
महापुरुषों की विरासत को सहेजने और विकास को बढ़ावा देने के लिए ,
लखनऊ, 07 मार्च
उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने प्रदेश के विकास और प्रगति के साथ महापुरुषों की विरासत को सहेजने और उसे नई पीढ़ी तक पहुंचाने के लिए विशेष प्रयास किए हैं। योगी सरकार ने महापुरुषों के सम्मान में कई योजनाओं और स्थलों का नामकरण किया है, जिससे उनके योगदान को सम्मानित किया जा सके और उनकी शिक्षा तथा आदर्शों को जन-जन तक पहुंचाया जा सके। यह कदम योगी सरकार के विकास के साथ विरासत को संरक्षित करने की प्रतिबद्धता को स्पष्ट रूप से दर्शाता है।
पूर्ववर्ती सरकारों की आलोचना और योगी सरकार का दृष्टिकोण
पूर्ववर्ती सरकारों के कार्यकाल में कई स्थानों और योजनाओं का नाम बदला गया था, लेकिन इन बदलावों के पीछे जातिवाद और धर्म के आधार पर निर्णय लेने की नीति थी, जिसके कारण महापुरुषों की वास्तविक विरासत को नजरअंदाज किया गया। योगी सरकार ने इस विचारधारा को पीछे छोड़ते हुए महापुरुषों की असली धरोहर और उनके योगदान को उचित सम्मान दिया है। इस बदलाव से यह सिद्ध होता है कि योगी सरकार न केवल विकास की दिशा में कार्य कर रही है, बल्कि सांस्कृतिक धरोहर और महापुरुषों के योगदान को सहेजने के लिए भी ठोस कदम उठा रही है।
महापुरुषों के नाम पर 10 नई योजनाओं की घोषणा
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी ने प्रदेश के समग्र विकास और सामाजिक प्रगति के लिए महापुरुषों के नाम पर 10 नई योजनाओं की घोषणा की है। यह निर्णय योगी सरकार के विकास के साथ विरासत को सहेजने और समरसता को बढ़ावा देने के लिए महत्वपूर्ण है। इन योजनाओं के माध्यम से महापुरुषों के योगदान को सम्मानित किया जाएगा और उनके आदर्शों को जनमानस में फैलाया जाएगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि इन योजनाओं से न केवल महापुरुषों की शिक्षा और विचारों को प्रचारित किया जाएगा, बल्कि इससे समाज के विभिन्न वर्गों में सामूहिक चेतना भी जागृत होगी। महापुरुषों के विचारों को ध्यान में रखते हुए, इन योजनाओं के तहत कार्यक्रमों, सुविधाओं और संस्थानों का विकास किया जाएगा, जिससे उनकी धरोहर को संरक्षित किया जा सके।
विकास और विरासत का सामंजस्य
योगी सरकार का यह कदम प्रदेश के विकास और समृद्धि के साथ-साथ उसकी सांस्कृतिक धरोहर को सहेजने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो रहा है। महापुरुषों की विरासत को संरक्षित करना और उसे जनमानस तक पहुंचाना, योगी सरकार की दूरदर्शिता को दर्शाता है। यह कदम न केवल वर्तमान पीढ़ी के लिए प्रेरणास्त्रोत बनेगा, बल्कि आने वाली पीढ़ी भी इस विरासत से लाभान्वित होगी।
इस घोषणा के साथ ही यह स्पष्ट हो गया है कि योगी सरकार प्रदेश के विकास के साथ-साथ अपनी सांस्कृतिक और ऐतिहासिक धरोहर को सहेजने का कार्य भी कर रही है। इससे राज्य में समृद्धि, सामाजिक समरसता और राष्ट्रीय एकता को भी बढ़ावा मिलेगा।