असम ,10 फरवरी 2026
असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा से जुड़े एक विवादित वीडियो का मामला अब सीधे सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। इस वीडियो को लेकर देश की राजनीति में जबरदस्त हलचल मची हुई है।
मामले में सीपीआई और सीपीआई-एम नेताओं की ओर से याचिका दाखिल की गई है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने एक विशेष समुदाय को निशाना बनाकर नफरत फैलाने वाला संदेश दिया है। याचिकाकर्ताओं ने उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज करने और पूरे मामले की जांच के लिए एक विशेष जांच टीम, यानी एसआईटी बनाने की मांग की है।
आज सुप्रीम कोर्ट में इस मामले का विशेष उल्लेख किया गया। याचिकाकर्ताओं के वकील निजाम पाशा ने तत्काल सुनवाई की मांग की। इस पर भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि जब चुनाव पास आते हैं, तो राजनीतिक लड़ाइयों का एक हिस्सा अदालतों तक पहुंच जाता है। हालांकि उन्होंने मामले पर सुनवाई का भरोसा भी दिया।
दरअसल, विवाद 7 फरवरी को उस वक्त शुरू हुआ, जब असम बीजेपी के आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट से एक वीडियो पोस्ट किया गया। वीडियो में मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा हाथ में राइफल लिए नजर आ रहे थे। इसके साथ एआई से तैयार किए गए दृश्य जोड़े गए थे, जिनमें दाढ़ी और टोपी पहने लोगों पर गोली चलती दिखाई गई थी। वीडियो में “नो मर्सी” और “फॉरेनर फ्री असम” जैसे शब्द भी लिखे थे।
वीडियो सामने आते ही विपक्ष ने इसे सांप्रदायिक और हिंसा भड़काने वाला करार दिया। भारी विरोध के बाद यह वीडियो हटा दिया गया।
इस पूरे मामले में 12 लोगों ने भी एक अलग जनहित याचिका दायर की है, जिनमें पूर्व उपराज्यपाल नजीब जंग और सामाजिक कार्यकर्ता शामिल हैं। याचिका में कहा गया है कि मुख्यमंत्री, मंत्री और संवैधानिक पदों पर बैठे लोग लगातार ऐसे बयान दे रहे हैं, जो मुस्लिम समुदाय को निशाना बनाते हैं।
इधर, हैदराबाद के सांसद और एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने भी हिमंत बिस्वा सरमा के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई है। ओवैसी ने इस वीडियो को नरसंहार को बढ़ावा देने वाला नफरती कंटेंट बताया है और सख्त कार्रवाई की मांग की है।
वहीं, असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने अपने ऊपर लगे आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि उन्हें इस वीडियो की जानकारी नहीं थी। उन्होंने यह भी कहा कि अगर उनके खिलाफ केस दर्ज हुआ है तो वे गिरफ्तारी के लिए तैयार हैं, लेकिन अवैध घुसपैठ के खिलाफ अपना रुख नहीं बदलेंगे।
फिलहाल सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में सुनवाई के संकेत दे दिए हैं। अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि अदालत इस संवेदनशील और राजनीतिक रूप से अहम विवाद पर आगे क्या रुख अपनाती है।
