नई दिल्ली, 05 फरवरी 2026
देश की राजधानी दिल्ली से सामने आ रही लापता लोगों की बढ़ती संख्या ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
साल 2026 की शुरुआत में ही राजधानी से महज़ 15 दिनों के भीतर 800 से ज्यादा लोगों के लापता होने की शिकायत दर्ज की गई है। इनमें सबसे बड़ी संख्या महिलाओं, लड़कियों और बच्चों की बताई जा रही है।
दिल्ली पुलिस के आंकड़ों के मुताबिक, इन मामलों में 509 महिलाएं और लड़कियां लापता हैं, जबकि 298 पुरुषों के लापता होने की रिपोर्ट दर्ज की गई है। सबसे चिंताजनक बात यह है कि इन मामलों में 191 नाबालिग बच्चे भी शामिल हैं।
औसतन देखा जाए तो राजधानी दिल्ली में हर दिन करीब 54 लोग लापता हो रहे हैं। पुलिस अब तक 235 लोगों को खोजने में सफल रही है, लेकिन 570 से अधिक लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं।
इसी गंभीर स्थिति के बीच दिल्ली के बुराड़ी इलाके से एक मामला सामने आया है, जिसने व्यवस्था की सुस्ती को उजागर कर दिया है।
19 वर्षीय वसीम रज़ा, जिसे संगीत का शौक था और जो गायक बनना चाहता था, 28 दिसंबर की सुबह अपने घर से अचानक लापता हो गया। बताया गया है कि वह अपना हारमोनियम साथ लेकर निकला था। परिजनों का आरोप है कि अब तक इलाके की सीसीटीवी फुटेज की ठीक से जांच तक नहीं की गई।
परिवार का कहना है कि शिकायत के बावजूद उन्हें लगातार केवल आश्वासन ही मिल रहा है। उनका सवाल है कि क्या बच्चों की तलाश की रफ्तार अब सिस्टम की फाइलों से भी धीमी हो गई है।
अगर लंबे समय के आंकड़ों पर नजर डालें तो हालात और भी चिंताजनक दिखाई देते हैं। वर्ष 2016 से 2026 के बीच दिल्ली में करीब 2 लाख 32 हजार लोगों के लापता होने के मामले दर्ज किए गए हैं। इनमें से बड़ी संख्या में लोगों को खोज लिया गया, लेकिन करीब 52 हजार मामले अब भी अनसुलझे बने हुए हैं।
सबसे गंभीर स्थिति बच्चों को लेकर है। बीते 11 वर्षों में 5,559 बच्चे लापता हुए, जिनमें से सैकड़ों बच्चों का आज तक कोई सुराग नहीं मिल पाया है।
लापता लोगों की जानकारी और उनकी स्थिति जानने के लिए दिल्ली पुलिस की ओर से ZIPNET वेबसाइट उपलब्ध कराई गई है, जहां आम नागरिक एफआईआर और केस स्टेटस ऑनलाइन देख सकते हैं।
हालांकि असली सवाल सिर्फ वेबसाइट या आंकड़ों का नहीं है। सवाल यह है कि क्या दिल्ली अपने ही बच्चों और नागरिकों के लिए सुरक्षित रह गई है, या फिर राजधानी धीरे-धीरे एक ऐसी भूलभुलैया बनती जा रही है, जहां से लौट पाना हर किसी के लिए संभव नहीं रह गया है।
