मांग की थी, लेकिन वहीं पर बैठे कैबिनेट मंत्री राव नरवीर सिंह ने कहा कि नारनौल में पहले से ही एक छोटा सा शहीद स्मारक बना हुआ है और वहां एक नया स्मारक बनाने की कोई आवश्यकता नहीं है। इससे यह सवाल उठता है कि दक्षिणी हरियाणा में एक शहीद स्मारक की जरूरत क्यों नहीं समझी जा रही?
राजनीति में टकराव:
एक नेता कोई बड़ा काम करना चाहता है तो दूसरा नेता उसे रोकने की कोशिश करता है।
राव इंद्रजीत सिंह और राव नरवीर सिंह के बीच राजनीतिक टकराव कोई नई बात नहीं है। यह लड़ाई पहले से चली आ रही है, जो अब तक दक्षिणी हरियाणा की जनता के लिए नकारात्मक रूप से सामने आ रही है। अगर एक नेता कोई बड़ा काम करना चाहता है तो दूसरा नेता उसे रोकने की कोशिश करता है। इस राजनीतिक द्वंद्व के चलते क्षेत्र के विकास में काफी रुकावटें आई हैं। दक्षिणी हरियाणा की जनता दोनों नेताओं के टकराव को देख रही है, लेकिन उसे इससे कोई लाभ नहीं मिल रहा है।
दूसरे नेताओं का आनंद:
इन नेताओं की आपसी लड़ाई का फायदा दूसरे क्षेत्र के नेता उठा रहे हैं
दक्षिणी हरियाणा के इन नेताओं की आपसी लड़ाई का फायदा दूसरे क्षेत्र के नेता उठा रहे हैं, जो इस स्थिति में बैठकर अपने पक्ष में राजनीति कर रहे हैं। इस टकराव के चलते विकास कार्यों की गति भी धीमी हो गई है, और दक्षिणी हरियाणा को इसके कारण नुकसान हो रहा है। यह क्षेत्र विकास की दृष्टि से पीछे की ओर बढ़ता जा रहा है, और किसी भी नेता के पास इसका समाधान नहीं है।
जनता की स्थिति:
दोनों नेताओं के आपसी टकराव का असर अब क्षेत्र के विकास पर पड़ रहा है।
दक्षिणी हरियाणा की जनता दोनों मंत्रियों के संघर्ष को देखकर परेशान है। जनता ने इन नेताओं को चुनकर विधानसभा और लोकसभा में भेजा, लेकिन दोनों नेताओं के आपसी टकराव का असर अब क्षेत्र के विकास पर पड़ रहा है। जनता अपनी समस्याओं को लेकर निराश है क्योंकि दोनों नेता सिर्फ एक-दूसरे पर आरोप लगाते हैं, लेकिन क्षेत्र के मुद्दों पर ध्यान नहीं देते।
फिलहाल, दक्षिणी हरियाणा की राजनीति की यह स्थिति इस क्षेत्र के विकास में बड़ा रोड़ा बनकर खड़ी है।
इस पूरे विवाद का मुख्य कारण राजनीतिक स्वार्थ और व्यक्तिगत लाभ है। अगर दक्षिणी हरियाणा के नेताओं को अपनी जिम्मेदारियों का एहसास होता और वे क्षेत्र के विकास में सहयोग करते, तो शहीद स्मारक के निर्माण की प्रक्रिया पहले ही शुरू हो चुकी होती। लेकिन फिलहाल, दक्षिणी हरियाणा की राजनीति की यह स्थिति इस क्षेत्र के विकास में बड़ा रोड़ा बनकर खड़ी है।
दक्षिणी हरियाणा की राजनीति की लड़ाई अभी शुरू नहीं हुई पहले भी रहती थी, हरियाणा पंजाब के संयुक्त मुख्यमंत्री स्वर्गीय राव वीरेंद्र सिंह के समय से ही चली आ रही है जिस समय राव का डंका बजता था उसे समय उनके मुकाबले में स्वर्गीय पूर्व केंद्रीय मंत्री कर्नल राम सिंह आकर खड़े हो गए थे उसे समय भी दक्षिणी हरियाणा की राजनीति में टकराव बना रहता था और इन दोनों नेताओं के बाद अब पिछले कई वर्षों से पूर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय राव वीरेंद्र सिंह के पुत्र केंद्र में मंत्री राव इंद्रजीत सिंह और हरियाणा के कैबिनेट मंत्री राव नरवीर सिंह के बीच दक्षिणी हरियाणा की राजनीति फांसी हुई है दोनों के बीच राजनीतिक 36 का आंकड़ा है।