
दिल्ली की मुख्यमंत्री का बड़ा एक्शन: अवैध कब्जों और बांग्लादेशी नागरिकों पर कड़ी कार्रवाई
नई दिल्ली, 5 अप्रैल 2025
दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने सरकारी भूमि पर अवैध कब्जा करने वाले बांग्लादेशी और रोमियो मुसलमानों के खिलाफ कड़े कदम उठाने का ऐलान किया है। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि सरकारी भूमि से अवैध कब्जा को तुरंत हटाया जाए और जो बांग्लादेशी नागरिक अवैध रूप से दिल्ली में रह रहे हैं, उन्हें उनके देश भेजा जाए। यदि कोई इस आदेश का पालन करने से इंकार करता है, तो उसके खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता का कहना है कि दिल्ली की भूमि को अवैध रूप से कब्जा करने वाले विदेशी नागरिकों को किसी भी हालत में सहन नहीं किया जाएगा। उनका कहना था, “जो जहां का है, वही वहां जाएगा। जो दिल्ली में अवैध रूप से रह रहे हैं, उन्हें वापस उनके देश भेजा जाएगा।” रेखा गुप्ता ने पिछली सरकारों पर आरोप लगाते हुए कहा कि वोट बैंक की राजनीति के कारण दिल्ली में यह समस्या बढ़ी है, और अब इसे रोकने के लिए सरकार ठोस कदम उठा रही है।
गुरुग्राम में बढ़ रही अवैध बस्ती
मुख्यमंत्री के आदेश के बाद, दिल्ली से भागकर अवैध रूप से रहने वाले बांग्लादेशी और रोमियो मुसलमान गुरुग्राम के विभिन्न इलाकों में अपना आशियाना बना रहे हैं। यह स्थिति हरियाणा सरकार के लिए चिंता का कारण बन गई है, लेकिन अब तक इस पर कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए हैं। गुरुग्राम में इन नागरिकों की बढ़ती संख्या ने स्थानीय प्रशासन और पुलिस की नींद उड़ा दी है।
विपक्षी दलों का आरोप है कि मुख्यमंत्री की यह कार्रवाई एक राजनीतिक ड्रामा हो सकती है, क्योंकि ये लोग लंबे समय से दिल्ली में निवास कर रहे हैं और उनके पास दिल्ली के वोट कार्ड और आधार कार्ड भी हैं। सवाल यह उठता है कि क्या यह केवल चुनावी खेल है या फिर सचमुच सरकार इन अवैध नागरिकों को बाहर भेजने की योजना पर गंभीर है?
रेलवे पटरियों और सरकारी भूमि पर कब्जा
दिल्ली में रेलवे पटरियों और अन्य सरकारी भूमि पर अवैध कब्जों का मामला भी लगातार बढ़ रहा है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने अधिकारियों को आदेश दिया है कि इन कब्जों को हटाया जाए और जमीन को मुक्त किया जाए। अधिकारियों ने अपने प्रयासों को तेज़ करते हुए कई अवैध कब्जों को हटाया भी है, ताकि मुख्यमंत्री के निर्देशों का पालन किया जा सके।
रोमियो मुसलमानों और बांग्लादेशियों पर दिल्ली सरकार का कड़ा रुख
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि यह अब और नहीं चलने दिया जाएगा। उनके अनुसार, दिल्ली में अवैध रूप से रहने वाले बांग्लादेशी और रोमियो मुसलमानों को वापस उनके देश भेजा जाएगा। इसके साथ ही, उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पिछली सरकारों ने वोट बैंक की राजनीति के कारण इन नागरिकों को संरक्षण दिया था।
क्या यह सिर्फ राजनीति का खेल है?
दिल्ली सरकार की इस कार्रवाई को लेकर राजनीतिक हलकों में बहस तेज हो गई है। आलोचक कहते हैं कि यह एक राजनीतिक ड्रामा हो सकता है, क्योंकि बांग्लादेशी और रोमियो मुसलमानों ने लंबे समय से दिल्ली में अवैध रूप से निवास किया है और उनके पास वोट कार्ड तक हैं। इसके अलावा, कई अवैध नागरिकों ने सरकारी भूमि पर कब्जा कर पक्के मकान भी बना लिए हैं, और अब यह सवाल उठता है कि क्या मुख्यमंत्री को इन सभी तथ्यों की जानकारी नहीं है?
अवैध नागरिकों के खिलाफ कड़े कदम उठाने की योजना बनाई है,
इस मुद्दे पर आलोचकों का कहना है कि यह सिर्फ चुनावी राजनीति का हिस्सा हो सकता है, क्योंकि दिल्ली में अधिकांश अवैध नागरिकों के पास आधार कार्ड और वोट कार्ड हैं, और वे अब दिल्ली के निवासी बन चुके हैं। क्या अब दिल्ली सरकार सचमुच इन नागरिकों को बाहर भेजने के लिए कदम उठाएगी, या यह एक चुनावी स्टंट है?
दिल्ली सरकार ने अवैध नागरिकों के खिलाफ कड़े कदम उठाने की योजना बनाई है, लेकिन यह देखना अब दिलचस्प होगा कि क्या यह कदम सिर्फ एक राजनीतिक रणनीति है या फिर सचमुच अवैध नागरिकों को दिल्ली से बाहर भेजने की तैयारी हो रही है। बांग्लादेशी और रोमियो मुसलमानों का दिल्ली से गुरुग्राम तक पलायन इस मुद्दे को और भी जटिल बना रहा है। अब यह सवाल उठता है कि क्या हरियाणा सरकार इस बढ़ते अवैध आव्रजन पर कड़ी नजर रखेगी और क्या दिल्ली सरकार के निर्देशों का पालन किया जाएगा?
मुख्य बातें:
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मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने अवैध कब्जे हटाने और बांग्लादेशियों को उनके देश भेजने के आदेश दिए।
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गुरुग्राम में अवैध नागरिकों का डेरा बढ़ रहा है, लेकिन हरियाणा सरकार ने इस पर कोई कार्रवाई नहीं की।
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मुख्यमंत्री ने पिछली सरकारों पर आरोप लगाते हुए कहा कि वोट बैंक की राजनीति के कारण यह समस्या बढ़ी।
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दिल्ली में रेलवे पटरियों और सरकारी भूमि पर अवैध कब्जे को हटाने की प्रक्रिया जारी है।
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आलोचकों का कहना है कि यह राजनीतिक ड्रामा हो सकता है, क्योंकि अधिकांश अवैध नागरिकों के पास वोट कार्ड और आधार कार्ड हैं।
आपको क्या लगता है, क्या दिल्ली सरकार इस कार्रवाई में सच्चाई दिखाएगी या यह सिर्फ चुनावी राजनीति का हिस्सा है?