
अमित शाह का गोपालगंज दौरा: मिशन बिहार की शुरुआत
राजद प्रमुख लालू यादव का गृह जिला है।
बिहार 30 मार्च – केंद्रीय गृह मंत्री और भारतीय जनता पार्टी (भा.ज.पा.) के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने बिहार विधानसभा चुनाव 2025 की प्रचार शुरुआत गोपालगंज से करने का फैसला लिया है। यह वही जिला है, जो राजद प्रमुख लालू यादव का गृह जिला है। इस दौरे का राजनीतिक दृष्टिकोण से काफी महत्व है क्योंकि शाह यहां से भाजपा और राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) की राजनीतिक रणनीति की शुरुआत करेंगे।
आने वाले समय में शाह का हमला:
शाह ने भ्रष्टाचार और पिछले डेढ़ दशक में बिहार की बर्बादी के लिए राजद को जिम्मेदार ठहराने की योजना बनाई है।
अमित शाह की उम्मीद है कि वह राजद और उसकी प्रमुख नेता लालू यादव के खिलाफ चुनावी रणनीति तैयार करेंगे। शाह की तरफ से तेजस्वी यादव और राबड़ी देवी के नौकरी के बदले जमीन घोटाले में ईडी (प्रवर्तन निदेशालय) द्वारा की जा रही जांच को लेकर राजद को घेरने की संभावना जताई जा रही है। साथ ही वह बिहार में राजद के जंगलराज के खिलाफ युवाओं को जागरूक करने का प्रयास करेंगे। शाह ने भ्रष्टाचार और पिछले डेढ़ दशक में बिहार की बर्बादी के लिए राजद को जिम्मेदार ठहराने की योजना बनाई है।
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से मुलाकात:
एनडीए नेताओं से मिलकर बिहार विधानसभा चुनाव की रणनीति पर चर्चा करेंगे।
अमित शाह रविवार को बिहार में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से मुलाकात भी करेंगे। पटना के कार्यक्रमों में शामिल होने के बाद शाह गोपालगंज के दौरे पर जाएंगे और फिर लौटकर सीएम आवास में एनडीए नेताओं से मिलकर बिहार विधानसभा चुनाव की रणनीति पर चर्चा करेंगे। इस बैठक का उद्देश्य आगामी चुनाव की तैयारी को अंतिम रूप देना है।
एनडीए की चुनावी तैयारी:
शाह के इस दौरे के साथ ही एनडीए (राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन) की बिहार विधानसभा चुनाव के लिए असली तैयारी भी शुरू हो रही है। शनिवार को केंद्रीय गृह मंत्री ने भाजपा के नेताओं से विचार-विमर्श किया और पार्टी की कोर कमिटी से बातचीत की थी। रविवार को शाह एनडीए नेताओं से भी मिलेंगे और बिहार विधानसभा चुनाव की आगामी रणनीतियों पर चर्चा करेंगे।
भा.ज.पा. कार्यकर्ताओं और विधायकों से मुलाकात: 
अमित शाह ने शनिवार को पटना स्थित भाजपा कार्यालय में पार्टी के सांसदों, विधायकों और वरीय अधिकारियों के साथ बैठक की। इस बैठक में पार्टी के आगामी चुनावी तैयारियों पर गंभीर विचार-विमर्श हुआ। इसके बाद वह पटना के बापू सभागार में आयोजित कार्यक्रम में लगभग सात हजार सहकारी आंदोलन से जुड़े कार्यकर्ताओं को संबोधित करेंगे। इस कार्यक्रम के बाद शाह गोपालगंज जाएंगे और वहां से लौटकर एनडीए के नेताओं के साथ बैठक करेंगे, जो बिहार विधानसभा चुनाव की पहली भौतिक उपस्थिति में चर्चा करेगा।
नीतीश कुमार और विपक्ष के गठबंधन पर राजनीति
बिहार में विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच राज्य की राजनीति में हलचल बढ़ गई है। विपक्षी दलों के नेताओं ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को महागठबंधन में लाने के लिए बयान देना शुरू कर दिया है।
पप्पू यादव का बयान:
बिहार के निर्दलीय सांसद पप्पू यादव ने नीतीश कुमार को महागठबंधन में लाने का प्रस्ताव दिया है। उनका कहना है कि अगर भाजपा को 2029 के लोकसभा चुनाव में सफलता चाहिए तो नीतीश कुमार को महागठबंधन में शामिल करना जरूरी है। पप्पू यादव ने यह भी चेतावनी दी कि अगर नीतीश कुमार अपनी सीएम की कुर्सी नहीं छोड़ते हैं तो भाजपा उनकी पार्टी जेडीयू को तोड़ सकती है।
नीतीश कुमार की भूमिका:
पप्पू यादव का कहना है कि बिहार में भाजपा ने तय कर लिया है कि वह अगले विधानसभा चुनाव में अपना मुख्यमंत्री बनाएगी। उन्होंने यह भी बताया कि नीतीश कुमार ने पहले वादा किया था कि वह मुख्यमंत्री की कुर्सी छोड़ देंगे, लेकिन अब तक वह कुर्सी पर बने हुए हैं। पप्पू यादव का मानना है कि अगर नीतीश कुमार कुर्सी छोड़ने में नाकाम रहते हैं, तो भाजपा उनकी पार्टी को तोड़ सकती है और फिर भाजपा बिहार में अपना मुख्यमंत्री बनाने में सफल हो सकती है।
विपक्षी दलों का रुख:
नीतीश कुमार के खिलाफ भाजपा के संभावित कदमों के बीच विपक्षी दलों द्वारा उन्हें महागठबंधन में शामिल करने की लगातार कोशिश की जा रही है। राजद प्रमुख लालू यादव और पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी ने भी नीतीश कुमार को महागठबंधन में लाने के लिए कई बार बयान दिए हैं। अब पप्पू यादव ने भी नीतीश कुमार को महागठबंधन में शामिल होने का ऑफर दिया है।
बिहार में राजनीतिक खेल:
अब यह देखना दिलचस्प होगा कि नीतीश कुमार किस रुख का अनुसरण करते हैं। क्या वह महागठबंधन में वापस लौटते हैं या भाजपा के साथ बने रहते हैं? बिहार की राजनीति में यह समय काफी निर्णायक हो सकता है, और यह तय करेगा कि अगले कुछ सालों में बिहार में किस पार्टी की सरकार होगी।
अमित शाह का गोपालगंज दौरा और नीतीश कुमार से उनकी बैठक, बिहार विधानसभा चुनाव के लिए भाजपा और एनडीए की गंभीर तैयारी को दर्शाता है। साथ ही, पप्पू यादव और विपक्षी दलों के द्वारा नीतीश कुमार को महागठबंधन में लाने की कोशिशें यह संकेत देती हैं कि बिहार की राजनीति में अगले कुछ महीनों में बड़े बदलाव हो सकते हैं।