नई दिल्ली11 फरवरी – । भाजपा ने 6 फ्लैग स्टाफ रोड स्थित मुख्यमंत्री आवास को शीशमहल बताते हुए इसे बड़ा चुनावी मुद्दा बनाया था। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह सहित अन्य नेताओं ने चुनाव प्रचार में यह मुद्दा उठाया था। चुनाव बाद भी पार्टी इस मुद्दे को उठा रही है।
रोहिणी से तीसरी बार विधायक निर्वाचित हुए पूर्व नेता प्रतिपक्ष विजेंद्र गुप्ता ने उपराज्यपाल वीके सक्सेना को पत्र लिखकर शीशमहल को मूल स्थिति में बहाल करने की मांग की है।
अवैध रूप से शीशमहल में परिवर्तित: विजेंद्र गुप्ता
उनका कहना है कि मुख्यमंत्री रहते हुए अरविंद केजरीवाल ने अपने लिए आवंटित टाइप पांच के सरकारी बंगले को अवैध रूप से शीशमहल में परिवर्तित कर दिया। इसके लिए अवैध रूप से आसपास स्थित सरकारी अधिकारियों के आवास को भी इसके परिसर में शामिल किया गया है। इस अतिक्रमण को हटाया जाना चाहिए।
जनता के पैसे का दुरुपयोग: विजेंद्र गुप्ता
उनका कहना है कि केजरीवाल ने मुख्यमंत्री आवास को शीशमहल बनाने में जनता के पैसे का दुरुपयोग किया गया। यह पूरी तरह से अवैध और अनैतिक था। यह निर्माण बिना किसी अनुमति और निर्धारित प्रक्रियाओं का पालन किए बिना किया गया था। इस आवास का क्षेत्रफल 10 हजार वर्ग मीटर था। बिना किसी अनुमति के इसे बढ़ाकर 50 हजार वर्ग मीटर तक कर दिया गया।
‘इसे तोड़ने के बजाय पुरानी स्थिति में बहाल किया जाए’
उन्होंने लिखा कि इसके लिए आसपास के टाइप पांच के आठ सहित 10 सरकारी आवास को शीशमहल के परिसर में शामिल किया गया। अभी भी वहां पर कुछ फ्लैट ढांचा उपलब्ध है। इसे केजरीवाल सरकार तोड़ना चाह रही थी। मामला प्रकाश में आने के बाद वह इसमें सफल नहीं हो सकी। इसे तोड़ने की बजाय पुरानी स्थिति में बहाल किया जाना चाहिए। पहले की तरह सड़क व अन्य सुविधाएं भी उपलब्ध कराने की जरूरत है।
केजरीवाल की कथनी-करनी में जमीन-आसमान का फर्क
उन्होंने पत्र में लिखा है कि दिल्ली के लोग मूलभूत सुविधाओं से वंचित हैं। वहीं, केजरीवाल ने शीशमहल पर करोड़ों रुपये खर्च कर दिए। यह भ्रष्टाचार का गंभीर मामला है। केजरीवाल की कथनी और करनी में जमीन-आसमान का अंतर है। एक तरफ वे स्वयं को आम आदमी बताते रहे, वहीं दूसरी तरफ उन्होंने जनता के पैसों से अपने लिए एक भव्य महल खड़ा कर लिया।
चार सरकारी संपत्तियों के विलय को रद्द करने की अपील
वहीं दिल्ली बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा ने एलजी सक्सेना से सीएम आवास से जुड़ी चार सरकारी संपत्तियों के विलय को रद्द करने की अपील की है। उन्होंने आरोप लगाया है कि केजरीवाल ने इस बंगले का विस्तार चार सरकारी संपत्तियों को मिलाकर किया था। सचदेवा ने एलजी से इस विलय को रद्द करने का आग्रह किया और कहा कि नई सरकार तय करेगी कि इस बंगले का भविष्य क्या होगा।