हरियाणा ACB ने तोड़ा 10 साल का रिकॉर्ड, 2026 में अब तक 171 ट्रैप केस दर्ज

हरियाणा ACB ने तोड़ा 10 साल का रिकॉर्ड, 2026 में अब तक 171 ट्रैप केस दर्ज

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रिश्वतखोरी के मामलों में 6,824 नहीं, बल्कि इस रिपोर्ट में 171 ट्रैप केस का आंकड़ा; 9 माह में 191 आपराधिक मुकदमे दर्ज, 26 दोषियों को कठोर कारावास

डॉ. ए.एस. चावला का भ्रष्ट अधिकारियों को संदेश—जनता को परेशान कर रिश्वत मांगने वाले कानून की पकड़ से बाहर नहीं

चंडीगढ़, 23 अक्टूबर। हरियाणा में भ्रष्टाचार के खिलाफ राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) ने वर्ष 2026 में ट्रैप केस दर्ज करने के मामले में पिछले एक दशक का रिकॉर्ड तोड़ दिया है। ब्यूरो के अनुसार, 21 अक्टूबर 2026 तक प्रदेश में कुल 171 ट्रैप केस दर्ज किए जा चुके हैं। यह वर्ष 2016 से अब तक किसी एक वर्ष में दर्ज ट्रैप केसों की सर्वाधिक संख्या है। इससे पहले वर्ष 2022 में 170 ट्रैप केस दर्ज किए गए थे। ब्यूरो का कहना है कि वर्ष 2026 अभी समाप्त नहीं हुआ है और अक्टूबर में ही पिछले दशक का रिकॉर्ड पार हो गया है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के मार्गदर्शन में भ्रष्टाचार के प्रति जीरो टॉलरेंस की नीति के तहत कार्रवाई की जा रही है। एसीबी प्रमुख डॉ. ए.एस. चावला के अनुसार, शिकायत मिलने से लेकर कार्रवाई करने तक की प्रक्रिया को अधिक प्रभावी और पारदर्शी बनाया गया है। ब्यूरो ने वर्ष 2025 की तुलना में भी ट्रैप केसों में 21.3 प्रतिशत वृद्धि दर्ज होने की जानकारी दी है।

रिश्वतखोर अधिकारियों को डॉ. चावला का कड़ा संदेश

हरियाणा राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो के प्रमुख डॉ. ए.एस. चावला ने भ्रष्टाचार में लिप्त अधिकारियों और कर्मचारियों को कड़ा संदेश दिया है। उन्होंने कहा कि जो अधिकारी या कर्मचारी रिश्वत के बिना आमजन का जायज काम नहीं करते, लोगों को जानबूझकर सरकारी कार्यालयों के चक्कर कटवाते हैं या अपने पद का दुरुपयोग कर उन्हें परेशान करते हैं, वे यह गलतफहमी निकाल दें कि कानून उनका कुछ नहीं बिगाड़ सकता। डॉ. चावला ने कहा कि ऐसे अधिकारी और कर्मचारी एसीबी के रडार पर हैं। जनता को परेशान करके रिश्वत मांगने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी और किसी को भी बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने कहा कि सरकारी पद जनता की सेवा के लिए है, न कि लोगों को प्रताड़ित कर अवैध वसूली करने के लिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि ईमानदारी से काम करना प्रत्येक सरकारी कर्मचारी की जिम्मेदारी है। जो लोग इस जिम्मेदारी से बचते हुए भ्रष्टाचार में शामिल होते हैं, उन्हें कानून के अनुसार जवाबदेह बनाया जाएगा।

नौ माह में 191 आपराधिक मुकदमे दर्ज

एसीबी के आंकड़ों के अनुसार, 1 जनवरी से 30 सितंबर 2026 तक विभिन्न अधिकारियों, कर्मचारियों और निजी व्यक्तियों के खिलाफ कुल 191 आपराधिक मुकदमे दर्ज किए गए। इनमें 155 ट्रैप केस शामिल हैं। इन मामलों में 16 राजपत्रित अधिकारियों, 131 अराजपत्रित कर्मचारियों और 25 निजी व्यक्तियों सहित कुल 172 आरोपियों को रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों पकड़ा गया। ब्यूरो के मुताबिक, आरोपियों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की संबंधित धाराओं के तहत मामले दर्ज कर नियमानुसार कार्रवाई की गई। इन कार्रवाइयों का उद्देश्य रिश्वतखोरी पर अंकुश लगाना और सरकारी व्यवस्था में जवाबदेही सुनिश्चित करना है।

जांच और विभागीय कार्रवाई में भी तेजी

एसीबी ने वर्ष 2026 के दौरान 30 सितंबर तक 88 नई जांचें दर्ज कीं। वहीं, 15 सितंबर तक उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार 61 जांचें पूरी की गईं। इन जांचों में से 16 के आधार पर 74 राजपत्रित अधिकारियों और 20 अराजपत्रित कर्मचारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की सिफारिश की गई। इसके अतिरिक्त, 10 जांचों में सात राजपत्रित अधिकारियों, 16 अराजपत्रित कर्मचारियों और 40 निजी व्यक्तियों के खिलाफ आपराधिक मुकदमा दर्ज करने की सिफारिश की गई। ब्यूरो का कहना है कि भ्रष्टाचार से संबंधित शिकायतों की जांच के साथ-साथ संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों के विरुद्ध आगे की कार्रवाई के लिए भी कदम उठाए जा रहे हैं।

21 मामलों में 26 आरोपियों को कठोर कारावास

भ्रष्टाचार के मामलों में दोषसिद्धि को भी कार्रवाई का महत्वपूर्ण हिस्सा बताते हुए एसीबी ने जानकारी दी कि 1 जनवरी से 30 सितंबर 2026 के दौरान 21 आपराधिक मामलों में कुल 26 आरोपियों को कठोर कारावास की सजा सुनाई गई। इनमें 23 अधिकारी एवं कर्मचारी और तीन निजी व्यक्ति शामिल हैं। इन आरोपियों को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की विभिन्न धाराओं के तहत सजा सुनाई गई। दोषसिद्ध अधिकारियों एवं कर्मचारियों में विद्युत विभाग के पांच, पुलिस विभाग के छह, शहरी स्थानीय निकाय विभाग का एक, सिंचाई विभाग के दो, शिक्षा विभाग के दो, आबकारी एवं कराधान विभाग के दो तथा राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग के दो अधिकारी या कर्मचारी शामिल हैं। इसके अलावा, स्किल डेवलपमेंट विभाग, हरियाणा वेयरहाउस और हरियाणा राज्य औद्योगिक एवं संरचना विकास निगम के एक-एक अधिकारी या कर्मचारी को भी सजा सुनाई गई।

शिकायत से कार्रवाई तक की प्रक्रिया को बनाया गया प्रभावी

हरियाणा सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति के तहत भ्रष्टाचार से संबंधित शिकायतों पर त्वरित संज्ञान लेने और ट्रैप कार्रवाई को प्रभावी बनाने पर जोर दिया जा रहा है। एसीबी के अनुसार, शिकायतों की पहचान, निगरानी और कार्रवाई की प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाया गया है। ब्यूरो का मानना है कि ट्रैप केसों में वृद्धि बेहतर शिकायत-निवारण व्यवस्था, सक्रिय निगरानी और भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई के प्रति नागरिकों के बढ़ते विश्वास को दर्शाती है।

एसीबी ने आमजन से की अपील

डॉ. ए.एस. चावला ने कहा कि हरियाणा एसीबी सरकारी तंत्र में पारदर्शिता, जवाबदेही और ईमानदारी सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने आमजन से अपील की कि यदि कोई सरकारी अधिकारी या कर्मचारी किसी सरकारी काम के बदले रिश्वत मांगता है, तो इसकी सूचना एसीबी के ऐप ‘सतर्क हरियाणा’ के माध्यम से दें। उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार से संबंधित शिकायतों पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। ब्यूरो ने स्पष्ट किया कि रिश्वतखोरी और पद का दुरुपयोग करने वालों के खिलाफ अभियान लगातार जारी रहेगा।

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Author: New India News Network

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