उत्तर प्रदेश 13 फरवरी -सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश गैंगस्टर एक्ट को लेकर एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। आगरा के बमरौली कटरा थाने में इस अधिनियम के तहत दर्ज एक FIR को सुप्रीम कोर्ट ने रद्द कर दिया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि ऐसे कठोर कानूनों के तहत दर्ज मामलों की सख्त जांच आवश्यक है, ताकि इसका दुरुपयोग न हो
सख्त कानूनों के दुरुपयोग पर सुप्रीम कोर्ट की चेतावनी
सुप्रीम कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि संपत्ति विवादों या वित्तीय मामलों में उत्तर प्रदेश गैंगस्टर एक्ट जैसे सख्त कानूनों के अनुचित उपयोग को रोकने के लिए गहन जांच की जानी चाहिए। कोर्ट ने कहा कि “अधिकारियों को अधिनियम के कठोर प्रावधानों को लागू करने में अप्रतिबंधित विवेक नहीं दिया जा सकता।”
इसके अलावा, अदालत ने कहा कि न्यायालयों को ऐसे मामलों में अभियोजन की अनुमति देने से पहले वैधानिक आवश्यकताओं का पूरी तरह से पालन सुनिश्चित करना चाहिए।
संविधान के अनुच्छेद 21 का हवाला
सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में संविधान के अनुच्छेद 21 का हवाला देते हुए कहा कि “जीवन और स्वतंत्रता के अधिकार को केवल इस आधार पर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता कि किसी व्यक्ति के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज हैं।”
कोर्ट ने आगे कहा कि जब किसी कठोर कानून को लागू करने की बात आती है, तो संबंधित अधिकारियों को इसका विवेकाधिकार नहीं दिया जा सकता। ऐसे प्रावधानों को कठोरता से लागू किया जाना आवश्यक है, ताकि निर्दोष लोगों को अनावश्यक परेशानियों का सामना न करना पड़े।
क्या कहा सुप्रीम कोर्ट ने?
- गैंगस्टर एक्ट जैसे सख्त कानूनों के मामलों में एफआईआर दर्ज करने से पहले उचित जांच होनी चाहिए।
- संपत्ति और वित्तीय विवादों में इस अधिनियम का दुरुपयोग नहीं होना चाहिए।
- न्यायालयों को अभियोजन की अनुमति देने से पहले वैधानिक आवश्यकताओं का सख्ती से पालन करना चाहिए।
- अनुच्छेद 21 के तहत नागरिकों की स्वतंत्रता को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
फैसले का असर
सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला उत्तर प्रदेश में गैंगस्टर एक्ट के तहत दर्ज मामलों के लिए एक मिसाल बनेगा। अब अधिकारियों को इस अधिनियम को लागू करने से पहले और अधिक सतर्क रहना होगा, जिससे बेगुनाहों को किसी भी अन्याय से बचाया जा सके।