पटना 25 जनवरी -घटना बिहार के मुजफ्फरपुर जिले के मीनापुर क्षेत्र की है, जहां पर गणतंत्र दिवस के मौके पर एक सरकारी स्कूल के प्रधानाध्यापक, संजय कुमार सिंह, शराब के नशे में झंडा फहराने पहुंचे थे। यह मामला बिहार सरकार की शराबबंदी नीति की सख्त धज्जियाँ उड़ाने का उदाहरण है, क्योंकि राज्य में शराबबंदी लागू है और यह घटना उस नीति के उल्लंघन के तौर पर सामने आई है।
नशे की हालत में लड़खड़ा गए–
घटना के अनुसार, जब हेडमास्टर संजय कुमार सिंह तिरंगे के सामने खड़े हुए और झंडा फहराने की कोशिश की, तो वे नशे की हालत में लड़खड़ा गए। स्थानीय ग्रामीणों ने यह दृश्य देखा और उन्होंने इस पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने तुरंत मीनापुर के विधायक मुन्ना यादव को सूचना दी। विधायक ने इसे गंभीर मामला मानते हुए पुलिस को इसकी सूचना दी, जिसके बाद पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए हेडमास्टर को गिरफ्तार कर लिया।
शराब पीकर गणतंत्र दिवस के दिन तिरंगा फहराने की कोशिश–
मीनापुर के विधायक मुन्ना यादव ने इस घटना को लेकर कहा कि यह उदाहरण है शराबबंदी की धज्जियाँ उड़ाने का, और यही है वह शराबबंदी का वास्तविक चेहरा, जहां सरकारी स्कूल के प्रधानाध्यापक ने शराब पीकर गणतंत्र दिवस के दिन तिरंगा फहराने की कोशिश की। यह एक गंभीर उल्लंघन है, क्योंकि शिक्षा के मंदिर माने जाने वाले स्कूल में इस तरह की घटना समाज के लिए गलत संदेश भेजती है।
पुलिस ने मामले को गंभीरता से लिया और सूचना मिलने के तुरंत बाद एक पुलिस टीम भेजी, जिसने स्कूल से ही हेडमास्टर को गिरफ्तार किया। थानेदार ने बताया कि पुलिस ने त्वरित कार्रवाई की और गिरफ्तार किए गए प्रधानाध्यापक से पूछताछ शुरू कर दी है।
इस पूरे मामले से शराबबंदी के कानून की प्रासंगिकता और प्रशासन की जिम्मेदारी पर भी सवाल उठते हैं। सरकारी स्कूल में शिक्षा देने वाले व्यक्ति का ऐसा व्यवहार न केवल शिक्षा के क्षेत्र में एक गलत संदेश भेजता है, बल्कि यह शराबबंदी के नियमों के प्रति भी एक खामोश चुनौती भी पेश करता है। बिहार में शराबबंदी की सख्त नीति के बावजूद इस तरह के मामलों का सामने आना यह दर्शाता है कि यह नीति कितनी प्रभावी है और क्या इसकी सही तरीके से निगरानी हो रही है।
बिहार सरकार के लिए यह एक बड़ी चुनौती है, क्योंकि इस घटना से न सिर्फ शराबबंदी के कानून को लेकर सवाल उठते हैं, बल्कि यह भी दिखाता है कि सरकारी सेवाओं में बैठे लोगों को यदि इस तरह के कृत्य करने की अनुमति दी जाती है, तो यह समाज के लिए हानिकारक हो सकता है। शिक्षा क्षेत्र में ऐसे लोगों का होना, जो न केवल शराबबंदी का उल्लंघन करें, बल्कि अपने पद की गरिमा को भी न समझें, समाज के लिए चिंता का विषय है।
कानून सभी के लिए बराबर–
इस घटना के बाद यह उम्मीद की जा रही है कि बिहार में शराबबंदी की नीति को और सख्ती से लागू किया जाएगा, ताकि ऐसे मामलों को रोका जा सके और आम जनता को यह संदेश दिया जा सके कि कानून सभी के लिए बराबर है, चाहे वह कोई भी हो।