
गुरुग्राम, 3 अप्रैल 2025,
दिनांक 12 अक्टूबर 2024 को थाना मानेसर में एक व्यक्ति ने शिकायत दी थी कि वह मानेसर के नजदीक हाईवे पर किसी वाहन का इंतजार कर रहा था, तभी तीन लोग एक गाड़ी में आए और उसे गुरुग्राम जाने के लिए गाड़ी में बैठने का प्रस्ताव दिया। गाड़ी में बैठने के बाद, कुछ दूरी पर आरोपियों ने चाकू दिखाकर पीड़ित का पर्स छीन लिया और उसे गाड़ी से उतारकर भाग गए। पर्स में आधार कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस और कुछ नकद राशि थी। शिकायत मिलने पर थाना मानेसर ने आवश्यक धाराओं में मामला दर्ज किया।
पुलिस की टीम ने उप-निरीक्षक ललित कुमार के नेतृत्व में त्वरित कार्यवाही करते हुए तीन आरोपियों रमेश, गंगाराम उर्फ सन्नी, और के. सेलवराज को गिरफ्तार कर लिया। आरोपियों की पहचान दिल्ली के त्रिलोकपुरी मयूर विहार फेज-1 के निवासी के रूप में हुई। पुलिस पूछताछ में आरोपियों ने खुलासा किया कि वे सवारी को अपनी गाड़ी में बैठाकर पुलिसकर्मी के रूप में परिचय देते थे और फिर अपनी मोबाइल में पहले से रिकॉर्ड की गई एक VT (वीडियो टेप) चलाते, जिसमें अपराधियों को पकड़ने की बात रिकॉर्ड होती थी। इसके बाद वे सवारी के सामान की तलाशी लेते और धोखाधड़ी से सामान चुराकर गाड़ी से उसे उतार देते थे।
आरोपियों ने बताया कि उन्होंने दिल्ली NCR, केएमपी एक्सप्रेस-वे और उत्तर प्रदेश में इस प्रकार की करीब 50 वारदातों को अंजाम दिया था। इनके पास से एक गाड़ी (ईको-स्पोर्ट), एक चाकू और पीड़ित के सामान (आधार कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस और 7,000 रुपये नकद) बरामद किए गए थे।
इसके बाद, गुरुग्राम पुलिस ने मामले की तफ्तीश नए कानूनों के तहत की और आरोपियों के खिलाफ सभी आवश्यक साक्ष्य व गवाह जुटाए। पुलिस ने माननीय अदालत में चार्जशीट दाखिल की।
अदालत का निर्णय:
दिनांक 3 अप्रैल 2025 को माननीय एडिशनल सेशन जज संदीप चौहान ने साक्ष्य और गवाहों के आधार पर आरोपियों को दोषी करार दिया। अदालत ने आरोपियों को धारा 309(4) BNS के तहत 10-10 वर्ष की सजा (कठोर कारावास) और 30-30 हजार रुपये जुर्माना की सजा सुनाई।
इस मामले में, यह पहली बार है कि नए कानूनों के तहत आरोपियों को सिर्फ 6 महीने के अंदर सजा सुनाई गई। यह मामले में पुलिस की प्रभावी कार्यवाही और न्यायिक प्रणाली की तीव्रता को दर्शाता है।
नए कानूनों का महत्व:
इस मामले में नए कानूनों के तहत त्वरित कार्रवाई और न्याय की प्रक्रिया को स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है। केवल छह महीनों के भीतर सजा का सुनाया जाना एक महत्वपूर्ण कदम है, जो न्याय प्रणाली की दक्षता और प्रभावशीलता को बढ़ावा देता है।