India–EU FTA पर सियासत गरम, जयराम रमेश के आरोपों पर पीयूष गोयल का करारा जवाब
31 जनवरी 2026
भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच हुए फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) को लेकर देश की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। कांग्रेस नेता जयराम रमेश द्वारा उठाए गए सवालों और आलोचनाओं पर केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने सख्त और आक्रामक अंदाज़ में प्रतिक्रिया दी है।
पीयूष गोयल ने जयराम रमेश के आरोपों को “अंगूर खट्टे हैं” वाली सोच करार देते हुए कहा कि जो लोग सत्ता में रहते हुए इस अहम समझौते को आगे नहीं बढ़ा सके, वे अब इसे कमजोर बताने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि वर्ष 2013 से 2022 तक भारत-ईयू FTA वार्ता रुकी रहने से देश को रोजगार, निवेश और विकास के बड़े अवसर गंवाने पड़े।
दरअसल, जयराम रमेश ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट के जरिए इस समझौते को जरूरत से ज्यादा बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया गया कदम बताया था। उनका दावा था कि इस FTA से भारत का व्यापार घाटा बढ़ सकता है और यूरोपीय संघ से आयात में तेजी आएगी। इसके साथ ही उन्होंने कार्बन बॉर्डर एडजस्टमेंट मैकेनिज़्म (CBAM), ऑटोमोबाइल सेक्टर, बौद्धिक संपदा अधिकार और स्टील-एल्यूमिनियम जैसे क्षेत्रों पर संभावित खतरे की आशंका जताई थी।
इन सभी आरोपों पर जवाब देते हुए पीयूष गोयल ने कहा कि यह समझौता किसी तरह का प्रचार या हाइप नहीं है, बल्कि यह दुनिया के सबसे बड़े आर्थिक समझौतों में से एक है। उनके अनुसार, यह डील लगभग 25 ट्रिलियन डॉलर की संयुक्त अर्थव्यवस्था, 11 ट्रिलियन डॉलर के वैश्विक व्यापार और करीब दो अरब लोगों के बाजार को आपस में जोड़ती है।
गोयल ने स्पष्ट किया कि सरकार ने CBAM जैसे संवेदनशील और जटिल मुद्दों पर यूरोपीय संघ के साथ गंभीर और लगातार बातचीत की है तथा समाधान की दिशा में ठोस रास्ते भी निकाले गए हैं। उन्होंने कहा कि सरकार टकराव की नीति नहीं, बल्कि सहयोग और संवाद के जरिए भारत के आर्थिक हितों की रक्षा कर रही है।
ऑटोमोबाइल सेक्टर को लेकर उठी चिंताओं पर गोयल ने कहा कि भारत द्वारा दी गई रियायतें सीमित कोटे तक और केवल प्रीमियम श्रेणी की गाड़ियों तक सीमित हैं। इलेक्ट्रिक वाहनों पर आयात शुल्क में कटौती भी तुरंत लागू नहीं की जाएगी, बल्कि इसके लिए एक समय सीमा रखी गई है, ताकि देश की घरेलू ऑटो और ईवी इंडस्ट्री खुद को प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार कर सके।
केंद्रीय मंत्री ने कांग्रेस पर पुराने व्यापार समझौतों का हवाला देते हुए भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार के दौरान जापान और दक्षिण कोरिया के साथ किए गए FTA भारत के लिए लाभकारी साबित नहीं हुए, क्योंकि इन देशों के साथ भारत का निर्यात अपेक्षित रूप से नहीं बढ़ा, जबकि भारत में उनका आयात तेजी से बढ़ गया।
पीयूष गोयल ने यह आरोप भी लगाया कि कांग्रेस चीन के साथ व्यापार समझौतों और RCEP जैसे मंचों के माध्यम से भारत के आर्थिक हितों को जोखिम में डालने के लिए तैयार थी।
उन्होंने भरोसा दिलाया कि भारत-यूरोपीय संघ FTA एक संतुलित और भारत के हितों को प्राथमिकता देने वाला समझौता है। इसके तहत भारत से होने वाले लगभग 99 प्रतिशत निर्यात पर शून्य शुल्क का रास्ता खुलेगा, जिससे भारतीय उद्योगों और निर्यातकों को बड़े स्तर पर लाभ मिलने की उम्मीद है।
भारत और यूरोपीय संघ के बीच फ्री ट्रेड एग्रीमेंट पर बातचीत की शुरुआत वर्ष 2007 में हुई थी। वर्ष 2013 में यह प्रक्रिया ठप हो गई थी, जिसे जून 2022 में फिर से शुरू किया गया। लगभग 18 वर्षों के लंबे अंतराल और बातचीत के बाद अब जाकर इस ऐतिहासिक व्यापार समझौते को अंतिम रूप दिया गया है।
