
मणिपुर में हाल की अशांति और हिंसा की स्थिति को देखते हुए लिया गया है।
नई दिल्ली, 31 मार्च:
केंद्रीय गृह मंत्रालय ने सशस्त्र बल विशेष शक्तियां अधिनियम (AFSPA) के तहत मणिपुर, नगालैंड और अरुणाचल प्रदेश के कुछ हिस्सों में लागू अवधि को 6 महीने के लिए बढ़ाने का निर्णय लिया है। यह कदम इन राज्यों में कानून-व्यवस्था की स्थिति और सुरक्षा को देखते हुए लिया गया है।
मणिपुर में AFSPA का विस्तार: 
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नगालैंड के दीमापुर, निउलैंड, और मोन जिलों में AFSPA लागू रहेगा।
केंद्रीय गृह मंत्रालय की ताजा अधिसूचना के अनुसार, मणिपुर राज्य को 1 अप्रैल 2025 से छह महीने के लिए फिर से अशांत क्षेत्र के रूप में घोषित किया गया है। यह फैसला मणिपुर में हाल की अशांति और हिंसा की स्थिति को देखते हुए लिया गया है। हालांकि, राज्य के कुछ विशेष क्षेत्रों, जिनमें 5 जिलों के 13 पुलिस स्टेशन शामिल हैं, को इस आदेश से बाहर रखा गया है। इसका मतलब यह है कि इन क्षेत्रों में स्थिति में कुछ सुधार दिख रहा है, और सरकार उन्हें AFSPA के तहत नहीं रखेगी।
गृह मंत्रालय ने कहा कि मणिपुर के कुछ हिस्सों में स्थिति को नियंत्रित करने के लिए AFSPA की आवश्यकता है, क्योंकि यहां उग्रवादी गतिविधियां और अलगाववादी आंदोलनों की चुनौतियां बनी हुई हैं। AFSPA के तहत, सुरक्षा बलों को संदिग्ध व्यक्तियों को गिरफ्तार करने, तलाशी लेने और अगर जरूरत पड़े तो गोलियां चलाने का अधिकार प्राप्त होता है। यह कदम राज्य में शांति बनाए रखने और सुरक्षा स्थिति को सुधारने के लिए जरूरी माना जा रहा है।
नगालैंड और अरुणाचल प्रदेश में भी AFSPA का विस्तार:
मणिपुर के अलावा, नगालैंड और अरुणाचल प्रदेश के कुछ हिस्सों में भी AFSPA की अवधि 6 महीने और बढ़ा दी गई है। इन राज्यों में भी उग्रवाद और अलगाववाद की गतिविधियां जारी हैं, जिसके कारण सुरक्षा बलों को अतिरिक्त शक्तियां दी गई हैं।
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नगालैंड के दीमापुर, निउलैंड, और मोन जिलों में AFSPA लागू रहेगा।
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अरुणाचल प्रदेश के कुछ हिस्सों में भी AFSPA का लागू रहना जारी रहेगा।
AFSPA (सशस्त्र बल विशेष शक्तियां अधिनियम) क्या है?
AFSPA एक कानून है जो भारतीय सेना और अन्य सुरक्षा बलों को विशेष अधिकार प्रदान करता है, ताकि वे उग्रवाद, आतंकवाद या अन्य संकटग्रस्त क्षेत्रों में शांति बनाए रखने और सुरक्षा सुनिश्चित कर सकें। इस कानून के तहत, सेना को संदिग्ध व्यक्तियों को बिना अदालत के आदेश के गिरफ्तार करने, उनकी तलाशी लेने और यदि आवश्यकता पड़े तो गोलियां चलाने का अधिकार होता है। हालांकि, यह कानून कई बार मानवाधिकार उल्लंघन के आरोपों का सामना करता है, क्योंकि यह सुरक्षा बलों को अत्यधिक शक्तियां देता है।
क्या है इस फैसले का महत्व?
केंद्र सरकार का यह कदम मणिपुर, नगालैंड और अरुणाचल प्रदेश में सुरक्षा स्थिति को सामान्य बनाए रखने और उग्रवादी गतिविधियों पर काबू पाने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। इन क्षेत्रों में शांति और सुरक्षा स्थापित करने के लिए AFSPA की अतिरिक्त शक्ति दी जा रही है। इससे सुरक्षा बलों को इन क्षेत्रों में स्थित उग्रवादियों और अलगाववादियों से निपटने में मदद मिलेगी।
सरकार का यह निर्णय यह दर्शाता है कि देश में सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है ।
केंद्रीय गृह मंत्रालय का यह कदम मणिपुर, नगालैंड और अरुणाचल प्रदेश में कानून-व्यवस्था और सुरक्षा स्थिति को बनाए रखने के लिए जरूरी है। सरकार का यह निर्णय यह दर्शाता है कि देश में सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है और उन राज्यों में शांति बहाल रखने के लिए आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं।