30 जनवरी 2026
यूरोपीय संघ (EU) के 27 देशों के विदेश मंत्रियों ने एक ऐतिहासिक निर्णय लिया है। उन्होंने ईरान की Islamic Revolutionary Guard Corps (IRGC) को आधिकारिक तौर पर आतंकवादी संगठन घोषित कर दिया। यह कदम हाल ही में ईरान में हुए व्यापक विरोध प्रदर्शनों और सुरक्षा बलों की बेरहम कार्रवाई के जवाब में उठाया गया है।
EU की विदेश नीति प्रमुख काजा कल्लास ने कहा, “यह निर्णायक कदम इसलिए जरूरी था क्योंकि दमन का जवाब देना हर लोकतांत्रिक समाज की ज़िम्मेदारी है। जो शासन अपनी ही जनता पर हज़ारों घातक हमले करता है, उसका पतन निश्चित है।”
इस फैसले के तहत IRGC को अल-कायदा और ISIS जैसी आतंकी संगठनों की श्रेणी में रखा गया है। अब किसी भी EU देश में IRGC को समर्थन देना, उसके साथ साझेदारी करना या वित्तीय सहायता प्रदान करना अपराध माना जाएगा।
क़ानूनी तौर पर इसका असर गहरा होगा। अब EU के सदस्य देशों के लिए IRGC के किसी भी सदस्य पर मुक़दमा चलाना आसान होगा। पहले यह साबित करना ज़रूरी था कि किसी व्यक्ति ने आतंकी साजिश की है, लेकिन अब संगठन से जुड़ाव होना ही पर्याप्त होगा। इसके अलावा IRGC की संपत्तियों को फ्रीज़ करना, आर्थिक लेन-देन रोकना और यूरोपोल जैसी एजेंसियों के बीच जानकारी साझा करना भी सरल हो जाएगा।
साथ ही EU ने ईरान के 15 अधिकारियों और छह संस्थाओं पर नए प्रतिबंध लगाए हैं, जिनमें IRGC के वरिष्ठ कमांडर भी शामिल हैं। ये प्रतिबंध मानवाधिकार उल्लंघन, सेंसरशिप और प्रचार में भूमिका के आधार पर लगाए गए हैं। IRGC से जुड़े ड्रोन और मिसाइल प्रोग्राम में इस्तेमाल होने वाले सामान के निर्यात पर भी रोक बढ़ा दी गई है।
ईरान की सरकार ने इस फैसले पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने इसे “बड़ी रणनीतिक गलती” बताया और चेतावनी दी कि यह क्षेत्र में तनाव को और भड़का सकता है। उनका कहना है कि यूरोप अमेरिका और इज़रायल के दबाव में आकर यह कदम उठा रहा है।
विश्लेषकों के अनुसार, यह फैसला न केवल कूटनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि यूरोप-ईरान संबंधों और पूरे मध्यपूर्व में शक्ति संतुलन के लिए भी एक अहम मोड़ साबित हो सकता है।
