गुरुग्राम, 17 जनवरी 2026
डीएचबीवीएन ने अस्थायी व त्रुटिपूर्ण बिजली बिलों पर लगाम लगाने के लिए सख्त एसओपी लागू की
प्रबंध निदेशक विक्रम सिंह के निर्देशानुसार दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम (डीएचबीवीएन) ने उपभोक्ताओं को लंबे समय से चली आ रही अस्थायी एवं त्रुटिपूर्ण बिजली बिलों की समस्या से राहत देने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। निगम ने तीन से अधिक बिलिंग चक्रों तक लंबित रहने वाले अस्थायी बिजली बिलों के निपटारे के लिए एक विस्तृत मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) जारी की है। इसका उद्देश्य बिलिंग प्रणाली में पारदर्शिता, जवाबदेही और समयबद्ध समाधान सुनिश्चित करना है।
प्रबंध निदेशक ने स्पष्ट किया है कि हरियाणा विद्युत आपूर्ति संहिता विनियम, 2014 के तहत किसी भी उपभोक्ता का अस्थायी बिल अधिकतम दो बिलिंग चक्रों तक ही जारी किया जा सकता है, लेकिन कई मामलों में इस नियम का पालन नहीं हो पा रहा था। इसी लापरवाही को गंभीरता से लेते हुए हरियाणा राइट टू सर्विस (आरटीएस) आयोग ने भी संज्ञान लिया था। आयोग की टिप्पणियों और निर्देशों के अनुपालन में अब डीएचबीवीएन ने यह नई एसओपी लागू की है।
नई व्यवस्था के तहत निगम ने फील्ड कार्यालयों और संबंधित विंग को प्रक्रियाएं दुरुस्त करने के लिए चार माह का तैयारी काल दिया है। इस अवधि में लंबे समय से लंबित अस्थायी बिलों का चरणबद्ध तरीके से निपटान किया जाएगा। इसके बाद यह सुनिश्चित किया जाएगा कि कोई भी उपभोक्ता दो से अधिक बिलिंग चक्रों तक अस्थायी बिलिंग में न रहे।
उन्होंने बताया कि एसओपी में यह भी व्यवस्था की गई है कि तैयारी काल समाप्त होने के बाद प्रत्येक माह अस्थायी बिलिंग के मामलों की गहन समीक्षा की जाएगी। उप-मंडल स्तर पर नामित अधिकारी द्वारा सभी ऐसे मामलों की जांच कर रिपोर्ट तैयार की जाएगी, जिसकी पुष्टि एसडीओ स्तर पर की जाएगी। इसके पश्चात कार्यकारी अभियंता स्तर पर प्रत्येक मामले में अंतिम निर्णय लिया जाएगा। इस पूरी प्रक्रिया में संबंधित मीटर रीडिंग एजेंसी, कर्मचारी या उपभोक्ता को सुनवाई का अवसर भी दिया जाएगा, ताकि निष्पक्ष निर्णय सुनिश्चित हो सके।
यदि जांच में यह सामने आता है कि देरी मीटर रीडिंग एजेंसी के कारण हुई है, तो अनुबंध के अनुसार उस पर दंड लगाया जाएगा और भविष्य के अनुबंधों में उपभोक्ता मुआवजे का स्पष्ट प्रावधान किया जाएगा। वहीं, यदि किसी कर्मचारी की लापरवाही पाई जाती है, तो हरियाणा राइट टू सर्विस अधिनियम के तहत संबंधित अधिकारी पर जुर्माना, उपभोक्ता को मुआवजा तथा आवश्यकता पड़ने पर अनुशासनात्मक कार्रवाई भी की जा सकेगी।
विक्रम सिंह ने बताया कि पारदर्शिता और निगरानी को और मजबूत बनाने के लिए निगम अपने आईटी सिस्टम में ऑनलाइन मॉड्यूल विकसित करेगा। इसके माध्यम से हर माह दो से अधिक बिलिंग चक्रों वाले अस्थायी बिलों की स्वचालित रिपोर्ट तैयार होगी और प्रत्येक मामले का डिजिटल रिकॉर्ड रखा जाएगा। इससे पूरे प्रकरण की ऑनलाइन ट्रैकिंग संभव होगी और जवाबदेही तय की जा सकेगी।
उपभोक्ताओं को वित्तीय राहत देने के उद्देश्य से यह भी प्रावधान किया गया है कि ऐसे मामलों में उपभोक्ता पर पड़े बकाये को माफ कर दोषी एजेंसी या कर्मचारी से उसकी वसूली की जाएगी। इसके साथ ही त्रुटिपूर्ण या विवादित बिलों के मामलों में उपभोक्ताओं को किस्तों में भुगतान, ब्याज या सरचार्ज से राहत, अतिरिक्त राशि की वापसी या समायोजन तथा उपभोक्ता शिकायत निवारण फोरम में अपील का अधिकार भी सुनिश्चित किया गया है।
निगम प्रवक्ता संजय चुघ ने बताया कि डीएचबीवीएन प्रबंधन ने सभी संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों को इन निर्देशों का सख्ती से पालन करने के आदेश दिए हैं। उनका मानना है कि इस नई एसओपी के लागू होने से न केवल उपभोक्ताओं को समय पर सही बिजली बिल मिलेंगे, बल्कि बिलिंग व्यवस्था में सुधार के साथ-साथ निगम की कार्यप्रणाली में भी पारदर्शिता और विश्वसनीयता बढ़ेगी।
