दिल्ली, 14 जनवरी 2026
भारतीय सेना में महिलाओं की भूमिका को लेकर एक अहम और लंबे समय तक असर डालने वाला बयान सामने आया है ।सेना प्रमुख, जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने कहा है कि भारतीय सेना इन्फैंट्री में महिलाओं को शामिल करने के लिए पूरी तरह तैयार है लेकिन यह फैसला समाज की स्वीकार्यता पर निर्भर करेगा। जनरल द्विवेदी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि महिलाएं काली माता का स्वरूप हैं और उन्हें किसी भी रूप में कमजोर वर्ग के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि सेना की सोच पूरी तरह जेंडर न्यूट्रल है और महिला-पुरुषों के बीच किसी प्रकार का भेदभाव नहीं किया जाता।
उन्होंने कहा कि अगर सबके लिए एक ही पैमाना हो, क्षमताएं समान हों और समाज एक राष्ट्र के रूप में इसके लिए तैयार हो, तो महिलाओं को लड़ाकू भूमिका में कल से भी शामिल किया जा सकता है। हालांकि उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि चिकित्सा और संचालन से जुड़ी व्यावहारिक चुनौतियों के कारण समान पैमानo को लागू करना आसान नहीं है। महिलाओं के लिए नए सैन्य रोल खोलने का फैसला उनके प्रदर्शन के आंकड़ों के आधार पर किया जाएगा। सेना प्रमुख के अनुसार, महिलाओं के लिए भूमिकाएं चरणबद्ध तरीके से खोली जाएंगी। शुरुआत सहायक बलों से होगी, इसके बाद लड़ाकू बलों और अंततः स्पेशल बल तक रास्ता खुलेगा।
फिलहाल भारतीय सेना में करीब 8,000 महिला अधिकारी कार्यरत हैं। एनडीए में 60 महिला कैडेट मौजूद हैं और हर साल 20 नई कैडेट शामिल करने की योजना है। ओटीए से हर साल 120 महिला अधिकारी तैयार हो रही हैं। प्रादेशिक सेना में भी महिलाओं के लिए 110 पद खोले जाएंगे, हालांकि इसके लिए आर्मी एक्ट में संशोधन जरूरी होगा। आधुनिकीकरण पर बोलते हुए जनरल द्विवेदी ने कहा कि सेना ड्रोनरेजिमेंट, मिसाइल बल और स्वदेशी गोला-बारूद पर तेजी से काम कर रही है। ऑपरेशन सिंदूर के बाद ड्रोन क्षमताओं में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।
यह बयान न केवल सेना में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी को दर्शाता है, बल्कि भविष्य की युद्ध रणनीति की दिशा भी तय करता
