नई दिल्ली, 27 जनवरी 2026
अगर आप कॉलेज में पढ़ते हैं या आपके परिवार में कोई हायर एजुकेशन से जुड़ा है, तो आपने हाल के दिनों में UGC Equity Regulations 2026 का नाम ज़रूर सुना होगा। सोशल मीडिया से लेकर कॉलेज कैंपस तक, हर जगह इन नए नियमों को लेकर चर्चा तेज़ है। सवाल यही है कि आखिर इन नियमों ने इतना विवाद क्यों खड़ा कर दिया है?
दरअसल, University Grants Commission (UGC) ने 15 जनवरी 2026 से देशभर के कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में ये नए नियम लागू किए हैं। इनका मुख्य उद्देश्य कैंपस में छात्रों, शिक्षकों और कर्मचारियों के साथ जाति, जेंडर या सामाजिक पृष्ठभूमि के आधार पर होने वाले भेदभाव को खत्म करना है। UGC का मानना है कि 2012 के पुराने नियम अब समय के साथ अप्रासंगिक हो चुके थे, इसलिए उन्हें और अधिक सख्त व स्पष्ट बनाया गया है।
हर संस्थान में Equity Cell अनिवार्य
नए नियमों के तहत हर कॉलेज और यूनिवर्सिटी में Equity Cell (समानता केंद्र) बनाना अनिवार्य कर दिया गया है। यदि किसी छात्र या कर्मचारी को भेदभाव का सामना करना पड़ता है, तो वह सीधे इस सेल में शिकायत दर्ज करा सकता है। संस्थान को शिकायत पर तय समयसीमा में कार्रवाई करनी होगी।
OBC को शामिल करने पर सबसे ज्यादा विवाद
हालांकि, इन नियमों के लागू होते ही विवाद भी सामने आ गया है। सबसे बड़ा मुद्दा OBC वर्ग को भेदभाव की परिभाषा में शामिल करने को लेकर है। जनरल कैटेगरी के कई छात्रों और संगठनों का तर्क है कि OBC वर्ग को पहले से आरक्षण का लाभ मिलता है, ऐसे में उन्हें अतिरिक्त सुरक्षा देना अन्यायपूर्ण हो सकता है।
संगठनों का विरोध और S-4 का गठन
नियमों के खिलाफ असंतोष बढ़ने के साथ-साथ कई सामाजिक संगठनों ने विरोध का रास्ता अपनाया है। जयपुर में करणी सेना, ब्राह्मण महासभा, कायस्थ महासभा और वैश्य समाज के संगठनों ने मिलकर ‘सवर्ण समाज समन्वय समिति (S-4)’ का गठन किया है। इन संगठनों का आरोप है कि नियमों का गलत इस्तेमाल कर छात्रों और शिक्षकों को झूठे मामलों में फंसाया जा सकता है।
शिक्षा की गुणवत्ता पर भी सवाल
कुछ शिक्षाविदों और छात्रों का मानना है कि भारतीय विश्वविद्यालयों की वैश्विक रैंकिंग पहले ही कमजोर है। ऐसे में नए नियमों की जगह शिक्षा की गुणवत्ता, रिसर्च और इंफ्रास्ट्रक्चर पर ध्यान दिया जाना चाहिए। साथ ही यह चिंता भी जताई जा रही है कि नियमों के दुरुपयोग से छात्रों का करियर प्रभावित हो सकता है।
नियम न मानने पर सख्त कार्रवाई
UGC ने स्पष्ट किया है कि जो संस्थान इन नियमों का पालन नहीं करेंगे, उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। इसमें सरकारी योजनाओं से बाहर करना, कोर्स बंद करना, ऑनलाइन या डिस्टेंस एजुकेशन पर रोक लगाना और यहां तक कि संस्थान की मान्यता रद्द करना भी शामिल है।
शिकायत की तय प्रक्रिया
भेदभाव की स्थिति में शिकायत दर्ज कराने की प्रक्रिया भी तय की गई है। कोई भी पीड़ित छात्र, शिक्षक या कर्मचारी हेल्पलाइन, ई-मेल या ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से शिकायत कर सकता है। गंभीर मामलों में शिकायत सीधे पुलिस तक भी पहुंच सकती है। यदि शिकायतकर्ता Equity Cell की रिपोर्ट से संतुष्ट नहीं होता, तो वह लोकपाल के पास अपील कर सकता है। UGC इस पूरी प्रक्रिया की निगरानी करेगा और रैंडम इंस्पेक्शन के जरिए यह सुनिश्चित करेगा कि नियम सही ढंग से लागू हो रहे हैं।
समानता या बढ़ता विवाद?
UGC का कहना है कि ये नियम कैंपस में एक सुरक्षित और समान वातावरण बनाने के लिए ज़रूरी हैं। लेकिन जिस तरह से इन्हें लागू किया गया है, उसने छात्रों और संगठनों के बीच बहस और तनाव को बढ़ा दिया है। अब सबसे बड़ा सवाल यही है—
क्या UGC Equity Regulations 2026 वास्तव में समानता लाएंगे, या ये विवाद और असंतोष को और हवा देंगे?
