तमिलनाडु ,16 जनवरी 2026
तमिल सिनेमा के सुपरस्टार थलपति विजय की आखिरी फिल्म ‘जन नायकन’ अब सिर्फ एक फिल्म नहीं, बल्कि तमिलनाडु की राजनीति का नया अखाड़ा बन चुकी है। सेंसर सर्टिफिकेट के विवाद से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा यह मामला, चुनावी साल में सिनेमा और पॉलिटिक्स के टकराव की बड़ी मिसाल बन गया है। सवाल यही है—आखिर विजय की एक फिल्म इतना बड़ा राजनीतिक मुद्दा क्यों बन गई?
‘जन नायकन’ की रिलीज 9 जनवरी को तय थी, लेकिन सेंट्रल बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टिफिकेशन से सर्टिफिकेट न मिलने के कारण फिल्म अटक गई।
फिल्म के निर्माताओं ने पहले मद्रास हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया, जहां एक सिंगल जज ने सेंसर बोर्ड को सर्टिफिकेट देने का आदेश दिया।
लेकिन बाद में हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच ने उस आदेश पर रोक लगा दी।
इसके बाद मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, जहां निर्माताओं को बड़ा झटका लगा। सुप्रीम कोर्ट ने फिल्म को राहत देने से इनकार करते हुए मामला वापस मद्रास हाई कोर्ट भेज दिया है और निर्देश दिया है कि 20 जनवरी तक इस पर फैसला किया जाए।
जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस एजी मसीह की बेंच ने साफ कहा कि निर्माता राहत के लिए मद्रास हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच से संपर्क करें।
फिल्म के प्रोड्यूसर केवीएन प्रोडक्शन की ओर से सीनियर एडवोकेट मुकुल रोहतगी ने दलील दी कि रिलीज में देरी से करीब 500 करोड़ रुपये का नुकसान हो सकता है।
लेकिन सवाल सिर्फ पैसों का नहीं है। ‘जन नायकन’ को लेकर आरोप है कि फिल्म में कुछ ऐसे सीन और संवाद हैं जो अल्पसंख्यक समुदाय की भावनाओं को ठेस पहुंचा सकते हैं। यही वजह है कि सेंसर बोर्ड ने आपत्तियां जताईं।
इस विवाद को और बड़ा बनाता है थलपति विजय का राजनीतिक भविष्य। विजय ने अपनी पार्टी तमिलगा वेत्री कझगम लॉन्च कर दी है और ‘जन नायकन’ को उन्होंने अपनी आखिरी फिल्म बताया है। ऐसे में चुनावी साल में इस फिल्म की रिलीज को उनके समर्थक राजनीतिक साजिश बता रहे हैं।
तमिलनाडु की राजनीति में दशकों से डीएमके और अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम का दबदबा रहा है। लेकिन विजय खुद को न तो किसी राजनीतिक विरासत से जोड़ते हैं और न ही पारंपरिक द्रविड़ राजनीति से। उनका फोकस है—गवर्नेंस, करप्शन और युवाओं के मुद्दे। यही बात उन्हें अलग बनाती है।
अगर 20 जनवरी को मद्रास हाई कोर्ट से फिल्म को राहत मिलती है, तो मेकर्स इसे 26 जनवरी, यानी गणतंत्र दिवस के मौके पर रिलीज करने की तैयारी में हैं। हालांकि रिलीज टलने से पहले फिल्म की एडवांस बुकिंग में करीब 100 करोड़ रुपये की प्री-सेल्स हो चुकी थीं, जो अब रद्द हो चुकी हैं।
तो साफ है—‘जन नायकन’ सिर्फ थलपति विजय की आखिरी फिल्म नहीं, बल्कि तमिलनाडु की राजनीति में एक बड़े बदलाव का ट्रेलर बन चुकी है। अब सबकी नजरें 20 जनवरी पर हैं—जहां ये तय होगा कि फिल्म पहले पर्दे पर आएगी या सियासी मैदान में।
