गुरुग्राम, 10 फरवरी 2026।
- गुरुग्राम में चौथी बार लगने जा रहा है राष्ट्रीय स्तर का सरस मेला, 10 से 26 फरवरी तक किया जाएगा आयोजित
- सैक्टर-29 स्थित लेजरवैली ग्राउंड में लगेगा मेला, देश के विभिन्न राज्यों के 450 से अधिक स्टॉल बनेंगे मेले का हिस्सा
- ग्रामीण शिल्प व महिला सशक्तिकरण का दिखेगा अद्भुत संगम : स्वाति शर्मा, संयुक्त सचिव, केन्द्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय
- ग्रामीण शिल्पकारों के उत्साहवर्धन के लिए अधिक से अधिक संख्या में मेले में पहुंचने का डीसी अजय कुमार ने किया आह्वान
- निःशुल्क रहेगा प्रवेश, प्रातः 11 बजे से रात्रि 9.30 तक लगेगा सरस मेला
देश के ग्रामीण अंचल की स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक सशक्त पहल के तहत, भारतीय संस्कृति की झलक लिए विविध उत्पादों को गुरुग्रामवासियों तक सहज और सरल रूप में पहुँचाने के उद्देश्य से राष्ट्रीय ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज संस्थान के सहयोग से चौथी बार राष्ट्रीय स्तर के सरस आजीविका मेले का आयोजन किया जा रहा है।
गुरुग्राम जिला में आज से शुरू हुआ यह मेला 26 फरवरी तक सैक्टर-29 स्थित लेजरवैली ग्राउंड में लगाया जाएगा जहां पर देश के विभिन्न राज्यों से आई स्वयं सहायता समूह की 900 दीदी अपनी कला एवं संस्कृति से जुड़े हस्तनिर्मित उत्पादों की 450 स्टॉल लगाएंगी। मेले में आमजन के लिए प्रवेश बिल्कुल निःशुल्क रखा गया है। मेला प्रतिदिन प्रातः 11 बजे से लेकर रात्रि 9ः30 बजे तक खुला रहेगा।
सरस आजीविका मेले को लेकर सोमवार को केन्द्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय की संयुक्त सचिव स्वाति शर्मा ने गुरुग्राम के
पीडब्ल्यूडी रेस्ट हाउस में आयोजित प्रेस वार्ता में सरस मेले की रूपरेखा के बारे में विस्तार से बताया। इस दौरान प्रेस वार्ता में ग्रामीण विकास मंत्रालय से निदेशक माेलिश्री व गुरुग्राम के डीसी अजय कुमार तथा डीसीपी डॉ अर्पित जैन भी उपस्थित रहे।
संयुक्त सचिव स्वाति शर्मा ने प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए कहा कि दीनदयाल अंत्योदय योजना-राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन’ के तहत वर्तमान में देश की 10 करोड़ से ज्यादा महिलाएं संगठित हैं। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी द्वारा 3 करोड़ लखपति दीदी बनाने का लक्ष्य दिया गया था जिसमें से दिसंबर 2025 तक 2.9 करोड़ दीदी लखपति बन चुकी हैं, और आने वाले कुछ ही समय में इसे पूरा कर लिया जाएगा।
स्वाति शर्मा ने कहा कि स्वयं सहायता समूह की महिलाओं की ईमानदारी और आर्थिक उन्नति के कारण बैंकिंग सेक्टर में उनका विश्वास बढ़ा है। उन्होंने साझा किया कि विभिन्न राज्यों में स्वयं सहायता समूहों का एनपीए (नॉन-परफॉर्मिंग एसेट) घटकर 2 प्रतिशत से भी कम रह गया है, जो इस बात का प्रमाण है कि ग्रामीण महिलाएं अपने ऋण का भुगतान समय पर कर रही हैं और वित्तीय प्रबंधन में कुशल हो रही हैं।
नॉलेज पवेलियन: सिर्फ बाजार नहीं, कौशल विकास का केंद्र
इस बार सरस मेले का एक मुख्य आकर्षण ‘नॉलेज एंड लर्निंग पवेलियन’ है। यहाँ केवल उत्पादों की बिक्री नहीं हो रही, बल्कि महिला उद्यमियों के लिए प्रतिदिन विशेष कार्यशालाएं आयोजित की जा रही हैं। इन सत्रों में महिलाओं को पैकेजिंग, ब्रांडिंग, बिजनेस प्रपोजल तैयार करने और सोशल मीडिया मार्केटिंग के गुर सिखाए जा रहे हैं। विशेष रूप से इस बार ‘लॉजिस्टिक्स और ट्रांसपोर्टेशन मैनेजमेंट’ पर सघन प्रशिक्षण सत्र आयोजित किए जा रहे हैं। इसका उद्देश्य ग्रामीण महिलाओं को यह सिखाना है कि वे अपने उत्पादों को कम लागत में और बिना नुकसान के देश-विदेश के बाजारों तक कैसे पहुँचा सकती हैं। इसके अलावा, ई-कॉमर्स कंपनियों के साथ टाइअप के माध्यम से ‘ई-सरस’ पोर्टल के प्रति भी जागरूकता बढ़ाई जा रही है, ताकि मेले के बाद भी इन महिलाओं की बिक्री जारी रह सके।
लाइव डेमो और पारंपरिक कला का जीवंत प्रदर्शन
मेले में आने वाले दर्शकों के लिए ‘डेमो एवं लाइव लर्निंग एरिया’ एक विशेष अनुभव साबित हो रहा है। यहाँ लोग केवल सामान खरीद ही नहीं रहे, बल्कि उन्हें बनते हुए भी देख रहे हैं। मिट्टी के बर्तनों को चाक पर आकार देते कुशल शिल्पकार बच्चों और युवाओं को अपनी ओर आकर्षित कर रहे हैं। वहीं पारंपरिक सुई-धागे और शीशों के काम से कपड़े पर उकेरी जाने वाली कला का सीधा प्रदर्शन किया जा रहा है। प्राकृतिक रेशों और बांस से बनाई जाने वाली ईको-फ्रेंडली टोकरियों और घरेलू सामानों का लाइव डेमो सतत जीवन शैली की प्रेरणा दे रहा है।
मेले में एक विशाल फूड कोर्ट स्थापित किया गया है, जहाँ विभिन्न राज्यों की महिलाओं ने अपने क्षेत्रीय स्वादों के साथ ‘लाइव फूड स्टॉल’ लगाए हैं। यहाँ राजस्थान के दाल-बाटी-चूरमा, पंजाब के मक्के की रोटी और सरसों का साग, दक्षिण भारत के डोसा-इ़डली और बंगाल के संदेश जैसे व्यंजनों का स्वाद लिया जा सकता है। खास बात यह है कि ये सभी व्यंजन पारंपरिक तरीके से शुद्ध मसालों का उपयोग करके बनाए जा रहे हैं।
बच्चों और बुजुर्गों के लिए विशेष सुविधाएं
स्वाति शर्मा ने बताया कि मेला प्रशासन ने दर्शकों की सुविधा का विशेष ध्यान रखा है। छोटे बच्चों के लिए एक भव्य ‘किड्स ज़ोन’ बनाया गया है, जहां कला गतिविधियों और कहानी सुनाने के सत्रों के माध्यम से उन्हें भारत की ग्रामीण संस्कृति से परिचित कराया जा रहा है। बुजुर्गों और महिलाओं के विश्राम के लिए जगह-जगह विश्राम स्थल बनाए गए हैं। मनोरंजन के लिए प्रतिदिन शाम को विभिन्न राज्यों के सांस्कृतिक दलों द्वारा लोक नृत्य और संगीत की प्रस्तुतियां दी जा रही हैं, जो मेले के माहौल को और भी उत्सवपूर्ण बना देती हैं।
ग्रामीण शिल्पकारों के उत्साहवर्धन के लिए अधिक से अधिक संख्या में मेले में पहुंचने का डीसी अजय कुमार ने किया आह्वान
डीसी अजय कुमार ने नागरिकों से अपील की कि वे बड़ी संख्या में इस मेले में पहुंचकर ग्रामीण अंचलों से आए शिल्पकारों एवं स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं का उत्साहवर्धन करें। उन्होंने कहा कि यह मेला केवल खरीदारी का मंच भर नहीं है, बल्कि यह भारत की सांस्कृतिक विविधता, पारंपरिक कला-शिल्प और आत्मनिर्भर बनती ग्रामीण नारी शक्ति का जीवंत उत्सव है। ऐसे आयोजनों से ग्रामीण महिलाओं को अपनी प्रतिभा और हुनर को पहचान दिलाने का अवसर मिलता है, साथ ही उनके आर्थिक सशक्तिकरण की राह भी मजबूत होती है।
प्रेस वार्ता में 3 सफल महिला उद्यमियों ने अपनी सफलता की कहानी भी सांझा की। हरियाणा से सरला, हिमाचल प्रदेश से तारा चौहान, उत्तर प्रदेश से दिलकश ने सरस मेले व राष्ट्रीय ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज संस्थान द्वारा किए गए महत्वपूर्ण प्रयासों से उनके जीवन में आए महत्वपूर्ण बदलाव पर भी प्रकाश डाला।
इस अवसर पर राष्ट्रीय ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज संस्थान के सहायक निदेशक चिरंजी लाल कटारिया, सीईओ जिला परिषद सुमित कुमार सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।
