12 जनवरी 2026
अंतरराष्ट्रीय राजनीति से जुड़ी एक चौंकाने वाली और विवादित खबर इस वक्त सोशल मीडिया और वैश्विक मंचों पर तेजी से चर्चा में है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म TRUTH पर एक पोस्ट साझा की है, जिसमें उन्होंने खुद को “Acting President of Venezuela” बताया। इस पोस्ट में एक एडिटेड विकिपीडिया पेज दिखाया गया है, जिसमें दावा किया गया है कि जनवरी 2026 से डोनाल्ड ट्रंप वेनेजुएला के मौजूदा राष्ट्रपति हैं।
इस पोस्ट के सामने आते ही इंटरनेट पर बहस तेज हो गई है—क्या यह राजनीतिक दबाव की रणनीति है, व्यंग्य है या किसी बड़े संकेत की तैयारी?इसी दावे से जुड़ी रिपोर्ट्स में कहा जा रहा है कि जनवरी की शुरुआत में अमेरिका ने वेनेजुएला में बड़े पैमाने पर सैन्य कार्रवाई की, जिसके तहत राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और फर्स्ट लेडी सिलिया फ्लोरेस को गिरफ्तार किया गया।डोनाल्ड ट्रंप के हवाले से यह भी कहा गया कि अमेरिका तब तक वेनेजुएला की प्रशासनिक जिम्मेदारी संभालेगा, जब तक वहां “सुरक्षित और उचित सत्ता हस्तांतरण” नहीं हो जाता।
हालांकि, दूसरी ओर वेनेजुएला के सुप्रीम कोर्ट ने इन दावों को चुनौती देते हुए निकोलस मादुरो की उपराष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज को अंतरिम राष्ट्रपति नियुक्त करने की घोषणा की है। इससे यह साफ है कि ज़मीनी हकीकत और सोशल मीडिया पर किए जा रहे दावों के बीच बड़ा अंतर है।
अब बात करते हैं उस पहलू की, जो इस पूरे विवाद के केंद्र में नजर आ रहा है— तेल।
डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी दी है कि यदि मादुरो के करीबी नेता अमेरिकी शर्तों को नहीं मानते, तो आगे भी सैन्य कार्रवाई की जा सकती है। इन शर्तों में सबसे अहम है वेनेजुएला के तेल संसाधनों पर नियंत्रण।
ट्रंप का दावा है कि अमेरिका 50 मिलियन बैरल वेनेजुएला क्रूड ऑयल को रिफाइन कर अंतरराष्ट्रीय बाजार में बेचने की योजना बना रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिकी बलों ने वेनेजुएला से जुड़े कई ऑयल टैंकर भी जब्त किए हैं। इसी बीच, अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो के हवाले से एक तीन-चरणीय योजना की बात सामने आई है।
पहला चरण—मादुरो की गिरफ्तारी के बाद देश को स्थिर करना।
दूसरा चरण—रिकवरी फेज में अमेरिकी तेल कंपनियों को एक्सेस देना।
और तीसरा चरण—सत्ता हस्तांतरण की निगरानी करना।
रुबियो के कथित बयान में कहा गया है कि अमेरिका के पास ऐसा तंत्र है जिससे वह अंतरिम सरकार पर पूरा नियंत्रण और दबाव बनाए रख सकता है।
फिलहाल, ये सभी दावे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बेहद संवेदनशील और विवादित माने जा रहे हैं। आधिकारिक पुष्टि और स्वतंत्र स्रोतों से सत्यापन के बिना इन पर अंतिम निष्कर्ष निकालना मुश्किल है।
सवाल यही है—क्या यह सिर्फ सोशल मीडिया पर दबाव बनाने की रणनीति है,या वाकई दुनिया एक नए भू-राजनीतिक टकराव की ओर बढ़ रही है?
