09 फरवरी 2026
भारत के संविधान और राष्ट्रवाद की परिभाषा को लेकर एक बार फिर सियासी बहस तेज हो गई है। AIMIM प्रमुख और हैदराबाद के सांसद असदुद्दीन ओवैसी के हालिया बयान के बाद यह मुद्दा चर्चा के केंद्र में आ गया है।
तेलंगाना के सदाशिवपेट में आयोजित एक जनसभा को संबोधित करते हुए ओवैसी ने कहा कि भारतीय संविधान की शुरुआत “वी द पीपल ऑफ इंडिया”, यानी हम भारत के लोग से होती है, न कि किसी धार्मिक या प्रतीकात्मक नाम से। उनके मुताबिक, संविधान की सबसे बड़ी पहचान यही है कि वह देश की जनता को सर्वोच्च मानता है।
ओवैसी ने कहा कि भारतीय संविधान की बुनियाद धर्मनिरपेक्ष और समावेशी विचारों पर टिकी हुई है। उन्होंने याद दिलाया कि संविधान की प्रस्तावना में न्याय, स्वतंत्रता, समानता और भाईचारे जैसे मूल्यों को साफ तौर पर रखा गया है। उनका कहना था कि देशभक्ति को किसी एक धर्म या धार्मिक पहचान से जोड़ना संविधान की मूल भावना के खिलाफ है।
अपने संबोधन के दौरान ओवैसी ने संसद में वंदे मातरम की 150वीं वर्षगांठ पर हुई बहस का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि उस समय उन्होंने संसद में यह बात रखी थी कि 24 जनवरी 1950 को भारत ने खुद को संविधान दिया था और उसकी शुरुआत “वी द पीपल” से होती है।
उन्होंने यह भी कहा कि संविधान किसी धार्मिक प्रतीक या नाम से शुरू नहीं होता, बल्कि वह जनता की सर्वोच्चता को मान्यता देता है।
ओवैसी ने संविधान के अनुच्छेद 25 का हवाला देते हुए कहा कि यह हर नागरिक को अपने धर्म को मानने, अपनाने और उसका पालन करने की पूरी आज़ादी देता है। उनके अनुसार, यही भारत की असली संवैधानिक ताकत है, जो देश को विविधताओं के बीच एकजुट बनाए रखती है।
देशभक्ति और धर्म को जोड़ने पर आपत्ति जताते हुए ओवैसी ने कहा कि अगर राष्ट्र प्रेम को केवल धर्म के दायरे में बांध दिया गया, तो इससे आज़ादी की लड़ाई में योगदान देने वाले कई नेताओं के बलिदान को कमतर करके देखा जाएगा। उन्होंने बहादुर शाह ज़फर और यूसुफ मेहरअली का उदाहरण देते हुए कहा कि इन नेताओं ने देश के लिए महत्वपूर्ण योगदान दिया, लेकिन उनकी पहचान को किसी एक धार्मिक सोच तक सीमित नहीं किया जा सकता।
उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यह मान लेना कि केवल धर्म ही देशभक्ति है, उन्हें स्वीकार नहीं है।
इस दौरान ओवैसी ने करीमनगर में आयोजित एक अलग जनसभा में भाजपा और आरएसएस पर भी निशाना साधा। उन्होंने रूस से तेल खरीद को लेकर भारत पर अमेरिका की चेतावनी का जिक्र करते हुए सवाल उठाया कि जब भारत के आर्थिक फैसलों पर विदेशी दबाव बनाया जा रहा था, तब भाजपा का राष्ट्रवाद कहां था।
ओवैसी का आरोप था कि भारत ने रूस से तेल का आयात कम किया है, जबकि चीन ने सस्ते रूसी तेल का लाभ उठाया है।
उन्होंने करीमनगर शहर की जमीनी समस्याओं पर भी बात की। ओवैसी ने कहा कि स्मार्ट सिटी में शामिल होने के बावजूद शहर में सड़क, जल निकासी और बिजली जैसी बुनियादी सुविधाएं कमजोर बनी हुई हैं। उन्होंने दावा किया कि खास तौर पर मुस्लिम इलाकों की लगातार अनदेखी की जा रही है।
इसके साथ ही उन्होंने आरोप लगाया कि स्थानीय विधायक के निर्देश पर कई घरों को रातों-रात गिरा दिया गया।
अपने भाषण के अंत में ओवैसी ने मतदाताओं से अपील की कि वे ऐसे उम्मीदवारों का समर्थन न करें, जो बाद में जनता के भरोसे को तोड़ देते हैं। उनका कहना था कि करीमनगर में गलत राजनीतिक फैसले अंततः भाजपा को फायदा पहुंचाएंगे।
ओवैसी ने लोगों से सोच-समझकर और अपने अधिकारों को ध्यान में रखते हुए वोट देने की अपील के साथ अपना संबोधन समाप्त किया।
