
लगभग 1000 लोग अपनी जान गंवा चुके हैं।
सेना और सरकार ने राहत एवं बचाव कार्य के लिए दुनिया से मदद की अपील की
नई दिल्ली, 29 मार्च 2025:
म्यांमार और थाईलैंड में शुक्रवार को आए भयंकर भूकंप ने भारी तबाही मचाई है। भूकंप के झटकों से म्यांमार की स्थिति सबसे अधिक प्रभावित हुई है, जहां लगभग 1000 लोग अपनी जान गंवा चुके हैं। वहीं थाईलैंड में भी 10 से अधिक मौतें हुई हैं। म्यांमार में भूकंप के कारण इतनी गंभीर स्थिति उत्पन्न हो गई कि वहां की सेना और सरकार ने राहत एवं बचाव कार्य के लिए दुनिया से मदद की अपील की है।
म्यांमार में इमरजेंसी लागू
म्यांमार की सरकार ने प्रभावित इलाकों में इमरजेंसी घोषित कर दी है
भूकंप के कारण म्यांमार के कई प्रमुख शहरों, विशेषकर मांडले, सगाइंग और अन्य मध्य-क्षेत्रों में भारी तबाही हुई है। म्यांमार का सगाइंग क्षेत्र भूकंप का केंद्र था, जहां से सबसे ज्यादा नुकसान की खबरें आई हैं। म्यांमार की सरकार ने प्रभावित इलाकों में इमरजेंसी घोषित कर दी है, ताकि वहां के लोगों को तुरंत राहत मिल सके और बचाव कार्य सुचारू रूप से चल सके।
36 घंटों में तीन बार भूकंप
शनिवार को एक बार और भूकंप के झटके महसूस किए गए।
पिछले 36 घंटों में म्यांमार में तीन बार भूकंप के झटके महसूस किए गए। भूकंप के ये झटके इतनी भयावह थे कि लगभग 1000 लोग अपनी जान से हाथ धो बैठे। शुक्रवार को म्यांमार में पहले दो बार और फिर शनिवार को एक बार और भूकंप के झटके महसूस किए गए। इस बार भूकंप की तीव्रता रिक्टर स्केल पर 5.1 मापी गई, जिससे पूरे इलाके में दहशत फैल गई है और कई इमारतें क्षतिग्रस्त हो गईं हैं।
मांडले में भारी नुकसान
90 से अधिक लोग मलबे में फंसे हो सकते हैं।
म्यांमार के मांडले शहर में एक अपार्टमेंट ब्लॉक के ढहने की खबर है, जिसमें 90 से अधिक लोग मलबे में फंसे हो सकते हैं। इसके अलावा, मांडले में 1500 से अधिक घरों को नुकसान पहुंचा है। रेड क्रॉस के एक अधिकारी ने फ्रांस-प्रेस से बात करते हुए बताया कि इस भूकंप ने मांडले के अधिकांश हिस्से को बुरी तरह से प्रभावित किया है, और अब राहत एवं बचाव कार्यों की आवश्यकता अत्यधिक बढ़ गई है।
विश्व से राहत सामग्री की आपूर्ति
संयुक्त राष्ट्र ने म्यांमार को 5 मिलियन डॉलर (43 करोड़ रुपये) की सहायता राशि जारी की
म्यांमार की सरकार और सेना ने विश्व समुदाय से मदद की अपील की थी, और कई देशों ने म्यांमार में राहत सामग्री भेजने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। संयुक्त राष्ट्र ने म्यांमार को 5 मिलियन डॉलर (43 करोड़ रुपये) की सहायता राशि जारी की है। साथ ही रूस ने भी 120 बचावकर्मियों और जरूरी राहत सामग्री के साथ दो जहाज म्यांमार भेजे हैं। रूस के अलावा हॉन्ग कॉन्ग, सिंगापुर और मलेशिया ने भी अपनी रेस्क्यू टीम भेजने का फैसला लिया है।
भारत द्वारा 40 टन मानवीय सहायता भेजी गई
भारत ने भी म्यांमार की मदद के लिए 40 टन मानवीय सहायता भेजी है। भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने जानकारी दी कि भारतीय नौसेना के जहाज आई एन एफ सतपुड़ा और आई एन एफ सावित्री म्यांमार के यांगून बंदरगाह की ओर बढ़ रहे हैं, और इन जहाजों में राहत सामग्री, जैसे खाद्य सामग्री, चिकित्सा सामग्री और अन्य जरूरी सामान शामिल है, जिसे म्यांमार में भूकंप से प्रभावित लोगों तक पहुंचाया जाएगा।
भारत की मदद का महत्व
भारत का यह कदम म्यांमार के लिए एक बड़ी मदद साबित हो सकता है, क्योंकि प्रभावित इलाके में अन्य देशों से भी सहायता की आवश्यकता है। भारत ने अपनी सतर्कता और मानवीय दृष्टिकोण को देखते हुए तत्काल राहत सामग्री भेजी है, जिससे म्यांमार के लोग जल्द से जल्द राहत पा सकें।
दोनों देशों में राहत एवं बचाव कार्यों की आवश्यकता अत्यधिक बढ़ गई है।
म्यांमार और थाईलैंड में आए भूकंप ने भारी तबाही मचाई है, और दोनों देशों में राहत एवं बचाव कार्यों की आवश्यकता अत्यधिक बढ़ गई है। म्यांमार में अभी भी कई लोग मलबे में फंसे हुए हैं, और मदद पहुंचाने के लिए वैश्विक स्तर पर प्रयास किए जा रहे हैं। भारत ने भी 40 टन मानवीय सहायता भेजी है, जो म्यांमार के प्रभावित क्षेत्रों में पहुंचने वाली है। अब देखने वाली बात यह है कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय द्वारा राहत कार्य कितनी तेजी से पूरे किए जाते हैं और म्यांमार के लोगों को कितनी जल्दी राहत मिल पाती है।