23 जनवरी 2026
पीसीबी द्वारा आयोजित त्रिकोणीय टी20 सीरीज़ के पहले मुकाबले में पाकिस्तान ने जिम्बाब्वे को 5 विकेट से हराकर शानदार आगाज़ किया। रावलपिंडी क्रिकेट स्टेडियम में खेले गए इस मैच में पाकिस्तान को जीत के लिए 148 रन का लक्ष्य मिला था। एक समय पाकिस्तान 54 रन पर 4 विकेट गंवा चुका था और मुकाबला जिम्बाब्वे की पकड़ में जाता दिख रहा था।
लेकिन इसके बाद फखर ज़मान और उस्मान खान ने पांचवें विकेट के लिए 61 रन की अहम साझेदारी कर मैच का रुख पलट दिया। फखर ने 32 गेंदों पर 44 रन बनाए, जबकि उस्मान खान और मोहम्मद नवाज ने अंत में नाबाद रहते हुए पाकिस्तान को 19.2 ओवर में जीत दिला दी।
हालांकि, पाकिस्तान बनाम जिम्बाब्वे की चर्चा यहीं खत्म नहीं होती। अंडर-19 पुरुष क्रिकेट विश्व कप में इन्हीं दोनों टीमों के बीच खेले गए एक मुकाबले ने क्रिकेट जगत में एक नई बहस छेड़ दी है—रणनीति बनाम खेल भावना।
हरारे में खेले गए इस मैच में पाकिस्तान ने जिम्बाब्वे को 128 रन पर समेट दिया। लक्ष्य आसान था और 12 ओवर में पाकिस्तान 74/2 पर पहुंच चुका था। जीत लगभग तय लग रही थी, लेकिन इसके बाद पाकिस्तान ने अचानक रन-रेट धीमा कर दिया। 26 ओवर तक टीम 120/2 पर ही पहुंची।
असल वजह थी टूर्नामेंट का सुपर सिक्स नियम। नियम के मुताबिक अगले दौर में सिर्फ उन्हीं टीमों के खिलाफ खेले गए मैचों के अंक और नेट रन रेट जुड़ते हैं, जो सुपर सिक्स में क्वालिफाई करती हैं। पाकिस्तान चाहता था कि जिम्बाब्वे, स्कॉटलैंड से ऊपर रहे ताकि जिम्बाब्वे के खिलाफ मिली बड़ी जीत का फायदा आगे मिले।
आख़िरकार 27वें ओवर में लगातार दो छक्कों के साथ पाकिस्तान ने मैच खत्म कर दिया। स्कोरबोर्ड पर यह एक सामान्य जीत थी, लेकिन इसके पीछे की रणनीति ने सवाल खड़े कर दिए।
पूर्व जिम्बाब्वे कप्तान एंडी फ्लावर ने इसे चतुर लेकिन वैध रणनीति बताया, जबकि आलोचकों का मानना है कि यह खेल भावना के खिलाफ है। आईसीसी नियमों में मंशा साबित करना मुश्किल होता है, इसलिए यह विवाद नैतिकता और रणनीति के बीच फंसा हुआ है।
अब सवाल यही है—क्या नियमों के भीतर रहकर खेल की आत्मा को मोड़ना सही है? या फिर क्रिकेट अब सिर्फ दिमाग का खेल बनता जा रहा है?
