नई दिल्ली 5अप्रैल ,देश की राजधानी दिल्ली से एक दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है, जहां एक युवती ने आर्थिक तंगी और उधारी न मिलने के चलते आत्महत्या कर ली। मरने से पहले युवती ने अपने कमरे की दीवार पर आत्महत्या की वजह भी साफ-साफ लिख छोड़ी – जिसने पूरे इलाके में सनसनी फैला दी।
घटना पूर्वी दिल्ली के गाजीपुर थाना क्षेत्र की बताई जा रही है। जानकारी के मुताबिक, मृतका की उम्र करीब 23 वर्ष थी और वह पिछले कुछ समय से आर्थिक तंगी से जूझ रही थी। युवती ने कमरे की दीवार पर सुसाइड नोट के रूप में लिखा –
“मुझे उधारी नहीं मिली, इसी कारण मैं मर रही हूं।”
साथ ही उसने एक मोबाइल नंबर भी लिखा, जो कथित रूप से उस शख्स का बताया जा रहा है जिससे उसने उधारी मांगी थी।
घटनास्थल पर पहुंची पुलिस, सुसाइड नोट जब्त
सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। कमरे की दीवार पर लिखा गया संदेश पुलिस ने जब्त कर लिया है। मोबाइल नंबर की जांच की जा रही है और संबंधित व्यक्ति से पूछताछ की जा रही है।
परिवार वालों का आरोप
परिजनों का कहना है कि युवती कुछ दिनों से काफी परेशान थी। उसने कई जगह मदद के लिए हाथ बढ़ाया, लेकिन किसी ने उधारी नहीं दी। जिनसे उसने मदद मांगी, उन्होंने उसे टाल दिया – यही उसकी मायूसी की वजह बनी।
जांच में जुटी पुलिस
पुलिस इस मामले को गंभीरता से ले रही है और यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि लड़की को किसने, कब और कैसे मना किया और क्या वह व्यक्ति मानसिक दबाव के लिए जिम्मेदार हो सकता है।
सुसाइड नोट और दीवार पर दर्ज बयान ने खोले कई राज
पुलिस को मौके से एक सुसाइड नोट मिला है, जिसमें पीड़िता ने उस युवक का नाम और जानकारी दी है, जिसने उससे पैसा उधार लिया था और समय पर वापस नहीं किया। मानसिक दबाव में आकर युवती ने खुदकुशी कर ली। दीवार पर उसने साफ-साफ लिखा:
“मेरे मरने की वजह वही है, उसे मत छोड़ना।”
इसके साथ ही उसने युवक का मोबाइल नंबर भी दीवार पर दर्ज किया, जिससे यह स्पष्ट होता है कि वह उस युवक से कितनी दुखी और मानसिक रूप से परेशान थी।
घर वालों ने बताया – कर्ज में थी डूबी, मांग रही थी उधारी वापस
परिजनों के मुताबिक, युवती ने कुछ समय पहले अपने जान-पहचान के एक व्यक्ति को मोटी रकम उधार दी थी। जब उसने पैसे वापस मांगे, तो उस व्यक्ति ने लगातार टालमटोल की और बात करने से भी कतराने लगा। इससे वह मानसिक रूप से बेहद परेशान थी और डिप्रेशन में चली गई थी।
सवाल खड़े कर रही है यह घटना
यह घटना समाज में बढ़ते आर्थिक दबाव और युवाओं में मानसिक स्वास्थ्य को लेकर चिंता पैदा कर रही है। क्या महज़ कुछ पैसों के लिए किसी की जान चली जानी चाहिए? क्या हम समय रहते अपनों की परेशानी को समझ पा रहे हैं?