
देश के बैंकिंग सिस्टम और अर्थव्यवस्था पर बड़ा असर पड़ा है।
बैंकों की पूंजी की स्थिति कमजोर हो रही है।
नई दिल्ली, 31 मार्च:
केंद्र सरकार ने हाल के वर्षों में बड़े उद्योगपतियों के करोड़ों-अरबों रुपये के लोन माफ कर दिए हैं, जिससे देश के बैंकिंग सिस्टम और अर्थव्यवस्था पर बड़ा असर पड़ा है। इस कदम ने कई सवाल उठाए हैं, खासकर उन छोटे उद्योगपतियों और व्यापारियों के लिए जो कर्ज़ लेने में मुश्किलों का सामना कर रहे हैं, जबकि बड़े उद्योगपति विदेशों में बैठकर लोन माफ करवाने के बाद भी उनकी जिम्मेदारी से बचते हैं।
बड़े उद्योगपतियों के लोन माफी :
माफी में अधिकांश राशि बड़े उद्योगपतियों और कॉर्पोरेट्स के कर्ज़ की है।
सरकार द्वारा की गई लोन माफी में अधिकांश राशि बड़े उद्योगपतियों और कॉर्पोरेट्स के कर्ज़ की है, जिनमें कुछ प्रमुख नाम विजय माल्या, नीरव मोदी और ललित मोदी जैसे उद्योगपति शामिल हैं। इन उद्योगपतियों ने बड़े-बड़े बैंक लोन लिए थे, लेकिन न तो उन्हें वापस किया गया और न ही सरकार इनसे कर्ज़ की वसूली कर पाई। इसके चलते देश की सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों को भारी नुकसान हुआ है, और कई बैंकों का वित्तीय ढांचा भी कमजोर पड़ा है। पिछले 10 वर्षों में सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों ने करीब 12.3 लाख करोड़ रुपये का लोन राइट ऑफ किया है।
बैंकों की स्थिति:
वे आज भी विदेशी धरती पर बैठे हैं
यह लोन माफी सरकार की आलोचना का कारण बनी है, क्योंकि बैंकों ने छोटे कारोबारियों और आम जनता को लोन देने के लिए अत्यधिक कड़े नियम लागू कर दिए हैं। वहीं, जिन बड़े उद्योगपतियों ने बड़े पैमाने पर लोन लिया और उसे माफ करवा लिया, वे आज भी विदेशी धरती पर बैठे हैं और सरकार उनसे कर्ज़ वसूलने में नाकाम रही है। यह स्थिति बैंकिंग सिस्टम के लिए खतरे की घंटी बन गई है क्योंकि बैंक अब छोटे व्यापारियों और आम लोगों को लोन देने में हिचकिचा रहे हैं, और बैंकों की पूंजी की स्थिति कमजोर हो रही है।
आम जनता पर प्रभाव:
वहीं छोटे कारोबारियों को बैंक से कर्ज़ मिलना भी मुश्किल हो गया ।
लोन माफी का प्रभाव आम जनता और छोटे उद्योगपतियों पर गहरा पड़ा है। जहां एक ओर बड़े उद्योगपतियों के लोन माफ हो जाते हैं, वहीं छोटे कारोबारियों को बैंक से कर्ज़ मिलना भी मुश्किल हो गया है। बैंकों द्वारा कर्ज़ देने के कड़े नियमों और प्रक्रियाओं के कारण छोटे व्यापारियों का कारोबार प्रभावित हो रहा है। सरकार ने बड़े उद्योगपतियों की मदद की, लेकिन छोटे और मझोले उद्योगपतियों के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए हैं, जिससे उनकी मुश्किलें और बढ़ गई हैं।
कर्ज माफी की भरपाई:
इसका बोझ अंततः आम जनता पर
एक बड़ा सवाल यह है कि इन माफ किए गए लोन की भरपाई कैसे की जाएगी। इस पर विशेषज्ञों का मानना है कि इसका बोझ अंततः आम जनता पर ही पड़ेगा। सरकार द्वारा किए गए कर्ज माफ़ी के फैसले के बाद बैंकों की वित्तीय स्थिति कमजोर हुई है और अब सरकारी खजाने से इन घाटों की भरपाई करनी पड़ेगी। इसका सीधा असर टैक्स और सरकारी खर्चों पर पड़ेगा, जिसका बोझ आम जनता पर डाला जाएगा। इसके अलावा, छोटे व्यापारियों और उद्योगपतियों को अब अधिक कड़े नियमों और उच्च ब्याज दरों का सामना करना पड़ रहा है।
राजनीतिक और आर्थिक मुद्दे:
सरकार की नीतियों के कारण ही बड़े उद्योगपतियों को फायदा
यह लोन माफी का मामला केवल एक आर्थिक सवाल नहीं है, बल्कि एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा भी बन चुका है। इससे यह सवाल भी उठता है कि सरकार की नीतियों के कारण ही बड़े उद्योगपतियों को फायदा हुआ, जबकि छोटे व्यापारियों की स्थिति और खराब हुई। बैंकिंग क्षेत्र में बड़े उद्योगपतियों और बैंक अधिकारियों के बीच मिलीभगत का आरोप भी उठता रहा है, जिसके कारण इन कर्ज़ों का न तो वसूल किया जा सका और न ही किसी ठोस कदम के तहत सरकार इन्हें वापस लाने में सफल हो पाई।
आगे क्या होगा?
कर्ज़ माफी की प्रक्रिया को फिर से समीक्षा करने की आवश्यकता है।
आम जनता और छोटे कारोबारियों के हित में सरकार को ऐसी नीतियां बनानी चाहिए, जो बैंकिंग और लोन व्यवस्था को पारदर्शी और समान रूप से कार्यशील बनाएं। बड़े उद्योगपतियों और कॉर्पोरेट्स के लिए कर्ज़ माफी की प्रक्रिया को फिर से समीक्षा करने की आवश्यकता है, ताकि छोटे व्यापारियों को भी समान अवसर मिल सके और देश की अर्थव्यवस्था का सही विकास हो सके।
अब यह देखने की बात होगी कि सरकार इस स्थिति से कैसे निपटती है और किस तरह से छोटे व्यापारियों के लिए राहत की योजना बनाती है।