पुणे, महाराष्ट्र। 10 जनवरी 2026
महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर बड़ा सियासी घटनाक्रम सामने आया है। लंबे समय तक अलग-अलग राह पर चलने वाले शरद पवार और अजित पवार अब एक मंच पर दिखाई दिए हैं। पुणे और पिंपरी-चिंचवड़ महानगरपालिका चुनाव के लिए एनसीपी के दोनों गुट—एनसीपी (अजित पवार) और एनसीपी (शरद पवार)—ने संयुक्त रूप से चुनावी घोषणापत्र जारी किया है।
पुणे में आयोजित एक संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में उपमुख्यमंत्री अजित पवार और सांसद सुप्रिया सुले एक साथ मंच पर नजर आए। 2023 में हुए राजनीतिक विभाजन के बाद यह पहला बड़ा अवसर है, जब दोनों गुटों के शीर्ष नेता इस तरह सार्वजनिक रूप से साथ दिखाई दिए। राजनीतिक जानकार इसे दोनों गुटों के बीच बढ़ती नजदीकियों का स्पष्ट संकेत मान रहे हैं।
गौरतलब है कि अजित पवार की एनसीपी फिलहाल सत्तारूढ़ महायुति का हिस्सा है, जबकि शरद पवार के नेतृत्व वाली एनसीपी (एसपी) विपक्षी महा विकास अघाड़ी में शामिल है। इसके बावजूद स्थानीय निकाय चुनावों में दोनों दलों ने साथ मिलकर चुनाव लड़ने का फैसला किया है।
नागरिक मुद्दों पर केंद्रित घोषणापत्र
संयुक्त घोषणापत्र में पुणे और पिंपरी-चिंचवड़ के प्रमुख नागरिक मुद्दों को प्राथमिकता दी गई है। उपमुख्यमंत्री अजित पवार ने कहा कि यह मेनिफेस्टो विकास और स्थिरता की सोच पर आधारित है। इसमें हर घर को रोजाना स्वच्छ पीने का पानी, गड्ढों से मुक्त सड़कें, ट्रैफिक जाम से राहत, नियमित सफाई और स्वच्छता जैसे अहम वादे शामिल हैं।
इसके अलावा घोषणापत्र में अत्याधुनिक स्वास्थ्य सेवाएं, प्रदूषण मुक्त और हरित पुणे का निर्माण, झुग्गी-झोपड़ियों के पुनर्वास और पुरानी इमारतों के नवीनीकरण का भी आश्वासन दिया गया है। नागरिकों को राहत देते हुए PMPML बसों और मेट्रो में मुफ्त यात्रा, 500 वर्ग फुट तक के घरों पर प्रॉपर्टी टैक्स माफी और छात्रों को मुफ्त कंप्यूटर टैबलेट देने की घोषणा भी की गई है।
भाजपा पर साधा निशाना
इस मौके पर अजित पवार ने स्थानीय भाजपा नेतृत्व पर भी तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य और केंद्र सरकार से पर्याप्त फंड मिलने के बावजूद भाजपा के कार्यकाल में पुणे और पिंपरी-चिंचवड़ का विकास प्रभावित हुआ।
15 जनवरी को होंगे निकाय चुनाव
गौरतलब है कि 15 जनवरी को महाराष्ट्र के 29 नगर निगमों के लिए चुनाव होने हैं, जिनमें पुणे और पिंपरी-चिंचवड़ भी शामिल हैं। इन दोनों नगर निगमों में करीब 17 लाख मतदाता 128 पार्षदों का चुनाव करेंगे। ऐसे में पवार परिवार की यह साझा रणनीति चुनावी नतीजों को किस हद तक प्रभावित करती है, इस पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।
