दिल्ली 14 फरवरी -प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अमेरिका के दो दिवसीय दौरे पर एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक जीत हासिल की है। अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 26/11 मुंबई आतंकी हमले में शामिल तहव्वुर राणा के भारत प्रत्यर्पण की घोषणा कर दी है। इस निर्णय से भारतीय जांच एजेंसियों के 16 साल पुराने इंतजार का अंत हो गया है।
ट्रंप का बयान और प्रत्यर्पण प्रक्रिया
डोनाल्ड ट्रंप ने अपने बयान में कहा कि उनके प्रशासन ने 26/11 मुंबई आतंकवादी हमले में शामिल बेहद दुष्ट तहव्वुर राणा के प्रत्यर्पण को मंजूरी दे दी है। उन्होंने कहा कि राणा को भारत में न्याय का सामना करना होगा।
तहव्वुर राणा पाकिस्तानी मूल का कनाडाई नागरिक है, जो अमेरिका में लंबे समय से कानूनी प्रक्रिया का सामना कर रहा था। भारत की ओर से लंबे समय से उसके प्रत्यर्पण की मांग की जा रही थी, लेकिन कानूनी अड़चनों के चलते मामला लटका हुआ था। अब अमेरिकी प्रशासन के फैसले से उसकी भारत वापसी का रास्ता साफ हो गया है।
26/11 हमले में राणा की भूमिका
तहव्वुर राणा पर आरोप है कि उसने 2008 के मुंबई हमलों की साजिश में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। उसे अमेरिका में डेविड हेडली के साथ साजिश रचने का दोषी पाया गया था। भारतीय एजेंसियों के अनुसार, तहव्वुर राणा ने लश्कर-ए-तैयबा के आतंकियों को लॉजिस्टिक सपोर्ट मुहैया कराया था, जिससे 26/11 हमले को अंजाम दिया जा सका।
इस हमले में 166 निर्दोष लोगों की जान गई थी और सैकड़ों लोग घायल हुए थे। इस हमले के पीछे पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठनों का हाथ था, जिसमें तहव्वुर राणा की संलिप्तता भी सामने आई थी।
भारत की कूटनीतिक सफलता
भारत ने तहव्वुर राणा के प्रत्यर्पण के लिए कई वर्षों से प्रयास किए थे। इस दौरान अमेरिका और भारत के बीच गहन राजनयिक वार्ताएं हुईं। पीएम मोदी के हालिया अमेरिकी दौरे के दौरान यह मामला फिर से उठाया गया, जिसके बाद ट्रंप प्रशासन ने प्रत्यर्पण की मंजूरी दी।
यह भारत की एक बड़ी कूटनीतिक जीत मानी जा रही है, क्योंकि इससे आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक लड़ाई में भारत की साख मजबूत होगी। यह फैसला भारत-अमेरिका संबंधों को और मजबूत करेगा और भविष्य में आतंकवाद के खिलाफ साझा कार्रवाई को गति देगा।
अब भारत सरकार की एजेंसियां तहव्वुर राणा को भारत लाने और उस पर मुकदमा चलाने की तैयारी कर रही हैं।