चंडीगढ़, 29 मार्च 2025:
पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट की पूर्व जस्टिस निर्मल यादव को 15 लाख रुपये के नोटकांड मामले में बड़ी राहत मिली है। शनिवार शाम को चंडीगढ़ स्थित सीबीआई कोर्ट की स्पेशल जज अलका मलिक ने इस मामले में पूर्व जस्टिस समेत सभी आरोपियों को बरी कर दिया।
क्या था मामला?
यह मामला 15 लाख रुपये के कथित नोटकांड से जुड़ा हुआ था, जिसमें निर्मल यादव पर भ्रष्टाचार के आरोप थे। आरोप था कि उन्होंने कथित तौर पर 15 लाख रुपये की रिश्वत ली थी। यह मामला साल 2013 में सामने आया था, जब कुछ दस्तावेज और वीडियो सामने आए थे, जिसमें जस्टिस निर्मल यादव का नाम लिया गया था।
कोर्ट का निर्णय
सीबीआई की विशेष अदालत ने 300 से अधिक सुनवाई के बाद और 76 गवाहों के बयान दर्ज करने के बाद यह निर्णय लिया। हालांकि, इस दौरान 10 गवाह अपने बयानों से पलट गए, जो कोर्ट के लिए एक बड़ा मोड़ था। इन गवाहों के बयान पलटने से मामले की दिशा बदल गई, और अदालत ने अंततः निर्मल यादव और अन्य आरोपियों को बरी करने का निर्णय लिया।
निर्मल यादव की स्थिति
पूर्व जस्टिस निर्मल यादव इस सुनवाई के दौरान शारीरिक रूप से अस्वस्थ थीं, और उनकी पैर में फ्रैक्चर था। इस वजह से वे कोर्ट में नहीं आ सकीं और नीचे पार्किंग में अपनी गाड़ी में बैठी रही थीं। हालांकि, उनका कानूनी प्रतिनिधि कोर्ट में मौजूद था और मामले की सुनवाई में भाग लिया।
कानूनी दृष्टिकोण
निर्मल यादव और उनके साथ अन्य आरोपियों के खिलाफ यह मामला लंबे समय से चल रहा था और कई कानूनी पेचिदगियों के कारण इसका फैसला समय ले रहा था। इस फैसले के बाद निर्मल यादव और उनके समर्थकों ने राहत की सांस ली, जबकि कुछ लोग फैसले पर सवाल भी उठा रहे हैं।
विपक्ष की प्रतिक्रिया
निर्मल यादव को बरी किए जाने के बाद विपक्षी दलों और कुछ कानून विशेषज्ञों ने इस मामले में चिंता जताई है। उनका कहना है कि ऐसे मामलों में आरोपों के बावजूद गवाहों का पलटना और न्यायिक प्रक्रिया में देरी से सिस्टम की विश्वसनीयता पर असर पड़ता है।
आगे की कानूनी प्रक्रिया
निर्मल यादव के खिलाफ बरी होने का फैसला आ जाने के बाद, इस मामले में आगे कोई कानूनी कार्रवाई होगी या नहीं, यह देखना होगा। फिलहाल, अदालत ने उन्हें और अन्य आरोपियों को दोषमुक्त किया है।
यह फैसला कई तरह से महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह भारतीय न्यायिक व्यवस्था के लिए एक संदिग्ध घटना से जुड़ा हुआ है और इसके व्यापक प्रभाव हो सकते हैं।