नियम की पालना करवाने के लिए भेजा पत्र
रेवाड़ी26 मार्च –
जिला रेवाड़ी के सामाजिक कार्यकर्ता कैलाश चंद अधिवक्ता ने 26 मार्च 2025 को प्रदेश के शिक्षा विभाग के निदेशक, सेकेंडरी शिक्षा विभाग, निदेशक मौलिक शिक्षा विभाग पंचकुला, प्रदेश के सभी डिविजनल कमिश्नर, सभी जिला उपायुक्त, सभी जिला शिक्षा अधिकारी और सभी जिला मौलिक शिक्षा अधिकारियों को पत्र भेजकर मांग की है कि वर्ष 2021 में हरियाणा सरकार द्वारा हरियाणा शिक्षा नियमावली 2003 को संशोधित करते हुए एक अधिसूचना जारी की थी, जिसके तहत प्रदेश के सभी निजी स्कूलों में NCERT या संबंधित बोर्ड की पुस्तकों को ही बच्चों को पढ़ाया जाए।
परंतु, कैलाश चंद के अनुसार, प्रदेश के अधिकांश निजी स्कूलों द्वारा इस नियम का उल्लंघन किया जा रहा है। इन स्कूलों में बच्चों को निजी पब्लिशर्स की किताबें पढ़ाई जा रही हैं, जिनमें स्कूलों का कमीशन भी शामिल होता है। इसके अलावा, हर साल इन किताबों को बदला जाता है ताकि पुरानी किताबें बिकने की स्थिति में न हों, जिससे स्कूलों को हर साल नई किताबें बेचने का मौका मिल सके। इस प्रक्रिया से स्कूलों के लिए एक बड़ा आर्थिक लाभ होता है, जबकि छात्रों को शिक्षा का स्तर और गुणवत्ता प्रभावित हो रही है।
कैलाश चंद एडवोकेट ने हरियाणा सरकार के शिक्षा विभाग, डिविजनल कमिश्नर और जिला अधिकारियों को पहले 8 जनवरी 2025 को और उसके बाद भी रिमाइंडर पत्र भेजकर निजी स्कूलों में पुस्तकों की जांच करवाने की मांग की थी, लेकिन अब तक किसी भी अधिकारी ने इस मामले में कोई कार्रवाई नहीं की। न ही किसी स्कूल के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की गई।
अब, कैलाश चंद ने एक बार फिर पत्र भेजकर यह मांग की है कि आगामी सत्र (1 अप्रैल 2025 से) से प्रदेश के सभी निजी स्कूलों में केवल NCERT की पुस्तकों को लागू किया जाए, जैसा कि हरियाणा सरकार ने नियमावली में निर्धारित किया है। उन्होंने यह भी चेतावनी दी है कि यदि इस नियम की पालना नहीं करवाई जाती है, तो वह प्रदेश के सभी अधिकारियों के खिलाफ क्रिमिनल प्रक्रिया के तहत केस दायर करने की प्रक्रिया शुरू करेंगे।
इस पत्र में कैलाश चंद ने यह भी कहा कि यह मामला बच्चों के शिक्षा के अधिकार से संबंधित है और निजी स्कूलों द्वारा नियमों का उल्लंघन करना बच्चों के भविष्य को प्रभावित कर सकता है। उनका कहना है कि समय रहते उचित कार्रवाई की जानी चाहिए, ताकि विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण और सही शिक्षा मिल सके।
यह कदम शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है, और यह देखना होगा कि राज्य सरकार और संबंधित अधिकारी इस मुद्दे पर क्या कार्रवाई करते हैं।