
महाकुंभ मेला का उद्देश्य केवल धार्मिक रूप से पवित्र होना नहीं है, बल्कि यह हमारे समाज के बीच समृद्धि, भाईचारे और एकता को बढ़ावा देता है।
लखनऊ, उत्तर प्रदेश, 27 मार्च:
महाकुंभ ने पूरी दुनिया में एकता और भाईचारे का बेहतरीन उदाहरण प्रस्तुत किया है। यह दुनिया का सबसे बड़ा धार्मिक और आस्थामूलक महासमागम है, जिसमें हर साल लाखों श्रद्धालु हिस्सा लेते हैं। कुम्भ मेला न केवल भारतीय संस्कृति का महत्वपूर्ण हिस्सा है, बल्कि यह पूरी दुनिया में आस्था, एकता और धार्मिक सौहार्द का प्रतीक बन चुका है।
पवित्र नदियों में स्नान करने के लिए एकत्रित होते हैं।
कुम्भ मेला हर 12 वर्ष में चार प्रमुख स्थानों – प्रयागराज (इलाहाबाद), हरिद्वार, उज्जैन और नासिक – पर आयोजित होता है। इस आयोजन में लोग अपनी धार्मिक आस्थाओं को प्रकट करने और पवित्र नदियों में स्नान करने के लिए एकत्रित होते हैं। इस समय होने वाली संगम की विशेषता और महत्व ने कुम्भ मेला को एक वैश्विक पहचान दिलाई है।
बल्कि सांस्कृतिक और सामाजिक एकता का भी प्रतीक है।
कुम्भ मेला एक ऐसा पर्व है, जो न केवल धार्मिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है, बल्कि सांस्कृतिक और सामाजिक एकता का भी प्रतीक है। विभिन्न प्रदेशों और देशों से लाखों श्रद्धालु इस आयोजन में भाग लेने के लिए आते हैं, जो धर्म और संस्कृति से ऊपर जाकर एकता, शांति और समरसता का संदेश देते हैं।
आस्था की ताकत कोई सीमा नहीं जानती
इस आयोजन में श्रद्धालु और पर्यटक भारत की धार्मिक विविधता, विश्वास और सांस्कृतिक धरोहर से अवगत होते हैं। कुम्भ मेला का उद्देश्य केवल धार्मिक रूप से पवित्र होना नहीं है, बल्कि यह हमारे समाज के बीच समृद्धि, भाईचारे और एकता को बढ़ावा देता है।
इस बार का कुम्भ मेला एक और बार साबित करता है कि आस्था की ताकत कोई सीमा नहीं जानती और जब लोग एकजुट होते हैं, तो वो अपने विश्वास और मूल्य के साथ दुनिया को शांति और समृद्धि का संदेश दे सकते हैं।