
मुंबई, 7 दिसंबर:
महाराष्ट्र में सियासी घमासान के बीच राज्य के उपमुख्यमंत्री अजीत पवार को एक बड़ी राहत मिली है। 7 अक्टूबर 2021 को इनकम टैक्स विभाग ने अजीत पवार की एक हजार करोड़ रुपये की प्रॉपर्टी जब्त की थी, लेकिन अब भाजपा के साथ गठबंधन के बाद उनकी प्रॉपर्टी को रिलीज कर दिया गया है। यह घटनाक्रम राज्य के राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बन गया है और सवाल उठाए जा रहे हैं कि क्या सत्ता में बदलाव के साथ ही सरकारी एजेंसियों की कार्रवाई भी प्रभावित हो रही है।
घटनाक्रम: जिससे उन पर लगातार दबाव बना हुआ था।
अजीत पवार की प्रॉपर्टी को जब्त करने की कार्रवाई 7 अक्टूबर 2021 को इनकम टैक्स विभाग ने की थी। विभाग ने अजीत पवार और उनके परिवार के खिलाफ कार्रवाई करते हुए एक हजार करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त कर ली थी। इसके बाद से अजीत पवार और उनके परिवार के खिलाफ कई बार सरकारी एजेंसियों ने छापेमारी की थी, जिससे उन पर लगातार दबाव बना हुआ था।
हालांकि, जब महाराष्ट्र में भाजपा की सरकार बनी और अजीत पवार ने उपमुख्यमंत्री का पद संभाला, तो इसके बाद कुछ ही घंटों में उनकी जब्त की गई प्रॉपर्टी को रिलीज कर दिया गया। इस घटनाक्रम ने सियासी हलकों में हड़कंप मचा दिया, और कई लोग इसको भाजपा और अजीत पवार के बीच बढ़ते करीबी संबंधों से जोड़कर देख रहे हैं।
राजनीतिक संदर्भ:जैसे ही अजीत पवार ने उपमुख्यमंत्री पद की शपथ ली
महाराष्ट्र में सरकार के गठन के बाद अजीत पवार का भाजपा के साथ गठबंधन राजनीतिक लिहाज से महत्वपूर्ण है। इससे पहले, अजीत पवार एनसीपी के वरिष्ठ नेता थे, लेकिन अब वे भाजपा के साथ सत्ता साझा कर रहे हैं। जैसे ही अजीत पवार ने उपमुख्यमंत्री पद की शपथ ली, उनके खिलाफ चल रही सरकारी एजेंसियों की कार्रवाई में तेजी से बदलाव आया। एक हजार करोड़ की जब्त संपत्ति को तुरंत रिलीज कर दिया गया, जिसे लेकर विपक्षी दलों ने भाजपा और अजीत पवार के रिश्तों पर सवाल उठाए हैं।
विपक्षी दलों की प्रतिक्रिया:अजीत पवार को राजनीतिक संरक्षण मिल गया है।
विपक्षी दलों ने इस घटनाक्रम पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। कांग्रेस और शिवसेना ने आरोप लगाया है कि यह एक स्पष्ट उदाहरण है कि भाजपा के साथ गठबंधन करने के बाद अजीत पवार को राजनीतिक संरक्षण मिल गया है। उन्होंने कहा कि जब अजीत पवार की प्रॉपर्टी जप्त की गई थी, तब उनके खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई थी, लेकिन अब जब वे भाजपा के साथ हैं, तो सारी कार्रवाई को वापस लिया जा रहा है।
पार्टी और सरकारी एजेंसियों के बीच समीकरण:
इस घटनाक्रम ने यह सवाल भी खड़ा कर दिया है कि क्या भाजपा के सत्ता में आने के बाद सरकारी एजेंसियों की निष्पक्षता प्रभावित हो रही है। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि जब अजीत पवार के जैसे प्रमुख नेता भाजपा के साथ सत्ता में शामिल होते हैं, तो एजेंसियों के दवाब के तरीके बदल सकते हैं, और यह भी दर्शाता है कि राजनीतिक समीकरण कैसे सरकारी कार्रवाई को प्रभावित कर सकते हैं।
घटना ने महाराष्ट्र की राजनीति में एक नई बहस शुरू कर दी
अजीत पवार की प्रॉपर्टी रिलीज की घटना ने महाराष्ट्र की राजनीति में एक नई बहस शुरू कर दी है। यह घटना यह संकेत देती है कि महाराष्ट्र में भाजपा के साथ सत्ता में आने वाले नेताओं को किस तरह से लाभ मिल रहा है। यह भी सवाल उठाती है कि क्या सत्ता परिवर्तन के बाद सरकारी एजेंसियों का कामकाज सियासी दबाव में आ रहा है। महाराष्ट्र की राजनीति में यह घटनाक्रम आने वाले समय में और भी चर्चा का कारण बन सकता है।