अटल बिहारी वाजपेयी केवल एक राजनेता नहीं थे वे एक विचार, एक संस्कृति और एक संवेदनशील राष्ट्रपुरुष थे-हर्षवर्धन मित्तल
भारत रत्न, पूर्व प्रधानमंत्री श्रद्धेय अटल बिहारी वाजपेयी जी का नाम भारतीय राजनीति, साहित्य एवं राष्ट्रनिर्माण के इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में अंकित हैं-हर्षवर्धन मित्तल
नई दिल्ली। भारत रत्न पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की 101वीं जयंती के अवसर पर भाजपा के वरिष्ट नेता, जिला कोषाध्यक्ष हर्षवर्धन मित्तल ने अटल बिहारी वाजपेयी जी के जीवन पर अपने विचार साझा किए, उन्होंने कहा कि अटल बिहारी वाजपेयी वो सख्सियत थे जिनका नाम भारतीय राजनीति, साहित्य और राष्ट्रनिर्माण के इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में अंकित है। भारत के पूर्व प्रधानमंत्री, श्रद्धेय अटल बिहारी वाजपेयी जी की एक ऐसे नेता थे जो सत्ता में रहते हुए भी विनम्र रहे, विपक्ष में रहते हुए भी मर्यादित रहे, और कवि हृदय होते हुए भी दृढ़ राष्ट्रवादी रहे।
अटल बिहारी वाजपेयी केवल एक राजनेता नहीं थे, वे एक विचार, एक संस्कृति और एक संवेदनशील राष्ट्रपुरुष थे।
अटल बिहारी वाजपेयी जी का जन्म 25 दिसंबर 1924 को मध्यप्रदेश के ग्वालियर में हुआ। उनके पिता पंडित कृष्ण बिहारी वाजपेयी एक शिक्षक और कवि थे। साहित्य और संस्कार उन्हें विरासत में मिले। बाल्यावस्था से ही अटल जी में देशभक्ति, अध्ययनशीलता और अभिव्यक्ति की अद्भुत क्षमता दिखाई देने लगी थी।
उन्होंने ग्वालियर, कानपुर और आगरा विश्वविद्यालय से उच्च शिक्षा प्राप्त की। छात्र जीवन में ही वे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े और राष्ट्रसेवा को अपने जीवन का लक्ष्य बना लिया।
अटल जी ने किशोर अवस्था में ही भारत छोड़ो आंदोलन में भाग लिया और जेल भी गए। स्वतंत्रता के बाद उन्होंने पत्रकारिता के माध्यम से राष्ट्रवाद की आवाज़ को बुलंद किया। बाद में वे भारतीय जनसंघ से जुड़े और राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाई।
1957 में वे पहली बार लोकसभा के लिए निर्वाचित हुए। उस समय पंडित जवाहरलाल नेहरू ने संसद में कहा था “यह युवक एक दिन देश का प्रधानमंत्री बनेगा।”
इतिहास ने इस कथन को सत्य सिद्ध किया। अटल बिहारी वाजपेयी की सबसे बड़ी शक्ति थी उनकी वाणी। वे ऐसे वक्ता थे जिनकी बातों को विरोधी भी ध्यान से सुनते थे। उनके भाषणों में तर्क होता था, मर्यादा होती थी और राष्ट्र के प्रति समर्पण झलकता था।
वे एक संवेदनशील कवि भी थे। उनकी सुप्रसिद्ध कविता
“हार नहीं मानूंगा,
रार नहीं ठानूंगा…”
आज भी युवाओं में ऊर्जा भर देती हैं।
हर्षवर्धन मित्तल ने कहा कि अटल बिहारी वाजपेयी जी तीन बार भारत केप्रधानमंत्री बने, उनके शासनकाल को सुशासन, विकास और राष्ट्रीय गौरव का काल माना जाता है। अटल बिहारी वाजपेयी जी के कार्यकाल के दौरान अनेक ऐतिहासिक कार्य किए गए जैसे कि पोखरण परमाणु परीक्षण: 1998 में अटल जी के नेतृत्व में भारत ने पोखरण में सफल परमाणु परीक्षण किया और दुनिया को यह संदेश दिया कि भारत अपनी सुरक्षा से कोई समझौता नहीं करेगा। स्वर्णिम चतुर्भुज परियोजना: उन्होंने देश को सड़कों के माध्यम से जोड़ने का सपना देखा और स्वर्णिम चतुर्भुज परियोजना शुरू की, जिसने भारत के आर्थिक विकास को नई गति दी। दूरसंचार और आईटी क्रांति:
अटल जी ने निजी क्षेत्र को बढ़ावा देकर भारत को आईटी महाशक्ति बनाने की नींव रखी।
पड़ोसी देशों से शांति प्रयास:
उन्होंने पाकिस्तान से संबंध सुधारने के लिए लाहौर बस यात्रा की। उनका विश्वास था
“हम दोस्त बदल सकते हैं, पड़ोसी नहीं।”
हर्षवर्धन मित्तल ने कहा कि लोकतंत्र और मर्यादा के प्रतीक
अटल बिहारी वाजपेयी जी राजनीति में मर्यादा और नैतिकता के प्रतीक थे। वे कट्टर विरोध के बावजूद व्यक्तिगत कटुता से दूर रहते थे। उन्होंने कहा था “सरकारें आएँगी-जाएँगी, लेकिन देश रहना चाहिए।”
अटल जी आजीवन अविवाहित रहे और पूरा जीवन राष्ट्र को समर्पित कर दिया। उनका जीवन अत्यंत सादा था, न कोई दिखावा, न कोई अहंकार। सत्ता में रहते हुए भी वे आम नागरिक की तरह जीते थे। अटल बिहारी वाजपेयी जी को देश के सर्वोच्च सम्मान भारत रत्न से सम्मानित किया गया।
16 अगस्त 2018 को उनका निधन हुआ, लेकिन वे आज भी अपनी कविताओं में
अपने विचारों में और अपने कार्यों में अमर हैं।
