ग्रेटर नोएडा, 20 जनवरी 2026
ग्रेटर नोएडा से एक दर्दनाक और सिस्टम को झकझोर देने वाली घटना सामने आई है। सेक्टर-150 में बारिश के पानी से भरे एक गहरे गड्ढे में कार गिरने से 27 वर्षीय युवा इंजीनियर युवराज मेहता की मौत हो गई। इस हादसे ने शहरी सुरक्षा, निर्माण स्थलों की लापरवाही और सरकारी जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
कैसे हुआ हादसा
यह हादसा शनिवार रात ग्रेटर नोएडा के सेक्टर-150 में हुआ। निर्माणाधीन व्यावसायिक परिसर के पास बेसमेंट के लिए खोदा गया गहरा गड्ढा बारिश के पानी से पूरी तरह भर गया था। अंधेरे और चेतावनी संकेतों की कमी के कारण युवराज मेहता की कार अनियंत्रित होकर सीधे उसी गड्ढे में जा गिरी। गड्ढा इतना गहरा था कि कुछ ही मिनटों में कार पूरी तरह पानी में डूब गई।
रेस्क्यू के बावजूद नहीं बच सकी जान
स्थानीय लोगों और राहत टीमों ने युवराज को बचाने की भरपूर कोशिश की, लेकिन सफलता नहीं मिल सकी। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि युवराज के फेफड़ों में करीब साढ़े तीन लीटर पानी भरा हुआ था। डॉक्टरों के अनुसार लंबे समय तक पानी में फंसे रहने से दम घुटने की स्थिति बनी और इसके बाद हार्ट फेलियर हुआ, जो मौत का कारण बना।
राहुल गांधी का तीखा हमला
इस घटना को लेकर सियासत भी तेज हो गई है। कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट करते हुए सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने लिखा कि भारत में सड़कें, पुल, आग, पानी, प्रदूषण, भ्रष्टाचार और उदासीनता सभी जानलेवा बन चुके हैं। राहुल गांधी ने कहा कि शहरी इलाकों में व्यवस्था का पतन तकनीक या संसाधनों की कमी से नहीं, बल्कि जवाबदेही के अभाव के कारण हो रहा है। उन्होंने इस हादसे को लापरवाही नहीं, बल्कि सिस्टम फेलियर बताया।
सरकार और प्रशासन की कार्रवाई
घटना के बाद उत्तर प्रदेश सरकार हरकत में आई। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मामले का संज्ञान लेते हुए तीन सदस्यीय विशेष जांच टीम (SIT) गठित की है, जो पांच दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपेगी। साथ ही नोएडा प्राधिकरण के सीईओ लोकेश एम को पद से हटा दिया गया है।
ग्रेटर नोएडा औद्योगिक विकास प्राधिकरण ने भी सड़क और निर्माण सुरक्षा को लेकर जीरो टॉलरेंस नीति अपनाने की घोषणा की है। अब तक 10 बड़े हॉटस्पॉट चिन्हित किए गए हैं, जहां बैरिकेडिंग, रेड लाइट, ब्लिंकर्स और अन्य सुरक्षा संकेत लगाए जा रहे हैं।
बड़ा सवाल
सवाल यह है कि यदि ये सुरक्षा कदम पहले उठाए जाते, तो क्या एक युवा इंजीनियर की जान बचाई जा सकती थी? जांच के नतीजे जो भी हों, लेकिन यह हादसा शहरी विकास की कीमत और सिस्टम की जवाबदेही पर एक गंभीर सवाल जरूर छोड़ गया है।
