प्रयागराज/उत्तर प्रदेश, 04 फरवरी 2026
उत्तर प्रदेश के प्रयागराज स्थित इलाहाबाद विश्वविद्यालय परिसर में यूजीसी नियमावली-2026 (UGC Regulations-2026) को लेकर मंगलवार को जबरदस्त बवाल हो गया। विश्वविद्यालय के बरगद लॉन में आयोजित एक शैक्षणिक परिचर्चा के दौरान छात्रों के दो गुट आमने-सामने आ गए और देखते ही देखते विवाद मारपीट में बदल गया। घटना में दोनों पक्षों के कई छात्र-छात्राएं घायल हो गए। इस पूरी घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।
जानकारी के अनुसार, दिशा छात्र संगठन की ओर से बरगद लॉन में यूजीसी नियमावली-2026 से जुड़े मुद्दों पर परिचर्चा आयोजित की जा रही थी। इसी दौरान 30 से 40 छात्रों का एक दूसरा गुट वहां पहुंच गया, जिसके बाद दोनों पक्षों के बीच पहले बहस और फिर हाथापाई शुरू हो गई।
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, दोनों ओर से जमकर गुत्थमगुत्था और मारपीट हुई। आरोप है कि इस दौरान जातिसूचक गालियां भी दी गईं और कुछ छात्राओं के साथ बदसलूकी की गई। झड़प में दोनों गुटों के कई छात्र घायल हुए हैं।
बताया जा रहा है कि एक बीए तृतीय वर्ष के छात्र को दांत से काटकर घायल कर दिया गया, जिससे वह लहूलुहान हो गया। वहीं दूसरे पक्ष के भी कई छात्र-छात्राओं को चोटें आई हैं।
घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और काफी मशक्कत के बाद स्थिति को नियंत्रित किया। विश्वविद्यालय प्रशासन ने भी पूरे मामले की जांच शुरू कर दी है।
इस मामले में दोनों छात्र गुटों की ओर से चीफ प्रॉक्टर को लिखित शिकायत दी गई है। प्रॉक्टोरियल बोर्ड मामले की जांच कर रहा है। वहीं दोनों पक्षों ने थाना कर्नलगंज में भी तहरीर दी है। पुलिस का कहना है कि तहरीर के आधार पर जांच की जा रही है, फिलहाल मुकदमा दर्ज नहीं किया गया है।
दिशा छात्र संगठन का आरोप
दिशा छात्र संगठन के संयोजक चंद्रप्रकाश ने आरोप लगाया कि संगठन के सदस्य उच्च शिक्षा से जुड़े अहम मुद्दों पर शांतिपूर्ण परिचर्चा कर रहे थे। इसी दौरान दूसरे गुट के युवकों ने कार्यक्रम स्थल पर पहुंचकर गाली-गलौज और मारपीट शुरू कर दी। संगठन का दावा है कि छात्रों और छात्राओं को जातिसूचक गालियां दी गईं, महिलाओं के साथ बदसलूकी की गई और जानबूझकर माहौल खराब किया गया।
संगठन का यह भी आरोप है कि हमलावरों का रवैया बेहद आक्रामक था और वे लगातार छात्रों को धमकाते रहे। बाद में बड़ी संख्या में छात्र एकत्र होने पर हमलावर मौके से भाग निकले।
दूसरे गुट का पलटवार
वहीं दूसरे छात्र गुट का कहना है कि परिचर्चा के दौरान आपत्तिजनक नारे लगाए जा रहे थे, जिसका विरोध करने पर संगठन से जुड़े छात्रों ने उन पर हमला कर दिया।
बिना अनुमति के कार्यक्रम का आरोप
विश्वविद्यालय की जनसंपर्क अधिकारी प्रो. जया कपूर ने बताया कि बरगद लॉन में यूजीसी नियमावली-2026 विषय पर बिना पूर्व अनुमति के कार्यक्रम और नारेबाजी की जा रही थी। जब अन्य छात्रों ने इसका विरोध किया, तो दोनों गुटों के बीच झड़प हो गई।
उन्होंने कहा कि जिस छात्र को दांत से काटा गया था, उसे चिकित्सकीय सहायता उपलब्ध कराई गई है। शिकायतों के आधार पर विधिक प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। विश्वविद्यालय परिसर में किसी भी प्रकार की हिंसा, अभद्र भाषा, जातिसूचक टिप्पणी या महिलाओं के प्रति दुर्व्यवहार को किसी भी हाल में स्वीकार नहीं किया जाएगा। जांच के बाद दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
सीएमपी डिग्री कॉलेज के विधि संकाय में भी विवाद
इसी दिन प्रयागराज के सीएमपी डिग्री कॉलेज के विधि संकाय परिसर में भी दो गुटों के बीच मारपीट की घटना सामने आई। छात्रों ने आरोप लगाया कि एक व्हाट्सएप ग्रुप में एससी-एसटी और ओबीसी समुदाय के खिलाफ जातिसूचक टिप्पणियां की गईं।
छात्रों का आरोप है कि शिकायत करने पर एक प्रोफेसर ने कार्रवाई करने के बजाय शिकायतकर्ताओं को ही धमकाया और मामला दबाने की कोशिश की। छात्रों ने प्रशासन को ज्ञापन सौंपकर दोषी छात्रों के निष्कासन और संबंधित प्रोफेसर को निलंबित करने की मांग की है।
दिल्ली यूनिवर्सिटी में भी प्रदर्शन
इस बीच, उच्च शिक्षा संस्थानों में जातिगत भेदभाव के खिलाफ लाए गए यूजीसी इक्विटी रेगुलेशंस-2026 पर सुप्रीम कोर्ट द्वारा लगाए गए स्टे के विरोध में मंगलवार को दिल्ली यूनिवर्सिटी की लॉ फैकल्टी के बाहर विभिन्न छात्र संगठनों ने प्रदर्शन किया।
छात्रों का कहना है कि एससी, एसटी, ओबीसी और अन्य हाशिए के समुदायों के छात्रों के साथ आज भी देशभर के कैंपसों में भेदभाव होता है और ऐसे में इक्विटी रेगुलेशंस पर रोक न्याय के खिलाफ है।
प्रदर्शन में शामिल छात्र नीतीश कुमार ने कहा कि यूजीसी इक्विटी रेगुलेशंस कोई अचानक लिया गया फैसला नहीं था, बल्कि यह वर्षों के सामाजिक और कानूनी संघर्ष का परिणाम है। उन्होंने रोहित वेमुला और पायल सरवगी जैसे मामलों का जिक्र करते हुए कहा कि इन्हीं घटनाओं के बाद उच्च शिक्षा संस्थानों में जातिगत भेदभाव रोकने के लिए सख्त कानून की मांग तेज हुई थी।
उन्होंने बताया कि यूजीसी द्वारा तैयार किए गए इक्विटी रेगुलेशंस में कुछ कमियां जरूर थीं, लेकिन इसके बावजूद यह एक अहम और जरूरी कदम था। छात्रों का मानना है कि आगे चलकर इन्हें रोहित एक्ट की तर्ज पर और मजबूत किया जा सकता है।
छात्रों ने आरोप लगाया कि कुछ सवर्ण और जातिवादी मानसिकता से जुड़े समूहों के दबाव में इन गाइडलाइंस पर रोक लगाई गई, जो हाशिए के समुदायों के छात्रों के लिए बड़ा झटका है।
छात्रा सावी ने कहा कि यूजीसी के अपने आंकड़े बताते हैं कि उच्च शिक्षा संस्थानों में कास्ट बेस्ड डिस्क्रिमिनेशन से जुड़ी शिकायतों में लगातार बढ़ोतरी हुई है। उन्होंने कहा कि भेदभाव सिर्फ कागजों तक सीमित नहीं है, बल्कि जमीनी हकीकत है।
प्रदर्शन के अंत में छात्र संगठनों ने मांग की कि यूजीसी इक्विटी रेगुलेशंस से सुप्रीम कोर्ट का स्टे तुरंत हटाया जाए, इन्हें रोहित एक्ट की तर्ज पर मजबूत किया जाए, इक्विटी और जांच समितियों को नॉमिनेटेड की बजाय इलेक्टेड बनाया जाए, एससी-एसटी-ओबीसी और छात्रों का बहुमत प्रतिनिधित्व सुनिश्चित किया जाए और आईआईटी-आईआईएम सहित सभी उच्च शिक्षा संस्थानों को इसके दायरे में लाया जाए।
छात्र संगठनों ने चेतावनी दी कि मांगें पूरी नहीं होने तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।
