गुरुग्राम, 23 अक्टूबर। हरियाणा में बिजली विभाग के निजीकरण के विरोध में बिजली कर्मचारियों की हड़ताल के बीच कई जिलों में बिजली आपूर्ति प्रभावित होने से संकट गहरा गया है। गुरुग्राम, मेवात, कुरुक्षेत्र, हिसार और रोहतक समेत कई क्षेत्रों में बिजली संकट की शिकायतें सामने आई हैं। बिजली की समस्या के कारण लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा, वहीं कुछ स्थानों पर रातभर सड़कों पर जाम और विरोध प्रदर्शन की स्थिति बनी रही। बिजली आपूर्ति बाधित होने से ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल को लेकर भी लोगों की मुश्किलें बढ़ गईं। बिजली विभाग के निजीकरण और ठेकेदारी व्यवस्था को लेकर कर्मचारी यूनियनें लगातार विरोध कर रही हैं। दूसरी ओर, सरकार बिजली व्यवस्था को सामान्य बनाए रखने के प्रयास में जुटी है। ऐसे में बिजली कर्मचारियों और सरकार के बीच गतिरोध जारी है।
निजीकरण के खिलाफ दूसरे दिन भी कर्मचारियों का विरोध
हरियाणा प्रदेश इलेक्ट्रिकल बोर्ड के नेता रविंद्र यादव ने दूसरे दिन भी अपने साथियों के साथ निजीकरण के खिलाफ विरोध जताया। उन्होंने कहा कि सरकार बिजली विभाग के करीब 30 प्रतिशत हिस्से को पहले ही निजी हाथों में दे चुकी है और अब शेष व्यवस्था को भी ठेकेदारों को सौंपने की तैयारी की जा रही है। यादव ने कहा कि बिजली कर्मचारी यूनियन इस फैसले का विरोध जारी रखेगी। उन्होंने सरकार से कर्मचारियों के हितों पर ध्यान देने की अपील करते हुए कहा कि सरकार को लाखों बिजली कर्मचारियों के भविष्य और उनकी सेवा सुरक्षा को प्राथमिकता देनी चाहिए, न कि ठेकेदारों के हितों को।
निजीकरण वापस नहीं हुआ तो आंदोलन जारी रहेगा: उदय शंकर
अनुबंध विद्युत संगठन के प्रदेश सचिव उदय शंकर ने कहा कि कर्मचारी किसी भी सूरत में बिजली विभाग का निजीकरण स्वीकार नहीं करेंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि सरकार अपने फैसले से पीछे नहीं हटती, तो कर्मचारी भी आंदोलन से पीछे नहीं हटेंगे। उदय शंकर ने बिजली संकट और पानी की समस्या पर चिंता जताते हुए कहा कि कर्मचारियों को भी आम लोगों की परेशानियों का दुख है। हालांकि, उनके अनुसार सरकार पर दबाव बनाने के लिए हड़ताल करना कर्मचारियों की मजबूरी बन गया है। उन्होंने कहा कि जब तक सरकार ठेकेदारी प्रथा को समाप्त करने की दिशा में कदम नहीं उठाती, तब तक विरोध जारी रहेगा।
अनिल विज ने कर्मचारियों से की हड़ताल समाप्त करने की अपील
हरियाणा के कैबिनेट मंत्री एवं ऊर्जा मंत्री अनिल विज ने बिजली कर्मचारियों को अपना भाई बताते हुए उनसे हड़ताल समाप्त करने की अपील की है। उन्होंने कहा कि सरकार और कर्मचारियों को मिलकर अदालत के माध्यम से ठेकेदारी व्यवस्था के खिलाफ लड़ाई लड़नी चाहिए। विज ने सभी यूनियनों से आग्रह किया कि वे बिजली आपूर्ति बहाल करें और अपने मुद्दों के समाधान के लिए कानूनी रास्ता अपनाएं। उनका कहना है कि कर्मचारियों के साथ बातचीत के जरिए समाधान निकालने का प्रयास किया जाना चाहिए, ताकि आम जनता को बिजली संकट से राहत मिल सके।
इंजीनियरिंग पावर एसोसिएशन के पदाधिकारियों से भी हुई बैठक
बिजली संकट और निजीकरण को लेकर ऊर्जा मंत्री अनिल विज तथा इंजीनियरिंग पावर एसोसिएशन के पदाधिकारियों के बीच बैठक होने की जानकारी भी सामने आई है। बैठक में सकारात्मक निर्णय होने के संकेत बताए जा रहे हैं। हालांकि, बैठक के निर्णयों और हड़ताल समाप्त होने को लेकर विस्तृत आधिकारिक जानकारी सामने आने के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
बिजली संकट से आम जनता परेशान
हड़ताल के बीच बिजली आपूर्ति प्रभावित होने से घरों, दुकानों और अन्य संस्थानों का कामकाज प्रभावित हुआ है। ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली नहीं आने से पानी की उपलब्धता को लेकर भी दिक्कतें सामने आई हैं। वहीं, सड़कों पर जाम और विरोध प्रदर्शनों के कारण लोगों को आवागमन में परेशानी का सामना करना पड़ा। अब सभी की निगाहें सरकार और बिजली कर्मचारी यूनियनों के बीच होने वाली बातचीत पर टिकी हैं। यदि दोनों पक्षों के बीच सहमति बनती है, तो हड़ताल समाप्त होने और बिजली आपूर्ति सामान्य होने का रास्ता खुल सकता है। फिलहाल निजीकरण और ठेकेदारी व्यवस्था का मुद्दा विवाद के केंद्र में बना हुआ है।





