नई दिल्लीः 13 अक्टूबर / दिल्ली में हालिया विरोध प्रदर्शनों की कवरेज के दौरान महिला पत्रकारों के साथ कथित मारपीट के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को सख्त रुख अपनाया। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने दिल्ली पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी को अदालत में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर आरोपों पर स्पष्टीकरण देने को कहा। यह मामला नेटवर्क ऑफ वुमेन इन मीडिया, इंडिया (एनडब्ल्यूएमआई) की ओर से दायर याचिका का उल्लेख किए जाने के बाद सामने आया, जिसमें प्रदर्शन कवर करने वाले पत्रकारों, विशेषकर महिला पत्रकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की गई है।
सीजेआई ने कहा, ‘हम चाहेंगे कि कोई वरिष्ठ अधिकारी यहां उपस्थित रहे और स्पष्टीकरण दे।’ उन्होंने स्पष्ट किया कि पुलिस को लगाए गए आरोपों पर जवाब देना होगा। जयसिंह ने अदालत को बताया कि इस संबंध में सॉलिसिटर जनरल को पहले ही सूचना दे दी गई है। पीठ ने याचिका को पुलिस कार्रवाई से संबंधित अन्य मामले के साथ गुरुवार को सूचीबद्ध करने की बात कही।
हरियाणा में बीजेपी के पूर्व जिलाध्यक्ष दयाराम यादव की बेटी पिंकी यादव पर फर्जी दस्तावेज के दम पर प्रमोशन पाने के मामले में गाज गिरी है। हिमाचल प्रदेश की अरनी यूनिवर्सिटी से लिया उनका सिविल इंजीनियरिंग का डिप्लोमा जांच में फर्जी निकला। इसी डिप्लोमा के जरिए पिंकी ने जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग (PHE) में JE के पद पर प्रमोशन पाया था।
फर्जी सर्टिफिकेट की बात सामने आने के बाद चीफ इंजीनियर देवेंद्र दहिया ने आदेश जारी कर पिंकी का JE (सिविल) पद पर हुआ प्रमोशन रद्द कर दिया है। अब उन्हें तुरंत प्रभाव से वापस उनके मूल क्लर्क पद पर भेजा जा रहा है।
पिंकी यादव को 10 सितंबर 2025 को प्रमोशन मिला था। अब विभाग JE के पद पर रहते हुए उन्हें मिले अतिरिक्त वेतन और अलाउंस का पूरा हिसाब तैयार कर रहा है। क्लर्क के मुकाबले JE पद पर जितना भी एक्स्ट्रा पैसा मिला है, सरकार उसकी वसूली पिंकी के वेतन से करेगी।उधर, इस मामले में पूर्व जिलाध्यक्ष दयाराम यादव ने अपनी बेटी का बचाव किया है। उनका कहना है कि उनकी बेटी के सर्टिफिकेट बिल्कुल सही हैं और यह जल्दबाजी में लिया गया निर्णय है। उन्होंने कहा कि इस मामले की दोबारा जांच कराई जाएगी, जिसके बाद ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट होगी।





