22 जनवरी 2026
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप एक बार फिर ग्रीनलैंड को हासिल करने की इच्छा जता रहे हैं, जिससे अमेरिका और डेनमार्क के बीच तनाव बढ़ता दिख रहा है। इसी बीच रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने इस पूरे विवाद पर अपनी प्रतिक्रिया देकर अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में हलचल मचा दी है।
21 जनवरी को रूस की राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद की बैठक में दिए गए टेलीविजन संबोधन में पुतिन ने साफ कहा कि ग्रीनलैंड के मुद्दे से रूस का कोई लेना-देना नहीं है और यह विवाद अमेरिका और डेनमार्क को आपस में ही सुलझाना चाहिए। लेकिन इसके साथ ही उन्होंने यूरोप पर एक कड़ा तंज भी कस दिया।
पुतिन ने कहा कि डेनमार्क ने हमेशा ग्रीनलैंड के साथ एक उपनिवेश जैसा व्यवहार किया है और उसके प्रति सख्त रवैया अपनाया है। उन्होंने इतिहास के उदाहरण देते हुए याद दिलाया कि 1917 में डेनमार्क ने वर्जिन आइलैंड्स अमेरिका को बेच दिए थे और 1867 में रूस ने अलास्का को अमेरिका को 7.2 मिलियन डॉलर में बेच दिया था।
पुतिन ने अलास्का और ग्रीनलैंड के क्षेत्रफल की तुलना करते हुए कहा कि आज की महंगाई के हिसाब से ग्रीनलैंड की कीमत लगभग 200 से 250 मिलियन डॉलर हो सकती है, जो भारतीय मुद्रा में करीब 23 अरब रुपये बैठती है। इस बयान को यूरोप के लिए एक व्यंग्य के तौर पर देखा जा रहा है, क्योंकि जिस द्वीप को संप्रभुता का बड़ा मुद्दा बताया जा रहा है, उसकी कीमत पुतिन ने बेहद कम आंकी।
विशेषज्ञ मानते हैं कि यूक्रेन युद्ध को लेकर यूरोपीय देशों से लंबे समय से टकराव झेल रहे पुतिन इस पूरे घटनाक्रम को शांत होकर देख रहे हैं। उनके बयान न सिर्फ यूरोप की कूटनीतिक कमजोरी की ओर इशारा करते हैं, बल्कि यह भी दिखाते हैं कि वैश्विक राजनीति में अब क्षेत्र और संप्रभुता जैसे मुद्दों को भी सौदेबाजी की नजर से देखा जा रहा है।
