
बांग्लादेश के मोहम्मद यूनुस और प्रधानमंत्री मोदी से मुलाकात की कोशिश:
नई दिल्ली, 28 मार्च 2025 – बांग्लादेश के मुख्य सलाहकार मोहम्मद यूनुस पीएम नरेंद्र मोदी से मुलाकात करने के इच्छुक हैं, जो आगामी BIMSTEC शिखर सम्मेलन के दौरान थाईलैंड की राजधानी बैंकॉक में आयोजित होने वाला है। हालांकि, भारत सरकार की ओर से इस मुलाकात के लिए अभी तक कोई सकारात्मक प्रतिक्रिया नहीं मिली है।
जबसे बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना सत्ता से बेदखल हुई हैं
पिछले कुछ समय से बांग्लादेश और भारत के रिश्तों में तनाव देखा जा रहा है, और इसका मुख्य कारण बांग्लादेश में सत्ता परिवर्तन है। जबसे बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना सत्ता से बेदखल हुई हैं, तब से दोनों देशों के रिश्ते डांवाडोल हो गए हैं। इसी बीच, बांग्लादेश के चीफ एडवाइजर मोहम्मद यूनुस ने भारत यात्रा के लिए रुचि व्यक्त की थी। सूत्रों के अनुसार, मोहम्मद यूनुस ने दिसंबर 2024 में भारत यात्रा की इच्छा जताई थी, लेकिन भारत से कोई सकारात्मक जवाब नहीं मिला था। इसके बाद यूनुस चीन के दौरे पर गए हैं। हालांकि, यह भी बताया गया है कि यूनुस चीन जाने से पहले भारत आना चाहते थे।
मोहम्मद यूनुस के प्रेस सचिव का बयान:
भारत से कोई सकारात्मक प्रतिक्रिया नहीं मिली।
बांग्लादेश के प्रेस सचिव शफीकुल आलम ने बताया कि यूनुस ने दिसंबर में भारत यात्रा के लिए रुचि दिखाई थी, लेकिन भारत से कोई सकारात्मक प्रतिक्रिया नहीं मिली। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव चीन यात्रा की तैयारी के कुछ सप्ताह पहले किया गया था, और इस पर कोई सकारात्मक जवाब नहीं मिलने के कारण वह चीन के दौरे पर गए।
पीएम मोदी की चिट्ठी:
भारत और बांग्लादेश के रिश्ते कई क्षेत्रों में
बांग्लादेश के स्वतंत्रता दिवस (26 मार्च) के अवसर पर भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बांग्लादेश के लोगों को एक विशेष पत्र भेजा। इस पत्र में प्रधानमंत्री मोदी ने 1971 के बांग्लादेश मुक्ति संग्राम का उल्लेख करते हुए बांग्लादेश के स्वतंत्रता संग्राम में भारत की भूमिका को याद किया। प्रधानमंत्री मोदी ने बांग्लादेश की मुक्ति संग्राम की भावना को द्विपक्षीय संबंधों की नींव बताया और यह भी उल्लेख किया कि भारत और बांग्लादेश के रिश्ते कई क्षेत्रों में मजबूत हो रहे हैं।
प्रधानमंत्री मोदी ने लिखा:
“यह दिन हमारे साझा इतिहास और बलिदान का प्रमाण है, जिसने हमारी द्विपक्षीय साझेदारी की नींव रखी है। बांग्लादेश के मुक्ति संग्राम की भावना हमारे संबंधों के लिए मार्गदर्शक बनी हुई है, जो कई क्षेत्रों में फली-फूली है और हमारे लोगों को ठोस लाभ पहुंचा रही है। हम शांति, स्थिरता और समृद्धि के लिए अपनी साझा आकांक्षाओं और एक-दूसरे के हितों और चिंताओं के प्रति पारस्परिक संवेदनशीलता के आधार पर इस साझेदारी को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।”
भारत का ठंडा रवैया:
भारत बांग्लादेश को ज्यादा भाव देने के मूड में नहीं दिखता।
हालांकि भारत द्वारा भेजी गई चिट्ठी में बांग्लादेश के प्रति सकारात्मक भावनाएं दिखाई गई हैं, लेकिन भारत बांग्लादेश को ज्यादा भाव देने के मूड में नहीं दिखता। भारत ने हाल ही में विदेश मंत्रालय के जरिए यह जानकारी दी कि बांग्लादेश सरकार अल्पसंख्यक समुदायों पर हो रहे उत्पीड़न को स्वीकार नहीं कर रही है। साथ ही, बांग्लादेश में शेख हसीना की सरकार गिरने के बाद हिंदू समुदाय के खिलाफ बढ़ती हिंसा को भी कमतर दिखाने की कोशिश की जा रही है।
चरमपंथी समूह अपने विचारों को बढ़ावा दे रहे हैं।
इसके अलावा, भारत ने यह भी संकेत दिया कि बांग्लादेश में बढ़ते चरमपंथी समूहों और उनके द्वारा इस्लामी शासन के विचारों को फैलाने को लेकर चिंता व्यक्त की है। इस राजनीतिक शून्यता का फायदा उठाते हुए ये चरमपंथी समूह अपने विचारों को बढ़ावा दे रहे हैं।
भारत-बांग्लादेश के रिश्तों में काफ़ी उतार-चढ़ाव
इन सभी घटनाओं के बीच, यह साफ है कि भारत-बांग्लादेश के रिश्तों में काफ़ी उतार-चढ़ाव आया है, और भविष्य में इन रिश्तों की दिशा क्या होगी, यह समय बताएगा। फिलहाल, बांग्लादेश और भारत दोनों ही एक-दूसरे से जुड़ने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन भारत के ठंडे रवैये और बांग्लादेश की आंतरिक समस्याओं के चलते इस रिश्ते में कोई ठोस प्रगति देखने को नहीं मिल रही है।