मुंबई, महाराष्ट्र। 7 जनवरी 2026
महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर यह कहावत सच साबित हुई है कि राजनीति में न दोस्ती स्थायी होती है और न ही दुश्मनी। अंबरनाथ नगर परिषद से आई एक चौंकाने वाली राजनीतिक खबर ने सियासी हलकों में हलचल मचा दी है। कांग्रेस-मुक्त भारत का नारा देने वाली बीजेपी ने अंबरनाथ नगर परिषद में कांग्रेस से हाथ मिलाकर सत्ता हासिल कर ली है। इस अप्रत्याशित गठबंधन का सबसे बड़ा झटका उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की शिवसेना को लगा है, जो सत्ता से बाहर हो गई।
अंबरनाथ नगर परिषद में बदला सियासी समीकरण
अंबरनाथ नगर परिषद चुनाव में सियासी गणित ने सभी को हैरान कर दिया। बीजेपी और कांग्रेस ने मिलकर शिवसेना (शिंदे गुट) को सत्ता से दूर कर दिया। बीजेपी की तेजश्री करंजुले को महापौर चुना गया, जिन्हें कुल 32 पार्षदों का समर्थन मिला।
गठबंधन का गणित
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बीजेपी: 16 पार्षद
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कांग्रेस: 12 पार्षद
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एनसीपी (अजित पवार गुट): 4 पार्षद
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कुल समर्थन: 32 पार्षद
यानी सत्ता तक पहुंचने के लिए बीजेपी ने उसी कांग्रेस का सहारा लिया, जिसे वह राष्ट्रीय राजनीति में अपना सबसे बड़ा विरोधी मानती है।
शिंदे गुट में नाराज़गी
इस सियासी घटनाक्रम के बाद शिंदे गुट में नाराज़गी खुलकर सामने आ गई है। शिवसेना (शिंदे गुट) के सांसद श्रीकांत शिंदे ने कहा कि अगर अंबरनाथ में बीजेपी और कांग्रेस का गठबंधन हुआ है, तो इसका जवाब बीजेपी को देना चाहिए। उन्होंने साफ किया कि यह फैसला शिवसेना का नहीं है और पार्टी को इस पर कोई सफाई देने की जरूरत नहीं है।
‘अपवित्र गठबंधन’ का आरोप
शिवसेना विधायक बालाजी किनिकर ने बीजेपी पर गंभीर आरोप लगाते हुए इस गठबंधन को “अपवित्र” करार दिया। उन्होंने कहा कि जो पार्टी कांग्रेस-मुक्त भारत की बात करती थी, वही आज कांग्रेस के साथ मिलकर सत्ता में है। यह शिवसेना की पीठ में छुरा घोंपने जैसा है।
राजनीति में नए संकेत
महाराष्ट्र में जहां एक ओर महायुति गठबंधन की सरकार है, वहीं नगर निकाय चुनावों में बदलते गठबंधन नए सियासी संकेत दे रहे हैं। बड़ा सवाल यही है कि क्या यह केवल स्थानीय मजबूरी है या आने वाले चुनावों का ट्रेलर?
अंबरनाथ ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि भारतीय राजनीति में कुछ भी असंभव नहीं।
