30 जनवरी 2026
आज हम उस वैश्विक पहल पर नजर डालते हैं, जो आने वाले समय में टेक्नोलॉजी और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की दिशा तय करने वाली है — और जिसमें भारत को अमेरिका ने सीधे आमंत्रित किया है।
अमेरिका अब अपनी तकनीकी और सेमीकंडक्टर सप्लाई चेन के लिए चीन पर निर्भर नहीं रहना चाहता। इसी रणनीति के तहत भारत को एक बेहद अहम वैश्विक गठबंधन में शामिल करने की तैयारी की जा रही है।
अमेरिका के नेतृत्व वाली पहल ‘Pax Silica’ में भारत को फरवरी 2026 से शामिल किए जाने की योजना है।
अमेरिकी विदेश उप-सचिव जैकब हेलबर्ग ने आधिकारिक तौर पर पुष्टि की है कि भारत को इस रणनीतिक समूह में शामिल किया जा रहा है। इसे भारत-अमेरिका तकनीकी साझेदारी में एक बड़ा मील का पत्थर माना जा रहा है।
Pax Silica क्या है?
Pax Silica अमेरिका के नेतृत्व में शुरू किया गया एक वैश्विक रणनीतिक गठबंधन है, जिसकी शुरुआत दिसंबर 2025 में हुई थी।
इसका मुख्य उद्देश्य है —
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आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस
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सेमीकंडक्टर
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क्रिटिकल मिनरल्स
से जुड़ी वैश्विक सप्लाई चेन को सुरक्षित और भरोसेमंद बनाना।
अमेरिका चाहता है कि भविष्य की सबसे संवेदनशील तकनीकें केवल भरोसेमंद और साझेदार देशों के बीच विकसित हों और चीन पर निर्भरता को धीरे-धीरे कम किया जा सके।
इस समय Pax Silica में कौन-कौन से देश शामिल हैं?
फिलहाल इस समूह में ये प्रमुख देश शामिल हैं —
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जापान
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दक्षिण कोरिया
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सिंगापुर
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नीदरलैंड
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ब्रिटेन
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इजरायल
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ऑस्ट्रेलिया
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संयुक्त अरब अमीरात
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कतर
भारत को इस गठबंधन में क्यों शामिल किया जा रहा है?
जैकब हेलबर्ग के अनुसार, अब तक यह गठबंधन मुख्य रूप से मैन्युफैक्चरिंग हब देशों पर केंद्रित था, लेकिन पूरी सप्लाई चेन को सुरक्षित बनाने के लिए अब भारत की भूमिका बेहद जरूरी हो गई है।
भारत के पास —
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एक तरफ क्रिटिकल मिनरल्स की उपलब्धता है
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दूसरी तरफ दुनिया का सबसे बड़ा सॉफ्टवेयर और AI टैलेंट पूल मौजूद है
अमेरिका मानता है कि भारत के जुड़ने से हार्डवेयर मैन्युफैक्चरिंग के क्षेत्र में चीन के विकल्प के तौर पर एक मजबूत केंद्र तैयार किया जा सकता है।
Pax Silica के तहत देशों की भूमिका कैसे तय होगी?
इस गठबंधन के तहत अलग-अलग देशों की विशेषज्ञता के अनुसार वर्किंग ग्रुप बनाए जाएंगे।
उदाहरण के तौर पर —
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नीदरलैंड — लिथोग्राफी में
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ताइवान — सेमीकंडक्टर फैब्रिकेशन में
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भारत — सॉफ्टवेयर और AI इंफ्रास्ट्रक्चर में
अपनी अहम भूमिका निभाएगा।
भारत को औपचारिक निमंत्रण मिलेगा
भारत पहुंचे अमेरिका के नए राजदूत सर्जियो गोर ने भी साफ किया है कि भारत को Pax Silica में शामिल होने का औपचारिक निमंत्रण दिया जाएगा।
उनके अनुसार यह पहल केवल सेमीकंडक्टर तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें शामिल हैं —
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क्रिटिकल मिनरल्स
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एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग
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AI इंफ्रास्ट्रक्चर
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एनर्जी इनपुट
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लॉजिस्टिक्स
यानी पूरा टेक्नोलॉजी इकोसिस्टम।
फिर भारत तुरंत हाँ क्यों नहीं कह रहा?
हालांकि भारत इस प्रस्ताव को लेकर कोई जल्दबाज़ी नहीं करना चाहता।
आर्थिक विशेषज्ञों के अनुसार भारत इस बात पर गंभीरता से विचार कर रहा है कि किसी अंतरराष्ट्रीय तकनीकी गठबंधन का हिस्सा बनने से उसकी स्वतंत्र नीतियों पर कोई दबाव तो नहीं पड़ेगा — खासकर —
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आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस
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डिजिटल रेगुलेशन
जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में।
चीन फैक्टर भारत के लिए बड़ी चुनौती
एक बड़ी वजह यह भी है कि भारत आज भी अपने करीब 30 प्रतिशत सेमीकंडक्टर चीन से आयात करता है।
ऐसे में चीन को पूरी तरह नज़रअंदाज़ करना फिलहाल भारत के लिए आसान नहीं है।Pax Silica से भारत को क्या फायदा हो सकता है?
यदि भारत इस गठबंधन में शामिल होता है, तो उसे —
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घरेलू सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग
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विदेशी निवेश
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रिसर्च और डेवलपमेंट
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सरकारी सब्सिडी
के नए अवसर मिल सकते हैं।
विशेषज्ञ मानते हैं कि भारत इस मंच पर बैठकर भविष्य की वैश्विक टेक्नोलॉजी नीति और सप्लाई चेन की दिशा तय करने में सीधी भूमिका निभा सकेगा।
निष्कर्ष
कुल मिलाकर, Pax Silica में भारत की एंट्री केवल एक तकनीकी साझेदारी नहीं है, बल्कि यह चीन पर निर्भरता कम करने और भविष्य की वैश्विक तकनीकी शक्ति संतुलन को आकार देने की एक बड़ी रणनीतिक चाल मानी जा रही है।
फिलहाल भारत इस प्रस्ताव से जुड़े सभी पहलुओं का अध्ययन कर रहा है और अंतिम फैसला आने वाले महीनों में लिया जा सकता है।
