12 जनवरी 2026
ईरान इस समय अपने इतिहास के सबसे गंभीर जन आंदोलनों में से एक का सामना कर रहा है। देशभर में भड़के विरोध प्रदर्शन अब तीसरे हफ्ते में प्रवेश कर चुके हैं और हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं। सवाल यह है कि ईरान में यह विरोध क्यों भड़का, कब शुरू हुआ और इसकी जड़ें क्या हैं।
आर्थिक संकट और जनता का गुस्सा
विश्लेषकों के अनुसार, इन प्रदर्शनों की जड़ में गंभीर आर्थिक संकट है। ईरान लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों की मार झेल रहा है। महंगाई रिकॉर्ड स्तर पर है, बेरोज़गारी बढ़ रही है और ईरानी मुद्रा रियाल की कीमत लगातार गिर रही है। आम नागरिकों के लिए रोज़मर्रा की ज़िंदगी मुश्किल होती जा रही है।
इस आर्थिक असंतोष के चलते सरकार की नीतियों और कड़े प्रशासनिक नियंत्रण के खिलाफ जनता का गुस्सा धीरे-धीरे सड़कों पर फूट पड़ा। शुरुआत में यह आंदोलन ईंधन और खाद्य वस्तुओं की बढ़ती कीमतों के विरोध में शुरू हुआ था, लेकिन जल्द ही यह सिर्फ आर्थिक मुद्दों तक सीमित नहीं रहा। विरोध प्रदर्शन सत्ता विरोधी आंदोलन का रूप ले गए।
विरोध प्रदर्शन कब और कैसे शुरू हुए?
करीब तीन हफ्ते पहले ईरान के कुछ शहरों में छोटे-छोटे विरोध प्रदर्शन शुरू हुए। देखते ही देखते ये प्रदर्शन तेहरान समेत 100 से अधिक शहरों में फैल गए। छात्र, मजदूर, महिलाएं और युवा बड़ी संख्या में सड़कों पर उतर आए और सरकार के खिलाफ नारेबाज़ी शुरू कर दी।
सरकार ने स्थिति पर काबू पाने के लिए कड़ी कार्रवाई की। इंटरनेट और मोबाइल सेवाएं बंद कर दी गईं, हजारों लोगों को गिरफ्तार किया गया और सुरक्षा बलों की तैनाती बढ़ा दी गई। मानवाधिकार संगठनों के मुताबिक, झड़पों में सैकड़ों लोगों की जान जा चुकी है, हालांकि सरकार ने अब तक आधिकारिक आंकड़े जारी नहीं किए हैं।
राजनीतिक आरोप और अंतरराष्ट्रीय पहल
ईरानी नेतृत्व का आरोप है कि इन प्रदर्शनों के पीछे अमेरिका और इज़राइल का हाथ है। राष्ट्रपति और सर्वोच्च नेता इसे विदेशी साज़िश बता रहे हैं। वहीं, विपक्षी और निर्वासित नेता रेजा पहलवी लगातार लोगों से आंदोलन जारी रखने की अपील कर रहे हैं।
आज ईरान की सड़कों पर सिर्फ नारे नहीं हैं, बल्कि एक गहरा असंतोष है—महंगाई से टूटी उम्मीदें, बेरोज़गारी से थके युवा और भविष्य को लेकर बढ़ती बेचैनी। सरकार इसे विदेशी साज़िश बता रही है, लेकिन सड़कों पर उतरी भीड़ साफ इशारा कर रही है कि गुस्सा भीतर से फूटा है।
नाज़ुक स्थिति और भविष्य
इंटरनेट बंद है, सूचनाएं सीमित हैं और कार्रवाई सख़्त हो रही है। सवाल यह है कि क्या दमन से जनता की आवाज़ दबाई जा सकती है या यह आंदोलन ईरान की राजनीति और सत्ता संरचना को ही चुनौती देगा।
फिलहाल, ईरान में हालात बेहद नाज़ुक हैं। दुनिया की नजरें टिकी हुई हैं, क्योंकि अब यह सिर्फ एक विरोध नहीं, बल्कि ईरान के भविष्य की लड़ाई बन चुका है।
